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Written By: Jitendra Gupta | Published : April 30, 2021 1:46 PM IST
कोरोना से रिकवर पेशेंट के लिए नई मुसीबत बनी ये बीमारी, इंफेक्शन से ठीक होने के बाद तुरंत हो रहे इस बीमारी का शिकार
भारत सहित दुनियाभर के देश कोरोना का प्रकोप झेल रहे हैं। साल की शुरुआत में लगा था कि कोरोना जल्द ही खत्म होने वाला है लेकिन म्यूटेशन के बाद इसके और भी घातर वेरिएंट सामने आने लगे हैं, जिसके कारण कुछ देश में सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (Public health emergency) तक की घोषणा की चुकी है। हालांकि इन सबके बीच कुछ लोगों को विशेष रूप से सावधानी बरतने की जरूरत है क्योंकि कोरोना अब उन लोगों को अपना शिकार बना रहा है, जो पहले से ही दूसरी बीमारियों से सूझ रहे हैं। एक्सपर्ट्स की मानें तो अब कोरोना के खतरे की सूची में डायबिटी रोगी पहले स्थान पर हैं।
एक स्टडी में ये खुलासा हुआ है कि कोरोना से ठीक हो चुके लोगों में डायबिटीज के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। किंग्स कॉलेज लंदन (King college of london) के एमडी प्रोफेसर फ्रांसेस्को रुबिनो ने डायबिटीज और कोरोना के बीच संबंध के बारे में बताया है। उनका कहना है कि वे लोग, जो गंभीर रूप से कोरोना से पीड़ित थे लेकिन बाद में ठीक हो गए उनमें डायबिटीज के लक्षण देखने को मिल रहे हैं।
शोधकर्ताओं ने इस स्टडी के लिए चीन के हुबेई प्रांत से कोरोना के 7337 मरीजों से प्राप्त डेटा का विश्लेषण किया। इसमें शोधकर्ताओं ने पाया कि 952 मरीज पहले से ही टाइप 2 डायबिटीज के शिकार थे। शोध में ये भी सामने आया कि टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित कोरोना मरीजों को दूसरे मरीजों की तुलना में ज्यादा मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूरत पड़ी और उनकी जान जानें का खतरा भी ज्यादा है।
अमेरिका की मैरीलैंड यूनिवर्सिटी अस्पताल में संक्रामक रोग विभाग के प्रमुख डॉ फहीम यूनुस (Dr. Faheem Younus) ने भी कोरोना और डायबिटीज के बीच संबंध का जिक्र करते हए एक ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने बताया कि अगर ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल रखा जाए तो कोरोना से होनी वाले मौत के खतरे को 10 गुना तक कम किया जा सकता है।
अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन (American Diabetes Association) के मुताबिक, आमतौर पर शुगर की समस्या से पीड़ित मरीज को फ्लू जैसे वायरल संक्रमण से लड़ने में काफी परेशानी होती है। इसके अलावा उसे और भी कई तरह समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है। इसलिए डायबिटीज रोगियों के लिए कोविड-19 जानलेना साबित हो सकता है। एक्सपर्ट की मानें तो डायबिटिक को सबसे अधिक खतरा तब होता है जब वह किसी इन्फ्लूएंजा (फ्लू) या फिर निमोनिया या फिर COVID-19 का शिकार हो जाते हैं।
इसके अलावा ब्लड शुगर लेवल में उतार-चढ़ाव हमारी इम्यूनिटी को कमजोर करने का काम करता है, जिसके कारण हम जल्दी बीमार पड़ने लगते हैं। यही कारण है कि ग्लूकोज लेवल में कमी के चलते कोविड संक्रमित मरीजों को मरने का खतरा अधिक हो जाता है। इसलिए अगर आपको कोरोना हुआ है तो ऑक्सीजन लेवल के साथ-साथ अपने ग्लूकोज लेवल का भी ध्यान रखिए।