
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : September 23, 2020 1:18 PM IST
कोरोना वायरस संक्रमण से सुरक्षित रहने के लिए मास्क पहनना अनिवार्य बताया गया है। लोग हवा में फैली वायरस वाली छोटी बूंदों के सम्पर्क में आने से बचने के लिए लोग अलग-अलग तरह के मास्क और फेस शील्ड का इस्तेमाल करते हैं। पब्लिक ट्रांसपोर्ट से यात्रा करते समय और ऑफिस में काम करने वाले लोग फेस शील्ड का काफी प्रयोग कर रहे हैं। लेकिन, दुनिया के सबसे तेज़ कम्प्यूटर प्रोग्राम के अनुसार, फेस शील्ड कोरोना से बचा नहीं सकता।
यह दावा किया गया है जापान की एक कंपनी जिसका नाम है रिकेन साइंटिफिक रिसर्च सेंटर। कम्पनी के सुपर कम्प्यूटर फुगाकू को दुनिया का सबसे तेज़ कम्प्यूटर माना जाता है। यह कम्प्यूटर केवल एक सेकेंड में 415 क्वाड्रिलियन की कैल्कुलेशन्स करने में सक्षम है। मिली जानकारी के अनुसार, इस सुपर कम्प्यूटर ने इस बात का भी पता लगा लिया है कि हवा में कैसे सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया के दौरान छोटी बूंदें फैल सकती हैं।
इस कम्प्यूटर की एक गणना के अनुसार, प्लास्टिक फेस शील्ड को लोग कोविड-19 से बेहतर सुरक्षा के लिए पहन रहे हैं। लेकिन, यह शील्ड ऐरोसॉल (Aerosols) यानि हवा में फैली छोटी बूंदों को रोकने में सक्षम नहीं है। इसीलिए, इस शील्ड को सेफ नहीं कहा जा सकता।
द गार्जियन में छपी इस रिपोर्ट के अनुसार, रिकेन सेंटर में टीम हेड मकोटो त्सुबोकोरा (Makoto Tsubokura) ने बयान दिया है कि फेस शील्ड को कोविड-19 से सुरक्षा देने वाले फेस मास्क की जगह इस्तेमाल करना नहीं चाहिए। क्योंकि, शील्ड फेस मास्क की तुलना में अधिक कारगर नहीं मानी जा सकती।
बता दें कि इस निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले विश्व के सबसे तेज़ कम्प्यूटर फुगाकू (Fugaku) द्वारा कोविड-19 महामारी के दौरान इस्तेमाल की जा रही है, फेस शील्ड का गणना की गयी। प्लास्टिक से बनी फेस शील्ड में हवा में फैली 100 प्रतिशत ड्रॉपलेट्स या पानी की नन्हीं बूंदें 5 माइक्रोमीटर से छोटे आकार की दिखायी दीं। ये बूंदें प्लास्टिक विजर्स के बच निकल सकती हैं। इससे इस नतीज़े पर पहुंचा गया कि पानी की ये छींटें फेस शील्ड पहनने वाले व्यक्ति के लिए कोविड-19 इंफेक्शन की चपेट में आने का खतरा कम नहीं होता।