दिसबंर 2020 में भारत में आ सकता है कोरोना का नया पीक, AIIMS डायरेक्टर ने कहा वैक्सीन आ जाने के बाद हालात होगें सामान्य

एम्स के निदेशक डॉ.रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि,  वैक्सीन आने के बाद सर्दियों के मौसम के बाद  स्थिति काबू में रहेगी। समाचार एजेंसी आईएएनएस (IANS) को दिए एक इंटरव्यू में एम्स डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया ने देश में कोरोना वायरस की मौजूदा स्थिति और कोविड-19 वैक्सीन से जुड़े कई महत्वपूर्ण खुलासे किए। (Coronavirus in Winters)

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : November 12, 2020 1:18 AM IST

Covid-19 in Winters:  कोरोना महामारी के बारे में आशंका जतायी जा रही है कि सर्दियों का मौसम (Covid-19 Infection in Winters) शुरु होते ही यह संक्रमण गम्भीर रूप ले लेगा।  वहीं, कोरोना वैक्सीन (Covid-19 Vaccine) आने में भी अभी काफी समय है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, अगले वर्ष यानि 2021 के फरवरी या मार्च महीने तक कोरोना वैक्सीन आ सकती है। लेकिन, इस बीच एम्स (AIIMS) के निदेशक डॉ.रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि,  वैक्सीन आने के बाद और सर्दियों का मौसम बीतने के बाद स्थिति काबू में  आ जाएगी। समाचार एजेंसी आईएएनएस (IANS) को दिए एक इंटरव्यू में एम्स डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया ने देश में कोरोना वायरस की मौजूदा स्थिति और कोविड-19 वैक्सीन से जुड़े कई महत्वपूर्ण खुलासे किए। (Coronavirus in Winters)

क्या दिसंबर तक भारत में गुज़र जाएगा कोरोना का पीक?

डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि,  अगले 3 महीने देश में सर्दियों का मौसाम होगा और यह समय कोविड-19 संक्रमण को रोकने के लिहाज से काफी चुनौतीपूर्ण रहेगा। एक बार जब हम इसे पार कर लेंगे तो हमारे पास 2 चीजें होंगी। एक तो हमारे पास बड़ी संख्या में ऐसे लोग होंगे, जो ठीक हो चुके होंगे और उनसे संक्रमण फैलने की संभावना कम हो जाएगी। इसलिए, देश में कोरोना वायरस के मामलों की तादाद में कमी आने लगेगी। दूसरी बात यह है कि हमारे पास कोविड-19 की एक वैक्सीन भी उपलब्ध हो सकती है।  इसलिए हम उम्मीद जता सकते हैं कि,   अगले साल की शुरूआत में देश में स्थिति कुछ हद तक सामान्य हो सकती है।

दिसबंर 2020 में क्या होगा भारत में कोविड-19 का आंकड़ा?

रणदीप गुलेरिया से जब पूछा गया कि , क्या देश में कोरोना वायरस के चौथे पीक के बाद, मामलों में गिरावट आनी शुरू हो जाएगी और मामलों में कोई असाधारण वृद्धि नहीं होगी? तो इसके जवाब में गुलेरिया ने कहा कि, भारत के संदर्भ में कई पहलुओं पर गौर करने की ज़रूरत है। क्योंकि भारत में अलग-अलग क्षेत्रों ने कोरोना संक्रमण ने अलग-अलग तरीके व्यवहार किया है।  जैसे-जैसे महामारी गम्भीर हुई है, वैसे-वैसे देश में कोविड-19 के मामलों में वृद्धि भी अलग-अलग समय पर हुई है।

शुरुआत में जब विदेश से लोगों को भारत लाए जाने की मुहिम शुरु हुई तो,  हमारे देश के बड़े शहरों में एक बड़ा पीक देखने को मिला था। अब एक बार फिर से  मुंबई और दिल्ली में पीक दिखाई दिया और फिर मामले कम हुए। जैसा कि, हम एक पीक को पार कर चुके हैं और कोविड-19 के मामलों की संख्या भी कम हो रही है। अब इस स्थिति को यूं ही बनाए रखना एक  बड़ी चुनौती है। डॉ. गुलेरिया ने यह भी कहा कि, हमें  यूरोप को उदाहरण के तौर पर लेना चाहिए। जहां,  मामलों में में कमी आने के बाद एक बार फिर से वहां पीक देखने में मिल रहा है।

कोरोना संक्रमण रोकने के लिए क्या है भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती?

एम्स डायरेक्टर के अनुसार, भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हम कोविड-19 को लेकर उचित व्यवहार कैसे बनाए रखें, ताकि हमें एक और पीक  का सामना ना करना पड़े। वियतनाम, ताइवान और कंबोडिया जैसे देशों को देखें, जहां मामलों की संख्या नहीं बढ़ी है। जबकि, उनके पास अपना पीक था, मगर वे मामलों की संख्या में गिरावट को बनाए रखने में सक्षम रहे। भारत में दिल्ली जैसे कुछ शहर हैं, जहां ऐसे मामलों की संख्या में वृद्धि हुई है, जो सीधे भीड़ से जुड़े हैं। इसके पीछे कोविड-19 के लिए उपयुक्त व्यवहार की कमी और निश्चित रूप से वायु प्रदूषण और तापमान में गिरावट जैसे अन्य कारक भी हैं।

उन्होंने आगे कहा, "लेकिन, मुझे लगता है कि हमारे लिए यह समझना बहुत महत्वपूर्ण है कि यदि हम मामलों को कम रखना चाहते हैं और कहते हैं कि हमने शिखर को पार कर लिया है, तो हमें अनुशासित रहते हुए अच्छा आक्रामक व्यवहार अपनाना होगा।"

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