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Written By: Pallavi Kumari | Updated : July 29, 2022 10:30 AM IST
कोरोना वायरस ने दुनियाभर के बच्चों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। ना सिर्फ बच्चे शरीरिक रूप से प्रभावित हुए हैं बल्कि, मानसिक रूप से भी वे प्रभावित हुए हैं। लेकिन हाल ही में संयुक्त राष्ट्र (United Nations) की आई एक रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया भर में लगभग 25 मिलियन बच्चे पोलियो, हेपेटाइटिस और डिप्थीरिया जैसी सामान्य बीमारियों के खिलाफ नियमित टीकाकरण से चूक गए हैं। ऐसे में नरेंद्र मोदी सरकार देश के सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम के तहत बच्चों के लिए पोलियो, हेपेटाइटिस और अन्य नियमित टीकों की बुकिंग के लिए Cowin ऐप के इस्तेमाल (cowin app to be used for kids vaccination) की योजना बना रही है। वो कैसे आइए जानते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनिसेफ अपनी रिपोर्ट में आंकड़े देते हुए कहा है कि कोरोना वाले बीते सालों में 25 मिलियन बच्चे डिप्थीरिया, टेटनस और पर्टुसिस के खिलाफ टीकाकरण से बचे रह गए। ये ज्यादातर बच्चे भारत जैसे विकासशील देशों से आते हैं। ऐसे में अगर भारत सरकार ऐसा कुछ करती है तो बच्चों में टीकाकरण आसान हो जाएगा। इसी बारे में राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, डॉ.आरएस शर्मा ने एक समाचार चैनल से बात करते हुए कहा कि Cowin को हम व्यापक रूप से टीकाकरण करवाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि Cowin ऐप को बच्चों के टीकाकरण के लिए फिर से तैयार करने का काम पहले ही शुरू हो चुका है और यह बस कुछ महीनों की बात है जब तकनीकी रूप से ये पूरी तरह तैयार होगा और नियमित टीकों की बुकिंग स्लॉट के लिए शुरू किया गया।
डॉ.आरएस शर्मा बताते हैं कि बच्चों में नियमित टीकाकरण के लिए आप अपने आधार और यूआईडीएआई (UIDAI) नंबर का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसकी मदद से जा कर आप टीके के अलग-अलग स्लॉट बुक कर सकते हैं। डॉ.आरएस शर्मा कहा कि इसके बारे में हम सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित कार्यक्रमों में बताएंगे भी। प्लेटफॉर्म को अब सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम के लिए फिर से तैयार किया जा रहा है। जबकि CowiN अपनी विशेषताओं को बनाए रखेगा, यह देश के लिए टीकाकरण कार्यक्रम के कवरेज को ट्रैक करने के लिए अत्यधिक फायदेमंद होगा।
डॉ.आरएस शर्मा ने बच्चों में नियमित टीकाकरण के लिए कोविन ऐप को लेकर एक विस्तृत जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि ये ऐप कैसे काम करेगा। जैसे कि
-CoWIN माता-पिता को रिमाइंडर भेजना जारी रखेगा, जैसा कि कोविड के टीकों के मामले में होता है।
-जैसे कि अगर आपके बच्चे को पोलियो टीका लगवाना है, तो सिस्टम माता-पिता को अलर्ट भेजेगा और उन्हें इस बारे में याद दिलाएगा।
- ये मंच राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के कवरेज की निगरानी में मदद करेगा और संपूर्ण डेटा को पुनः प्राप्त करेगा।
