जल्‍द ही दिल्‍ली पर हो सकता है प्रदूषण का घातक हमला

तमाम रोक के बावजूद नहीं मान रहे पड़ोसी राज्‍य के किसान।

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Written By: Yogita Yadav | Published : September 24, 2018 8:52 AM IST

प्रदूषण ऐसा जहर है जिसे हम खुद पैदा करते हैं। जरा सी मानसिक लापरवाही सांसों के लिए कितना बड़ा संकट खड़ा कर सकती है, पिछले कुछ वर्षों से दिल्‍ली इसकी गवाह रही है। सर्दियों की दस्‍तक के साथ ही यहां प्रदूषण का घातक हमला शुरू हो जाता है। इस पर सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने भी संज्ञान लिया। इसके बावजूद पड़ोसी राज्‍य के किसान हठ ठान कर बैठे हैं। हरियाणा और पंजाब के किसानों द्वारा अगली फसल की तैयारी में खेतों में पराली जलाने की घटना से पूरी दिल्‍ली स्‍मॉग में खो जाती है। इस बार भी यही खतरनाक दस्‍तक फि‍र से महसूस होने लगी है। तमाम रोक के बावजूद इस साल भी पराली जलाने की घटनाएं सामने आने लगी हैं।

सामने आ रहे हैं ताजा मामले

करनाल जिले में पराली जलाने के 61 मामले सामने आए हैं। इनमें 26 मुकदमे दर्ज किए हैं और 35 किसानों से 90 हजार रुपये का जुर्माना वसूला गया है।  मानसून के तुरंत बाद किसान रबी की फसल के लिए खेतों को तैयार करने के लिए पराली जलाना शुरू कर देते हैं। चूंकि मानसून लौट रहा होता है और उस समय हवाओं की दिशा पश्चिमोत्तर होती है। इस प्रकार ये हवाएं पराली से होने वाले प्रदूषण का बड़ा हिस्सा दिल्ली और रास्ते में पड़ने वाले शहरों तक पहुंचाती है। सीपीसी के आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल भी अक्तूबर में दिल्ली की हवा की गुणवत्ता में गिरावट शुरू हुई थी और महीने के तीसरे हफ्ते में चिंताजनक स्थिति में पहुंच गई थी।

कितना घातक 

- 60 किलो कार्बन मोनो ऑक्साइड निकलता एक टन पराली जलाने पर

- 1,460 किलो कार्बन डाई ऑक्साइट का उत्सर्जन होता, 199 किलो राख

- 3 किलो सूक्ष्म कण और दो किलो सल्फर डाइ ऑक्साइड का भी उत्सर्जन

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पिछले साल हजारों किसानों ने जलाई पराली

- 12,657 मामले हरियाणा में सामने आई

- 43,814 घटनाएं पंजाब में दर्ज की गई

- 46% कमी 2017 में आई 2016 के मुकाबले

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सरकार की कोशिश 

- 30 गांवों पर विशेष निगरानी कर रही हरियाणा सरकार

- 1,151 करोड़ रुपये हरियाणा ने पराली प्रबंधन को दिए

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