Don’t Miss Out on the Latest Updates.
Subscribe to Our Newsletter Today!
- लेटेस्ट
- डिज़ीज़
- डाइट
- फिटनेस
- ब्यूटी
- घरेलू नुस्खे
- वीडियो
- पुरुष स्वास्थ्य
- मेंटल हेल्थ
- फोटो स्टोरी
- आयुष
- पेरेंटिंग
- न्यूज
- वेब स्टोरीज
वैज्ञानिक व औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) कैंसर, मिरगी और सिकल सेल एनीमिया (खून की कमी) जैसे रोगों के उपचार के लिए भांग के औषधीय उपयोग पर शोध कर रही है। सीएसआईआर और भारतीय एकीकृत चिकित्सा संस्थान (आईआईआईएम) के निदेशक राम विश्वकर्मा ने शुक्रवार को यहां कहा, "हमें जम्मू-कश्मीर सरकार से शोध कार्यक्रम का संचालन करने का लाइसेंस मिला है। हमने इसपर पहले ही काम शुरू कर दिया है। मानव पर ड्रग के रूप में भांग के उपयोग की अनुमति के लिए जल्द ही हम भारत के ड्रग महानियंत्रक (डीसीजीआई) से मिलेंगे।"
यह भी पढ़ें - एचआईवी से ग्रस्त 9.4 मिलियन लोग अपनी बीमारी से हैं अनजान : यूएनएड्स रिपोर्ट
बांबे हेंप कंपनी (बोहेको) के सहयोग से सीएसआईआर-आईआईएम को भांग उगाने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने अप्रैल 2017 में लाइसेंस जारी किया था।
उन्होंने कहा कि प्राथमिक तौर पर भांग से प्राप्त औषधि का परीक्षण सबसे पहले मुंबई स्थित टाटा मेमोरियल अस्पताल में किया जाएगा।
यह भी पढ़ें – चेस्ट वाल की बीमारी से जूझ रहे इराकी लड़के को मिला नया जीवन
मददगार हो सकती हैं इससे निर्मित दवाएं
बांबे हेंप कंपनी (बोहेको) वैज्ञानिक व औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) और भारतीय एकीकृत चिकित्सा संस्थान (आईआईआईएम) की ओर से यहां आयोजित एक कार्यक्रम के मौके पर आईएएनएस से बातचीत में जमास ने कहा, "भांग में टेट्रा हाइड्रो कैनाबिनोल (टीएचसी) नामक एक रसायन होता है, जिससे नशा होता है। इसके अलावा भांग में सारे औषधीय गुण होते हैं।
यह भी पढ़ें – स्पर्म के बारे में ये सवाल, जो ज्यादातर कपल जानना चाहते हैं
उन्होंने कहा, "टीएचसी का उपयोग दर्द निवारक दवाओं में किया जाता है, जो कैंसर से पीड़ित मरीजों को दर्द से राहत दिलाने में असरदार होती है।"