
... Read More
Written By: Anshumala | Published : June 26, 2020 5:22 PM IST
खांसी और बुखार कोरोना के दो मुख्य लक्षण : स्टडी।
Symptoms of Coronavirus: कोरोनावायरस से संबंधित लक्षणों के बारे में अब तक शोधकर्ताओं ने कई जानकारियां दी हैं। इसके मुख्य लक्षणों में बुखार, सूखी खांसी, गले में खराश, सांस लेने में तकलीफ आदि शामिल हैं। इसके अलावा सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, स्वाद व गंध महसूस ना कर पाना जैसे कई अन्य लक्षणों (Symptoms of Coronavirus) के बारे में भी एक्सपर्ट्स समय-समय पर खुलासा करते रहे हैं। लेकिन, अब एक नए शोध में यह बात सामने आई है कि कोरोनावायरस के दो प्रमुख लक्षण बुखार और खांसी हैं। शोधकर्ताओं ने कहा है कि ये दो ही ऐसे लक्षण (Cough & fever prevalent symptoms of COVID-19) हैं, जो अधिकतर मरीजों में पाए गए हैं।
शोधकर्ताओं ने इसके लिए अब तक कोरोना से संबंधित जितने भी लक्षण नजर आए हैं और उन लक्षणों से जितने भी अध्ययन हुए हैं, उन सभी का रिव्यू किया। अब तक डब्लूएचओ द्वारा जारी किए गए कोरोना के लक्षणों की सूची की भी समीक्षा शोधकर्ताओं ने की। बाद में सूंघने की क्षमता में कमी आना, थकान महसूस करना, सांस लेने में तकलीफ आदि कई लक्षणों को भी डब्लूएचओ ने अपनी लिस्ट में शामिल किया था।
यूके में लीड्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने यूके, चीन और अमेरिका सहित नौ देशों के 24,000 से अधिक कोरोना रोगियों द्वारा अनुभव किए गए सामान्य लक्षणों की पहचान करने के लिए 148 अलग-अलग अध्ययनों के आंकड़ों को मिलाकर लक्षणों से संबंधित समीक्षा की। शोधकर्ताओं ने कहा कि यह कोरोनावायरस के लक्षणों (Symptoms of Coronavirus in hindi) से संबंधित अब तक की सबसे बड़ी समीक्षा होगी।
शोधकर्ताओं का कहना है कि सभी मरीजों के लक्षणों का गहन अध्ययन करने के बाद पता चला है कि सभी कोविड-19 मरीजों में खांसी (cough) और बुखार (Fever) दो कॉमन लक्षण मुख्य (corona ke lakshan) रूप से पाए गए। शोधकर्ता के अनुसार, 24 हजार लोगों में लगभग 78 फीसदी लोगों में बुखार के लक्षण थे, तो वहीं 57 फीसदी कोरोना मरीजों में खांसी थी। अलग-अलग देशों से लिए गए डाटा के अनुसार, नीदरलैंड में लगभग 76 फीसदी कोरोना के मरीजों में खांसी के लक्षण देखे गए, तो दक्षिण कोरिया में सिर्फ 18 प्रतिशत लोगों में खांसी के लक्षण दिखे। 24 हाजर लोगों में से सिर्फ 31 प्रतिशत लोगों को थकान, तो वहीं 25 फीसदी में सूंघने की क्षमता खो चुकी थी। 23 प्रतिशत लोगों में सांस लेने की समस्या महसूस हुई। वहीं कुछ लोग ऐसे थे, जिन्हें वेंटिलेशन और कृत्रिम फेफड़ों की भी जरूरत पड़ी।