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Universal Testing for Covid-19: जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी (जेएचयू) के शोधकर्ताओं ने जोर दिया है कि यूनिवर्सल टेस्टिंग सार्स-सीओवी-2 का प्रसार कम करने में मददगार हो सकता है, जो कि कोविड-19 वायरस का कारण है। द न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित एक लेख में लगाए गए अनुमान के मुताबिक, अमेरिका में कोविड-19 के केवल 10 प्रतिशत मामलों को लंबे समय तक देखभाल की जरूरत हुई है और कुल मौतों में से 42 फीसदी लोग इन्हीं में से थे। (Universal Testing for Covid-19)
जॉन्स हॉपकिन्स के वरिष्ठ लेखक मोरगन काट्ज ने कहा, "लंबे समय तक देखभाल सुविधाओं में रहने वाले कोविड-19 मामलों के वास्तविक बोझ की पहचान करने के लिए हमें अधिक परीक्षण संसाधनों की तत्काल आवश्यकता है, ताकि हम रोग के इस प्रमुख स्थानों में से एक में संक्रमण और मृत्युदर को रोकने में अधिक सफल हो सकें।"
अपने अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने अमेरिका के मैरीलैंड में 11 दीर्घकालिक देखभाल सुविधाओं में सभी 893 पुरुषों और महिलाओं के बीच सार्स-सीओवी -2 के लिए 'यूनिवर्सल टेस्टिंग' की गई। इससे पहले, कोविड-19 के लक्षण दिखाने वाले लोगों का स्थानीय स्वास्थ्य विभागों द्वारा 'टारगेटेड टेस्ट' किए गए थे।
893 परीक्षण में से 354 लोग यानी लगभग 40 प्रतिशत में सार्स-सीओवी-2 आरएनए के लिए पॉजिटिव पाए गए, जबकि लक्षणों के आधार पर किए गए पहले के लक्षित परीक्षण में 153 (17 प्रतिशत) की ही पहचान हुई थी। लिहाजा, शोधकर्ताओं ने यूनिवर्सल टेस्टिंग को ही दीर्घकालिक देखभाल सुविधाओं में रह रहे लोगों के लिए उपयोगी बताया।
गौरतलब है कि बृह्नमुंबई महानगर पालिका ने कुछ दिन पहले ही घोषणा की थी कि, अब शहर में बहुत जल्द ही मिशन यूनिवर्सल टेस्टिंग प्रोग्राम की मदद से कोविड-19 मरीज़ों का पता लगाया जाएगा। तो वहीं, नोएडा सहित देश के कुछ अन्य हिस्सों में भी एंटीजेन टेस्ट किट की मदद से यह प्रक्रिया शुरु कर दी गयी है। बीएमसी भी इन्हीं एंटीजेन किट्स का इस्तेमाल करेगी। एंटीजेन किट्स की मदद से केवल 30 मिनट में रिज़ल्ट्स पता चला सकते हैं। जिससे, कोविड-19 मरीज़ों की समय पर और अधिक तादाद में टेस्टिंग हो सकेगी। इसके लिए महानगर पालिका द्वारा शहर के प्राइवेट हॉस्पिटल्स को एंटीजन टेस्टिंग किट खरीदने के आदेश दिए गए हैं। वहीं बीएमसी की तरफ से एक लाख से अधिक किट्स उपलब्ध कराएगी।