Covid Vaccine In Human DNA: कोविड वायरस या वैक्सीन, नहीं करते मानव डीएनए में प्रवेश, स्टडी में हुआ खुलासा

एक नयी स्टडी में इस बात को पूरी तरह से नकार दिया गया है। इस स्टडी के अनुसार, कोविड वैक्सीन किसी भी व्यक्ति के डीएनए में प्रवेश नहीं कर सकती है। (Covid Vaccine In Human DNA)

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : August 2, 2021 9:37 AM IST

Covid Vaccine In Human DNA: कोरोना वायरस की वैक्सीन लगवाने से कतरा रहे लोगों के बीच कई तरह की अफवाहें और झूठीबैतें भी प्रचलित हैं। ऐसी ही एक बात यह भी कुछ समय से उठ रही है कि कोरोना वायरस की वैक्सीन (Covid-19 Vaccine) लगवाने से यह ह्यूमन डीनए में प्रवेश कर गम्भीर समस्याओं की वजह बन सकता है। लेकिन एक नयी स्टडी में इस बात को पूरी तरह से नकार दिया गया है। इस स्टडी के अनुसार, कोविड वैक्सीन किसी भी व्यक्ति के डीएनए में प्रवेश नहीं कर सकती है। (Covid Vaccine In Human DNA in Hindi)

नहीं मिले वैक्सीन के DNA में प्रवेश के सबूत

ऑस्ट्रेलियाई रिसर्चर्स ने सॉर्स कोव 2 से जुड़े उन  दावों का खंडन किया है जिसमें कहा जा रहा है कि टीके की दवा डीएनए को भी प्रभावित कर सकती है।शोधकर्ताओं ने कहा है कि,  संक्रामक बीमारी का कारण बनने वाला सार्स कोव-2, इसकी आनुवंशिक सामग्री को मानव जीनोम में एकीकृत करता है।  जर्नल सेल रिपोर्ट्स में प्रकाशित इस स्टडी के परिणामों के मुताबिक,  कि कोविड -19 और फाइजर, एस्ट्राजेनेका के टीके डीएनए में प्रवेश करने का कोई सबूत नहीं है। (Covid Vaccine In Human DNA)

क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी के शोधकतार्ओं ने कहा कि झूठे दावों ने लोगों को डराया है और लोगों को टीकाकरण से संकोच नहीं करना चाहिए शोध ने पुष्टि की कि कोई असामान्य वायरल गतिविधि नहीं थी और कोविड -19 व्यवहार एक कोरोनावायरस से अपेक्षित के अनुरूप था।

क्यों नहीं करती कोविड वैक्सीन DNA में प्रवेश

यूनिवर्सिटी के क्वींसलैंड ब्रेन इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर ज्योफ फॉल्कनर ने कहा कि सबूत उस अवधारणा का खंडन करते हैं जिसका इस्तेमाल टीके की हिचकिचाहट को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है। हमें सॉर्स कोव 2 एकीकरण का कोई सबूत नहीं मिला है, और यह बताता है कि इस तरह की घटनाएं विवो में अत्यंत दुर्लभ हैं। इसलिए ऑन्कोजेनेसिस को चलाने या वायरस के बाद की वसूली का पता लगाने की संभावना नहीं है।

फॉल्कनर ने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से, हम कहेंगे कि कोई चिंता की बात नहीं है कि वायरस या टीके को मानव डीएनए में शामिल किया जा सकता है।

प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित अपने पिछले शोध में, फॉल्कनर ने सुझाव दिया कि रिकवरी के लंबे समय बाद सकारात्मक कोविड -19 परीक्षण वायरस के डीएनए में शामिल होने के कारण होते हैं। हमने उनके दावों पर गौर किया कि मानव कोशिकाओं और मशीनरी ने कोविड -19 आरएनए को डीएनए में बदल दिया, जिससे स्थायी उत्परिवर्तन हुआ।

उन्होंने कहा कि हमने प्रयोगशाला में विकसित कोशिकाओं के दावों का आकलन किया, डीएनए अनुक्रमण किया और डीएनए में कोविड -19 का कोई सबूत नहीं मिला।

मई में, अमेरिका के इंडियाना में पर्डयू विश्वविद्यालय के शोधकतार्ओं ने दिखाया कि हालांकि पूरे मानव इतिहास में ऐसे वायरस रहे हैं जो अपनी आनुवंशिक सामग्री को मानव जीन में एकीकृत करने में सक्षम हैं। कोविड वायरस में मानव डीएनए में अपने आरएनए को एकीकृत करने के लिए आणविक मशीनरी का अभाव है।

(आईएएनएस)

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