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कोरोना वैक्सीन: क्या हैं आरएन वैक्सीन्स? जानें, कितने सुरक्षित हैं ये टीेके।
Covid-19 Vaccine: कोरोना वायरस महामारी के वैक्सीन (Covid-19 Vaccine) की खोज के लिए दुनियाभर में होड़ लगी है। इस दौरान ब्रिटेन, जर्मनी, चीन और अमेरिका के वैज्ञानिक एक अलग और बिल्कुल नये तरीके से वैक्सीन्स के निर्माण की कोशिश कर रहे हैं। इसे आरएनए बेस्ड वैक्सीन्स (RNA Based Vaccine) कहा जाता है। भले ही इन वैक्सीन्स से लोगों को बहुत अधिक उम्मीदें हैं। लेकिन, इस तरीके को अभी तक मंज़ूरी नहीं मिली है। वैक्सीन बनाने की इस तकनीक में जेनेटिक्स के एक छोटे से स्निप की मदद से इम्यून सिस्टम (Immune System) को उत्तेजित करने की कोशिश की जाती है। आरएनए आधारित वैक्सीन में शरीर को एंटीबॉडी का निर्माण करने के लिए सक्षम बनाया जाता है, जो कोविड-19 से सुरक्षा देता है।
अब, रातोंरात ऐसी 3 आरएनए वैक्सीन्स को, कोविड-19 इंफेक्शन के खिलाफ सबसे अच्छी वैक्सीन बताया जा रहा है। कुछ कम्पनियों ने साल के अंत तक करोड़ों की संख्या में इस वैक्सीन के निर्माण की भी योजना बनायी है। एक थ्योरी के तौर पर यह बेहतर मालूम हो रहा है। लेकिन इस तरह से वैक्सीन का निर्माण थोड़ा मुश्किल लग रहा है।
पीटर होटेज कोरोना वायरस वैक्सीन बनाने के लिए कई वर्षों से प्रयासरत हैं। उन्होंने बताया कि क्यों मौजूदा महामारी के माहौल में वैक्सीन बनने के लिए इतना अधिक समय लग सकता है। कई अंतर्राष्ट्रीय कम्पनियों के अलावा दुनिया भर में एकेडमिक ग्रुप्स और सरकारी लेबोरेटरीज़ में लगभग 150 से अधिक वैक्सीन्स के निर्माण पर काम चल रहा है। तो वहीं कई कम्पनियां पारम्परिक तरीकों से वैक्सीन्स का निर्माण करने की कोशिश कर रही हैं। मौजूदा समय में 17 कम्पनियां अपने वैक्सीन्स का ह्यूमन ट्रायल (Human Trials of Covid-19 Vaccines) कर रही हैं और इनमें से कम से कम 5 आरएनए वैक्सीन्स (RNA vaccines) हैं।
आरएनए वैक्सीन पर यह स्टडी इम्पीरियल कॉलेज, लंदन की एक छोटी सी लैबोरेटरी से शुरु हुई और यह फाइज़र, मॉडर्ना और क्यूरवैक जैसी बड़ी कम्पनियों में भी आरएनए वैक्सीन्स पर काम चल रहा है।
अगर सबकुछ ठीक रहा तो, अमेरिका में आरएनए वैक्सीन के ट्रायल का तीसरा चरण कुछ ही दिनों में शुरु हो जाएगा। जिसमें, यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि कोरोना वायरस महामारी और कोविड-19 इंफेक्शन के खिलाफ यह वैक्सीन कितनी कारगर है। इस वैक्सीन के ट्रायल के लिए कई मिलियन लोगों पर दवाई की जांच की जाएगी। जिनमें, से आधे को टीका लगाने और आधे लोगों को प्लेसेबो देने की योजना है।
इस वैक्सीन का मकसद इम्यून सिस्टम को कोरोना वायरस की पहचान और उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम बनाना है। साइंटिस्ट को इसकी सफलता की काफी उम्मीद है। लेकिन, सवाल यही है कि क्या यह इतने सारे लोगों को लगाने के लिहाज से यह वैक्सीन सुरक्षित है। जैसा कि, यह एक नयी तकनीक है, इसीलिए, अभी यह कहा नहीं जा सकता है कि यह कितने दिन तक चलेगी या कितनी कारगर साबित होगी।