
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Covid-19 Treatment: कोविड इंफेक्शन के लिए अभी तक ना तो किसी दवा का निर्माण किया जा सका है और ना ही किसी वैक्सीन को उपलब्ध कराया जा सकी है। ऐसे में दुनियाभर के एक्सपर्ट्स कोरोना वायरस के इलाज के लिए (Coronavirus Pandemic) विभिन्न थेरेपीज़ की खोज कर रहे हैं। ऐसा ही एक नया तरीका है एंटी-बॉडीज़ थेरेपी (New Antibody Therapy), जो इस समय चर्चा में है। वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के अनुसार एंटीबॉडी थेरेपी (Antibody therapy) इस जानलेवा बीमारी के खिलाफ कारगर हो सकती है। (Covid Treatment in hindi)
कोविड-19 इंफेक्शन के इलाज के लिए वैज्ञानिक उपचार के विभिन्न तरीकों के साथ प्रयोग कर रहे हैं। जिसमें, पहले से उपलब्ध दवाइयों की मदद से इलाज का तरीका, सबसे प्रमुख है। इसके अलावा ब्लड प्लाज़्मा थेरेपी (blood plasma therapy) के साथ भी वैज्ञानिकों को थोड़ी सफलता मिली है। इस प्रक्रिया में ठीक हो चुके कोविड मरीज़ों के रक्त में मौजूद एंटी-बॉडीज़ की मदद से दूसरे पीड़ित व्यक्ति के इलाज की कोशिश की जाती है। वैसे तो शुरुआती स्तर पर इसमें थोड़ी कामयाबी मिलती दिखायी पड़ रही है। हालांकि, इसके अलावा भी शोधकर्ता रिसर्च कर रहे हैं और नोवल कोरोना वायरस के इलाज के लिए नयी प्रक्रियाओं की तलाश में हैं। ऐसी ही एक थेरेपी है मोनोक्लोनल एंटी-बॉडीज़ (Monoclonal antibodies)
अमेरिकन फार्मा कम्पनी एली लिली एंड कम्पनी (Eli Lilly and Company) ने इन एंटीबॉडीज़ के साथ ह्यूमन ट्रायल की शुरुआत की है। उम्मीद जतायी जा रही है कि, सितंबर महीने की शुरुआत तक कोविड-19 की एक नयी दवा उपलब्ध हो सकेगी। मोनोक्लोनल एंटी बॉडीज़ को आसानी से आइसोलेट किया जा सकता है और इसे बहुत बड़ी मात्रा में तैयार भी किया जा सकता है। अभी तक इन्हें, इबोला, कैंसर और रूमेटाइड आर्थराइटिस के लिए ही इस्तेमाल किया जा सकता है। साइंटिस्ट का मानना है कि इस थेरेपी में इस्तेमाल होने वाली दवाइयां बाकी रिपर्पस्ड दवाइयों की तुलना मे ज़्यादा असरकारक हैं।
फिलहाल एली लिली एंड कम्पनी 2 अलग-अलग ट्रीटमेंट्स के लिए मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज़ का इस्तेमाल कर रही है और इसके ह्यूमन ट्रायल की प्रक्रिया भी शुरु हो रही है। इन दोनों प्रक्रियाओं में स्पाइक प्रोटीन (Spike Protien) को ब्लॉक कर दिया जाता है। गौरतलब है कि स्पाइक प्रोटीन मानव सेल्स में पहुंचने के बाद कई गुना बढ़ जाता है और यह नोवेल कोरानावायरस (Novel Coronavirus) का संक्रमण पैदा करता है।
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