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Written By: Atul Modi | Published : June 13, 2021 1:06 PM IST
लैंसेट इंडिया टास्क फोर्स ने बाल रोग विशेषज्ञों के लिए एक नई गाइडलाइन जारी की है!
लैंसेट एक्सपर्ट ग्रुप की टीम में भारत के टॉप प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों के कुछ डॉक्टर्स जिसमें 3 बाल रोग विशेषज्ञ भी शामिल हैं, जो दिल्ली अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में काम करते हैं। इसमें बच्चों के लिए प्रोटोकॉल पर विशेष ध्यान दिया गया है। लैंसेट एक्सपर्ट की यह टीम अगर बच्चों में कोविड फैलता है तो उससे निपटने के लिए नियुक्त की गई है। इसके एक्सपर्ट्स ने यूके के कुछ एक्सपर्ट्स के साथ मीटिंग भी की है।
एम्स के एक बाल विशेषज्ञ का कहना है कि बच्चों में दो प्रकार की बीमारी होती है, पहली एक्यूट कोविड इंफेक्शन और दूसरी मल्टी ऑर्गन इन्फ्लेमेटरी सिंड्रोम। डॉक्टरों ने एक्यूट कोविड इंफेक्शन से जूझ रहे बच्चों को एग्जामिन करते हुए एक एल्गोरिथम तैयार किया है और ऐसे बच्चों को बाल विशेष वार्ड में भर्ती किया जायेगा।
एक परामर्श यह भी जारी की गई है कि मां बाप को बच्चों से दूर रहने की बजाए उनके साथ ही रहना होगा। और डॉक्टरों ने जो एल्गोरिथम प्रदान किया है उससे डॉक्टर और नर्स को बहुत सहायता मिलेगी कि ऐसे बच्चों की केयर किस प्रकार करनी है और उनका उपचार किस ढंग से किया जाना है। एडवाइजरी में मल्टी ऑर्गन इन्फ्लेमेटरी सिंड्रोम से जूझ रहे बच्चों के लिए एक अलग सेक्शन बनाया गया है।
ऐसे बच्चों को बाल विशेषज्ञ वार्ड का मुख्य वार्ड दिया जाना चाहिए। इस केस में अस्पतालों को बेड की संख्या बढ़ा देनी चाहिए और इसके साथ ही गैर जरूरी दवाइयों का बच्चों पर प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक ऐसा कुछ नहीं है कि तीसरी लहर बच्चों के लिए कोई और अधिक खतरनाक बीमारी ले आएगी। वायरस के नेचर को देखते हुए कह सकते हैं कि तीसरी लहर आ सकती है और इसके लिए हमें पहले ही तैयार हो जाना चाहिए। तीसरी लहर बच्चों को अधिक प्रभावित करेगी इसका अंदाजा तीन तरह से लगाया जा सकता है। पहला तो यह की 18 साल से कम उम्र के बच्चों का अगर इम्यूनाइजेशन किया भी जाता है तो यह संदेह रहता है कि यह उन पर काम करेगा या नहीं।
दूसरा यह कि पहली और दूसरी लहर में कोविड झेल चुके लोग इस बार सुरक्षित रहेंगे तो केवल बच्चे ही बचेंगे। और तीसरा इसलिए कि केवल बड़ों का ही वैक्सिनेशन हो रहा है। हालांकि यह तीन केवल अनुमान हैं और इनसे पक्का नहीं कहा जा सकता है कि तीसरी लहर आएगी या नहीं। बच्चों को मुख्य रूप से गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल लक्षण दिख रहे हैं और जिन बच्चों को कोई लक्षण नहीं दिख रहे उनके लिए और अधिक रिसर्च की जरूरत है।
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