ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने भारतीय मूल के दीपक पालीवाल पर कोरोना वैक्सीन का किया सफल ह्यूमन ट्रायल, सितंबर में आ सकती है वैक्सीन 

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने अपना पहला ह्यूमन ट्रायल पूरा कर लिया है और यह पहला परीक्षण भारतीय मूल के दीपक पालीवाल पर किया गया है। इस मानवीय परीक्षण में यूनिवर्सिटी को सफलता हासिल हुई है। ऑक्सफोर्ड को यकीन है कि उनकी वैक्सीन सफल रहेगी और सितंबर 2020 तक वैक्सीन लोगों के लिए उपलब्ध होगी।

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Written By: Anshumala | Updated : July 17, 2020 11:56 AM IST

Deepak Paliwal Human Trial : आज पूरी दुनिया को सिर्फ कोरोना की वैक्सीन का इंतजार है। देश-दुनिया की कंपनियां कोविड-19 की वैक्सीन बनाने में जुटे हुए हैं। कुछ ने तो क्लिनिकल ट्रायल (corona vaccine human trial) में भी सफलता हासिल कर ली है। खबर है कि ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी (Oxford University) ने अपना पहला ह्यूमन ट्रायल पूरा कर लिया है। इस मानवीय परीक्षण में उसे सफलता हासिल हुई है। ऑक्सफोर्ड को यकीन है कि यह वैक्सीन सफल रहेगी और सितंबर 2020 तक वैक्सीन लोगों के लिए उपलब्ध होगी।

ह्यूमन ट्रायल (corona vaccine human trial) के लिए कुछ लोगों की जरूरत होती है, ताकि पता लगाया जा सके कि वैक्सीन कितनी कारगर है, इसके कोई साइड एफेक्ट्स तो व्यक्ति पर नजर नहीं आ रहे हैं। कई बार इसमें व्यक्ति की जान को भी खतरा रहता है। इस कार्य को करने के लिए कई वॉलंटियर्स की जरूरत पड़ती है। भारतीय मूल के जयपुर के रहने वाले दीपक पालीवाल (Deepak Paliwal) ने अपनी जान को दांव पर लगा दिया, ताकि कोरोना की वैक्सीन का ह्यूमन ट्रायल हो सके।

क्या करते हैं दीपक पालीवाल

मूल रूप से दीपक भारतीय हैं, लेकिन लंदन में रहते हैं। वहां एक फार्मा कंपनी में काम करते हैं। दीपक को यह पता था कि कोरोना वैक्सीन (Corona vaccine) के लिए ह्यूमन ट्रायल (corona vaccine human trial in hindi) में उनकी जान जा सकती है, लेकिन फिर भी वो इस कार्य के लिए तैयार हुए, क्योंकि उन्हें समाज के लिए कुछ करने की इच्छा थी। दीपक ने जी न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि क्लिनिकल ट्रायल में जोखिम होता है, इस बात की जानकारी थी मुझे, लेकिन किसी ना किसी को तो ट्रायल में शामिल होना ही था वरना ये कभी सफल नहीं हो पाता।

पत्नी ने मना किया था ट्रायल के लिए

दीपक ने जयपुर में अपने पेरेंट्स को भी इसकी जानकारी नहीं दी थी, लेकिन जब पत्नी को यह बात पता चली तो वह डर गईं और ह्यूमन ट्रायल के लिए दीपक को मना किया, क्योंकि उन्हें चिंता थी कहीं कुछ हो ना जाए। ट्रायल में कई तरह के केमिकल का इस्तेमाल शरीर पर परीक्षण के लिए किया जाता है, जिसके कई साइड एफेक्ट्स हो सकते हैं।

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ट्रायल के लिए दिखाया गया वीडियो

दीपक के अनुसार, ट्रायल (corona vaccine human trial) से पहले कुछ पढ़ने के लिए दिया गया था। वीडियो दिखाया गया था। इस वीडियो में ट्रायल से होने वाले इफेक्ट्स के बारे में जानकारी दी गई थी। इस वीडियो में ट्रायल के दौरान होने वाले बुखार और ऑर्गन डैमेज के बारे में बताया गया था। इतना ही नहीं, क्लिनिकल ट्रायल के दौरान आपकी मौत भी हो सकती है, इसका भी जिक्र था।

कब हुई ट्रायल की शुरुआत

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने क्लिनिकल ट्रायल (covid-19 vaccine human trial by Oxford University) की शुरुआत की तारीख 16 अप्रैल रखी गई थी। स्क्रीनिंग भी किया जाना था। दीपक सभी शुरुआती जांच में फिट पाए गए थे। उसके बाद उन्हें वैक्सीन लेने के लिए कहा गया। उनसे पूछा गया कि वो इसके लिए तैयार हैं या नहीं? दीपन ने इसके लिए अपनी सहमति जताई थी। उसके बाद ही उन्हें वैक्सीन दी गई। उन्हें तीन घंटे निगरानी में रखा गया। तीन घंटे के अंदर शरीर में रिएक्शन और प्रतिक्रियाएं नजर आने लगती हैं। वैक्सीन लेने के बाद शरीर में महसूस होने वाले लक्षणों पर गौर किया जाता है। कुछ दिनों बाद एक टेस्ट किया जाता है, ताकि पता चल सके शरीर में एंटी-बॉडी बन रही है या नहीं। फिलहाल, दीपक पर कोरोना वैक्सीन का सफल परीक्षण हो गया है और वह पूरी तरह से ठीक हैं।

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