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लॉकडाउन से 78 हजार लोगों की जान बचाना हुआ मुमकिन, 29 लाख कोविड मामलों से बच सका भारत

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने सोमवार को बयान दिया कि कोरोना वायरस के सुरक्षा की दृष्टि से लगाए गए राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन से पूरे देश में लगभग 29 लाख कोरोनावायरस मामलों और करीब 78,000 संभावित मौतों को रोकने में सफलता मिली है।

लॉकडाउन से 78 हजार लोगों की जान बचाना हुआ मुमकिन, 29 लाख कोविड मामलों से बच सका भारत

Written by Sadhna Tiwari |Updated : September 15, 2020 9:18 AM IST

Coronavirus Spread: भारत में कोरोना वायरस महामारी की चपेट में आने वालों की तादाद 48 लाख के पार  (Coronavirus in India) चली गयी है। सोमवार को जारी आंकड़ों के आधार पर 79 हजार से अधिक लोगों की मृत्यु इस संक्रमण की वजह से हो गयी। इस वैश्विक संकट से निपटने के लिए देशव्यापी स्तर पर भारत में लॉकडाउन लगा दिया गया। (Coronavirus in India)

मार्च 2020 में राष्ट्रीय लॉकडाउन की घोषणा की गयी। हालांकि, आर्थिक कारणों और संक्रमण के नियंत्रण में आने की स्थिति के आधार पर देश के अलग-अलग हिस्सों में धीरे-धीरे लॉकडाउन में ढील दी गयी और अब लोग सोशल डिस्टेंसिंग (Social Distancing) का पालन करते हुए एक बार फिर अपनी ज़रूरत के आधार पर घर से बाहर निकल रहे हैं। लेकिन, भले ही आर्थिक नुकसान की वजह से लोगों को लॉकडाउन में परेशानी उठानी पड़ी पर स्वास्थ्य मंत्रालय की मानें तो लॉकडाउन के माध्यम से देश में कई हजार लोगों की जानें बचाने में कामयाबी मिली है। (Covid-19 Management in India)

लॉकडाउन से 29 लाख कोविड मामलों को रोका जा सका:

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने सोमवार को बयान दिया कि कोरोना वायरस के सुरक्षा की दृष्टि से लगाए गए राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन से पूरे देश में लगभग 29 लाख कोरोनावायरस मामलों और करीब 78,000 संभावित मौतों को रोकने में सफलता मिली है।

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लोकसभा में बोलते हुए हर्षवर्धन ने आगे कहा कि, "राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन केंद्र सरकार द्वारा उठाया गया एक साहसिक फैसला था और इससे यह बात भी साबित होती है कि भारत एक समुदाय के तौर पर कोविड-19 का प्रबंधन करने के लिए तैनात था। स्वास्थ्य मंत्री ने आंकड़ों के आधार पर जानकारी दी कि ऐसा अनुमान है कि लॉकडाउन की वजह से भारत में 14-29 लाख कोरोना के नये मामलों और 37,000 से 78,000 लोगों की मृत्यु को टाला जा सका है।"

कोविड-19 प्रबंधन में आत्मनिर्भर बन रहा है भारत:

कोरोना वायरस को रोकने के लिए आवश्यक मेडिकल सुविधाओं के बारे में बात करते हुए डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि लॉकडाउन के 4 महीनों का उपयोग अतिरिक्त स्वास्थ्य ढांचा तैयार करने, मानव संसाधन को मजबूत करने के अलावा देश में पीपीई किट, मास्क और वेंटिलेटर जैसी महत्वपूर्ण मेडिकल आवश्यकताओं के उत्पादन करने के लिए किया गया। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि भारत मेडिकल सेवाओं और सामानों की उपलब्धता के लिहाज से अब आत्मनिर्भर है।साथ ही स्वास्थ्य मंत्री ने देश में कोरोना की मौजूदा स्थिति पर कुछ और महत्वपूर्ण जानकारियां दीं जैसे,

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  • भारत में 92 प्रतिशत कोरोनावायरस के मामलों में हल्के लक्षण दिखाई दिए।
  • वहीं ऑक्सीजन का प्रयोग सिर्फ 5.8 प्रतिशत मामलों में किया गया। (Coronavirus Cases in India)
  •  1.7 प्रतिशत मामलों को आईसीयू या क्रिटिकल मेडिकल हेल्प के अंतर्गत रखा गया।
  • देश के 13 राज्यों में कोरोना वायरस के मामले अधिक पाए गए। हर्षवर्धन के मुताबिक, "मुख्य रूप से महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, बिहार, तेलंगाना, ओडिशा, असम, केरल और गुजरात से कोरोना वायरस के सबसे अधिक मामले और कोविड-19 की वजह से होनेवाली मौतें दर्ज की गयी हैं।"