- अगर कोई टीका नहीं लग पाता है या फिर ड्रॉप हो जाता है तो भी ये रिमाइंडर भेजेगा जो टीकाकरण कार्यक्रम के कवरेज को और बेहतर बनाने में मदद करेगा।
-इसके अलावा Cowin आपके आस-पास के सभी अस्पतालों को टीकाकरण शॉट प्रदान करता हुआ दिखाएगा।
-बस आपको मोबाइल नंबर जमा करके अपॉइंटमेंट बुक करने की जरूरत है।
-उपयोगकर्ता टीकाकरण कार्यक्रम के पूरा होने के बाद डिजिटल टीकाकरण प्रमाणपत्र भी डाउनलोड कर सकेंगे।
डॉ. शर्मा बताते हैं कि भारत सरकार आयुष्मान भारत योजना के विस्तार के बारे में सोच रही है। शर्मा ने कहा कि यह केंद्र सरकार को तय करना है कि लाभार्थी इसका लाभ कैसे ले पाएंगे। यह योजना माध्यमिक और तृतीयक देखभाल अस्पताल में भर्ती के लिए 10 करोड़ से अधिक गरीब और कमजोर लोगों यानी कि लगभग 50 करोड़ लाभार्थियों को प्रति परिवार 5 लाख रुपये का वार्षिक स्वास्थ्य कवर प्रदान करती है। कुछ राज्य एसईसीसी-आधारित लाभार्थियों का पता लगाने में सक्षम नहीं थे और उन्होंने अपनी लाभार्थी सूची जोड़ ली है। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश ने अंत्योदय योजना को जोड़ा है। शर्मा ने कहा, हमने राज्यों से कहा है कि यह तब तक कोई समस्या नहीं है जब तक कि एसईसीसी डेटा के अनुसार लाभार्थी आधार में परिवारों की कुल संख्या परिवारों की कुल संख्या से अधिक न हो।
डिजिटल स्वास्थ्य मिशन योजना के तहत स्वास्थ्य सुविधा रजिस्ट्री, दवा रजिस्ट्री और सहमति प्रबंधक जैसे बिल्डिंग ब्लॉक और अन्य घटक तैयार हैं। डॉ. शर्मा की मानें तो जो यूनिवर्सल हेल्थ इंटरफेस (यूएचआई) बनाया है, वह यूपीआई के समान है। यह एक पाइप की तरह है जहां एक तरफ, हमारे पास सभी साधक हैं जैसे एम्बुलेंस, अस्पताल और दवाओं की आवश्यकता वाले लोग और दूसरी तरफ, उन सभी सेवाओं जैसे कि लैब, डॉक्टर और फार्मेसियों के प्रदाता हैं। यूएचआई गूगल की तरह एक बहुत ही शक्तिशाली सर्च प्लेटफॉर्म है। इस तरह, यूएचआई अनुपालन के साथ स्वास्थ्य सेवाओं की खोज, बुकिंग और पूर्ति संभव हो पाएगी।
बता दें कि भारत सरकार ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन 2022 के तरह इस योजना की शुरुआत की थी। इसमें आम लोगों के हेल्थ आईडी कार्ड (Health ID Card) बनाने की बात कही गई है। इसमें नागरिकों का हेल्थ डाटाबेस स्टोर होगा। इस डाटाबेस को डॉक्टरों द्वारा नागरिकों की सहमति से देखा जा सकेगा। इस डेटाबेस में नागरिकों के सेहत से जुड़ी सभी जानकारियां जैसे कि पुरानी बीमारियों के रिपोर्ट, दवाइयों की लिस्ट और दवाइयों से एलर्जी आदि के बारे में बताया जाएगा, जिसकी मदद से डॉक्टर व्यक्ति का केस आसानी से समझ पाएंगे और उनका इलाज कर पाएंगे। इसी बारे में डॉ. शर्मा का कहना है कि भारत अब तक 23 करोड़ से ज्यादा हेल्थ आईडी बना चुका है।
तो, इन तमाम चीजों से उम्मीद करते हैं कि भारत सरकार आम लोगों के स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए बेहतर ढंग से काम करेगी। साथ ही इसे डिजिटल बना कर इलाज और तमाम स्वास्थ्य सुविधाओं तक लोगों की पहुंच को आसान बनाएगी।