
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Published : November 22, 2020 5:34 PM IST
Covid-19 Reinfection: कोरोना वायरस महामारी के मरीज़ों की संख्या भारत में 90 लाख से अधिक हो गयी है वहीं, वैश्विक स्तर पर कोरोना वायरस के मामले 4.8 करोड़ हो गए हैं। कोरोना महामारी की दूसरी लहर का खतरे की आशंकार भी कई देशों में आधाकारिक तौर पर की गयी है। वहीं, कई यूरोपिय देशों में कोविड-19 के केसेस में तेज़ रफ्तार से केसेस बढ़ने लगे हैं। इसीलिए, इंफेक्शन से बचाव के लिए उपायों को अपनाने और सोशल डिस्टेसिंग का पालन करने के लिए लोगों से अपील की जा रही है। (Covid-19 Reinfection)
इस बीच वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस से जुड़ा एक महत्वपूर्ण खुलासा किया है। जर्नल 'द लांसेट माइक्रोब' (The Lancet Microbe) में एक रिपोर्ट प्रकाशित किया गया जिसके अनुसार, कोविड-19 संक्रमण से पीड़ित व्यक्ति के शरीर में कोरोना वायरस के कुछ अंश इलाज से ठीक होने के बाद भी रह जाते हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक वायरस का अंश 83 दिनों यानि लगभग 3 महीने तक शरीर में रहता है। जिससे, कोविड
अब तक जो भी स्टडीज़ और रिसर्च हुए हैं उनमें कहा गया है कि, कोविड-19 संक्रमण होने पर पीड़ित व्यक्ति में इंफेक्शन के लक्षण 9 दिनों तक दिखायी पड़ते रहते हैं। लेकिन हाल ही में छपे एक रिसर्च में कहा गया है कि, कोरोना वायरस शरीर में 83 दिनों तक रह सकता है। यह रिसर्च इटली और ब्रिटने के वैज्ञानिकों ने किया है। इस रिसर्च के लिए, सार्स-कोवि-2 ( कोरोना वायरस महामारी का कारण) से जुड़े कुल 79 रिसर्च पेपर्स का अध्ययन किया गया।
रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि, कोविड-19 की वजह से भर्ती होने वाले जिन मरीज़ों में कोरोना वायरस का असर कम होता है उनमें कोरोना वायरस की सक्रियता कम समय के लिए होती है। जिनका संक्रमण गम्भीर नहीं उनके शरीर से वायरस जल्दी निकल जाता है। (Coronavirus RNA)
लेकिन, 'द लांसेट माइक्रोब' (The Lancet Microbe) में छपी रिपोर्ट के अनुसार, कोविड-19 से इंफेक्टेड व्यक्ति को शुरुआत के 5 दिनों में संक्रमण फैलने और गम्भीर होने के लिहाज से अहम होते हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस समय पर इंफेक्टेड व्यक्ति को क्वारंटाइन कर लेना चाहिए। इसी तरह संक्रमण से ठीक होने के बाद भी अपनी तबियत का ख्याल रखना चाहिए। ताकि, संक्रमण को फैलने और रिंइंफेक्शन की संभावना को कम करने में मदद हो।