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हवा के सम्पर्क में आने के बाद 5 मिनटों में ही कमजोर होने लगता है कोरोना वायरस, स्टडी में हुआ खुलासा

इस नयी स्टडी में  यह बात सामने आयी है कि यह खतरनाक वायरस हवा के संपर्क में आने के 20 मिनट बाद संक्रमण फैलाने की  अपनी क्षमता को काफी हद तक खो देता है।

हवा के सम्पर्क में आने के बाद 5 मिनटों में ही कमजोर होने लगता है कोरोना वायरस, स्टडी में हुआ खुलासा

Written by Sadhna Tiwari |Updated : January 12, 2022 9:37 PM IST

कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार (Coronavirsus Spread) के बारे में अब तक कहा जाता रहा है कि यह हवा से भी फैल सकता है। वहीं, एक नयी स्टडी में कहा गया है कि हवा के सम्पर्क में आने के महज पांच मिनटों के अंदर ही कोरोना वायरस के संक्रमण फैलाने की क्षमता बहुत कम होने लगती है। इस स्टडी के अनुसार, अगले 20 मिनटों के भीतर कोरोना वायरस 90 प्रतिशत तक कमजोर हो जाता है। इस नयी स्टडी के परिणामों के बारे में अंग्रेजी अखबार गार्जियन में एक रिपोर्ट छापी गयी जिसमें लिखा गया कि, इस नयी स्टडी में  यह बात सामने आयी है कि यह खतरनाक वायरस हवा के संपर्क में आने के 20 मिनट बाद संक्रमण फैलाने की  अपनी क्षमता को काफी हद तक खो देता है।

मास्क पहनना है संक्रमण से बचने का सही तरीका

इस रिसर्च के निष्कर्षों में यह बातें भी सामने आयी हैं कि इस वायरस से बचने का सबसे आसान और प्रभावी तरीके हैं मास्क पहनना (Wearing a Face Mask)और सोशल डिस्टेंसिंग (Social Distancing) के नियमों का पालन करना है। स्टडी के अनुसार, इस वायरस के प्रभाव को कम करने के लिए वेटिंलेशन (हवादार जगह) एक सार्थक उपाय है।

ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी के एरोसोल रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर और इस रिसर्च के प्रमुख लेखक जोनाथन रीड के मुताबिक, लोग खराब वेटिंलेशन वाले इलाके में रहकर सोचते हैं कि एयरबोर्न संक्रमण से दूर रहेंगे। उन्होंने कहा कि मैं यह नहीं कहता कि ऐसा नहीं है, मगर यह भी तय है कि एक दूसरे के करीब रहने से ही कोरोना संक्रमण फैलता है।

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उन्होंने कहा कि जब एक शख्स से दूसरे शख्स के बीच कुछ दूरी होती है तो वायरस अपनी संक्रामकता खो देता है क्योंकि ऐसे में उसका एरोसोल पतला होता जाता है। ऐसी स्थिति में वायरस कम संक्रामकहोता है।

5 सेकेंड के भीतर कम हो जाती है वायरस संक्रामकता

शोधकर्ताओं ने हवा में वायरस के फैलने को लेकर रिसर्च किया है, जिसमें वायरस को दो इलेक्ट्रिक रिंगों के बीच हवा में तैरने दिया गया है। शोधकतार्ओं ने वायरस युक्त कण उत्पन्न करने के लिए एक उपकरण विकसित किया और उन्हें कड़े नियंत्रित वातावरण में पांच सेकंड और 20 मिनट के बीच कहीं भी दो इलेक्ट्रिक रिंगों के बीच तैरने की इजाजत दी गई।

रिसर्च में वैज्ञानिकों ने देखा कि एक इंसान के फेफड़े से निकलने के बाद कोरोना के वायरस की नमी या एयरोसेल (Aerosol) काफी तेजी से खत्म हो जाता है और वातावरण में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड के लोअर लेवल के संपर्क में आने के बाद वायरस की क्षमता प्रभावित होती है।

रिपोर्ट के अनुसार, हवा में आने के कुछ देर बाद कार्बन डाइऑक्साइड (Carbon Dioxide) मानव कोशिकाओं को संक्रमित करने की वायरस की क्षमता को प्रभावित करता है। रिसर्चर्स ने पाया कि,

  • किसी ऑफिस के एक ऐसे वातावरण में, जहां आसपास के क्षेत्र की नमी आमतौर पर 50 प्रतिशत से कम होती है, वायरस पांच सेकंड के भीतर अपनी संक्रमण फैलाने की 50 प्रतिशत क्षमता खो देता है और धीरे धीरे वायरस बेअसर होने लगता है।
  • इसके साथ ही, ज्यादा नमी वातावरण में, उदाहरण के लिए, स्टीम रूम या शॉवर रूम में वायरस की रफ्तार काफी धीमी हो जाती है। हालांकि, शोधकर्ताओं ने पाया कि तापमान ने वायरल संक्रामकता पर थोड़ा अंतर डाला है और गर्म वातावरण में इस वायरस की रफ्तार ज्यादा तेज होती है।
  • ऐसी परिस्थितियों को देखते हुए जोनाथन रीड ने मास्क पहनने के महत्व पर प्रकाश डाला और इसे पहनने की अपील की।

शोधकर्ताओं को सभी तीन सार्स-सीओवी-2 वैरिएंट में ऐसा ही समान प्रभाव देखने को मिला, जिसमें अल्फा भी शामिल है। रिपोर्ट में कहा गया है कि शोधकर्ता आने वाले हफ्तों में ओमिक्रॉन वैरिएंट के साथ भी प्रयोग शुरू करने की उम्मीद कर रहे हैं।

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(आईएएनएस)