कोरोना होने से नहीं बचा सकती 'सेफ' मानी जा रही है ये 1 चीज, जानें क्यों एक्सपर्ट बता रहे इसे अनसेफ

आपने पहले कई बार सुना होगा कि एंटी-बॉडी ट्रीटमेंट कोरोना से रक्षा कर सकता है लेकिन एक हालिया अध्ययन में इस अनसेफ बताया गया है। जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट।

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Written By: Jitendra Gupta | Published : February 20, 2021 10:29 AM IST

जब से कोरोना वायरस दुनिया में फैला है तब से ही एंटी-बॉडी ट्रेंड में है। एंटी-बॉडी का काम न सिर्फ इंफेक्शन का उपचार करना है बल्कि भविष्य नें उसे होने से रोकना भी है। एक बार जब आपका शरीर रोगाणुओं के खिलाफ एंटी-बॉडी का निर्माण कर लेता है तो रोगाणुओं के लिए इंफेक्शन पैदा करना शरीर में मुश्किल हो जाता है। ऐसा कुछ वक्त के लिए होता है लेकिन ये इस बात पर निर्भर करता है कि एंटी-बॉडी कितने वक्त तक रहती है। मौजूदा वक्त में कोरोना के खिलाफ भी एंटी-बॉडी ट्रीटमेंट को काफी लाभकारी माना जा रहा था लेकि अब एक हालिया अध्ययन में ये बताया गया है कि ये ट्रीटमेंट कोरोना को नहीं रोक सकता है। आइए जानते हैं इसके पीछे का कारण।

क्या कहता है अध्ययन

पेन्सिलवेनिया यूनिवर्सिटी के पेरेलमैन स्कूल ऑफ मेडिसिन द्वारा किए गए इस अध्ययन में ये जानकारी दी गई है। यह जानकारी जर्नल सेल में फरवरी के शुरुआती दिनों में प्रकाशित हुई थी। इस अध्ययन में कोरोनावायरस की शुरुआत से पहले सैकड़ों लोगों के ब्लड सैंपल लिए गए थे ताकि ये पता लगाया जा सके कि मौसमी कोरोनवायरस के खिलाफ एंटीबॉडी कारगर है या नहीं।

अध्ययन में सामने आए चौंकाने वाले खुलासे

अध्ययन में यह पाया गया कि जिन लोगों का ब्लड सैंपल लिया गया था उनमें से लगभग 20 प्रतिशत लोगों में मौसमी कोरोनावायरस के खिलाफ एंटीबॉडी थीं। शोधकर्ताओं ने बताया कि ये एंटीबॉडी सर्दी पैदा करने वाले वायरस और कोरोनवायरस के कुछ विशेष प्रकार के खिलाफ प्रभावी थी।

अध्ययन के मुताबिक, इन एंटीबॉडी के उन लोगों पर बेहतर परिणाम प्राप्त नहीं हुए, जिन्हें बाद में कोरोना संक्रमण हुआ था। इसके अलावा शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि ये कॉमन कोल्ड एंटीबॉडी छोटे बच्चों को गंभीर कोरोना संक्रमण से नहीं बचा सकती है, जैसा कि पहले कई अध्ययनों में दावा किया जा रहा था। छोटे बच्चे कितनी आसानी से संक्रमित हो सकते हैं और कितनी आसानी से संक्रमण को फैला सकते हैं यह अभी भी एक बहस का विषय बना हुआ है।

बच्चों और व्यस्कों पर समान प्रभाव

शोधकर्ताओं ने ये भी पाया कि बच्चों और वयस्कों दोनों में मौसमी कोरोनावायरस के खिलाफ बनने वाली एंटीबॉडी का स्तर एक समान था, जिसे CoV भी कहा जाता है। इसका मतलब ये है कि CoV एंटीबॉडी बच्चों को गंभीर रूप से होने वाले कोरोना से नहीं बचा सकती है, खासकर जिनमें कोरोना के कम या फिर कोई लक्षण नहीं दिखाई देते हैं।

क्या कहते हैं शोधकर्ता

पेन्सिलवेनिया यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ मेडिसिन के माइक्रोबायोलॉजी के एसोसिएट प्रोफेसर और अध्ययनकर्ता स्कॉट हेंसले ने कहा, "अध्ययन में हमने पाया कि बहुत से लोगों के शरीर में एंटीबॉडी थी, जो कोरोना को महामारी बनने से पहले ही रोक सकती थीं, लेकिन ये एंटीबॉडी संक्रमण को फैलने से रोक नहीं सकती थीं।"

हेन्सले ने ये भी कहा कि, हालांकि आम सर्दी के संक्रमणों से बनने वाली एंटीबॉडी COVID-19 संक्रमण को नहीं रोक सकती हैं। हालांकि ये संभव है कि पहले से मौजूद मेमोरी बी कोशिकाएं और टी कोशिकाएं कुछ स्तर की सुरक्षा जरूर प्रदान कर सकती है या फिर कम से कम कोरोना संक्रमण की गंभीरता को कुछ हद तक कम कर सकती है।

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