Corona vaccine: भारत सहित 6 देश जो कोरोना वैक्सीन के क्लिनकिल ट्रायल में हैं आगे, जल्द ही दुनिया को मिल जाएगी कोरोना की वैक्सीन

कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए देश-दुनिया के तमाम शोधकर्ता कोरोना की वैक्सीन और दवा बनाने में जुटे हुए हैं। आइए जानते हैं, उन 6 देशों के बारे में जिनके वैक्सीन के क्लिनिकल और ह्यूमन ट्रायल के रिजल्ट पॉजिटिव आए हैं ...  

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Written By: Anshumala | Updated : June 19, 2020 6:11 PM IST

Corona vaccine updates : कोरोनावायरस का खतरा भारत (Coronavirus in india) में लगातार तेजी से बढ़ता ही जा रहा है। हालांकि, कुछ देश काफी हद तक सामान्य स्थिति में वापस आना शुरू कर चुके हैं, लेकिन भारत में कोरोना संक्रमण से कोई राहत मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। भारत अब विश्व में चौथा सबसे बुरी तरह से प्रभावित देशों की लिस्ट में शामिल हो चुका है। देश-दुनिया के तमाम शोधकर्ता कोरोना महामारी से लड़ने के लिए एक प्रभावी उपचार और वैक्सीन तैयार करने के लिए चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं। आइए जानते हैं, उन 6 देशों के बारे में जिनके वैक्सीन के क्लिनिकल और ह्यूमन ट्रायल के रिजल्ट (corona vaccine update) पॉजिटिव आए हैं ...

सौ से भी अधिक वैक्सीन पर चल रहा है काम

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनियाभर में सौ से भी अधिक कोरोना वैक्सीन पर शोधकार्य चल रहे हैं। भारत भी इसमें पीछे नहीं है। इसके अलावा चीन, अमेरिका, इटली, ब्रिटेन, जर्मनी आदि देश भी कोरोना की वैक्सीन को तैयार करने में शोधकर्ता लगे हुए हैं। खबर यह भी है कि नीदरलैंड और इजरायल के वैज्ञानिक एक ऐसे एंटीबॉडी को बनाने में सफल हुए हैं, कोरोना वायरस से लड़ सकता है।

1 पतंजलि ने कोरोना को मात देने के लिए ढूंढा इलाज

बाबा रामदेव के पतंजलि आयुर्वेद ने कहा है कि हमारे शोधकर्ताओं ने एक ऐसा इलाज ढूंढ निकाला है, जो कोरोनावायरस पर सफलतापूर्वक असर करेगा। समूह के सीईओ आचार्य बालकृष्ण ने यह भी कहा कि दवा टेस्टिंग फेज के दौरान ही 5 से 14 दिनों के अंदर कोरोना से संक्रमित (COVID-19) रोगियों को पूरी तरह से ठीक करने में सक्षम हुई है।

हो रहा है आयुर्वेदिक क्लिनिकल ट्रायल

एक एजेंसी को दिए गए बयान में उन्होंने कहा, "हमने कोविड-19 के प्रकोप के बाद वैज्ञानिकों की एक टीम नियुक्त की। सबसे पहले, सिम्युलेशन किया गया और यौगिकों (Compounds) की पहचान की गई, जो वायरस से लड़ सकते हैं और शरीर में इसके प्रसार को रोक सकते हैं। फिर हमने सैकड़ों कोरोना पॉजिटिव रोगियों पर क्लिनिकल केस का अध्ययन किया, जिसमें हमें सौ प्रतिशत पॉजिटिव परिणाम मिले हैं। हम सिर्फ प्रतिरक्षा बूस्टर की बात नहीं कर रहे हैं, हम कोरोना से बचाव के लिए एक संपूर्ण इलाज की बात कर रहे हैं।" उन्होंने यह भी दावा किया है कि रोगियों के लगातार टेस्ट करने के बाद सभी के रिजल्ट नेगेटिव आए हैं।

कंपनी को हाल ही में ड्रग रेग्युलेटरी बोर्ड द्वारा क्लिनिकल ट्रायल के लिए अनुमति मिल चुकी है। यदि निष्कर्ष वास्तव में पॉजिटिव (corona vaccine update news) और सही हैं, तो यह पहला कोरोना का वैकल्पिक उपचार (alternate treatment) होगा, जो विश्व स्तर पर कोरोनावायरस के प्रसार को सफलतापूर्वक रोकने में कामयाब होगा।

2 कोरोवैक 90% मामलों में प्रभावी, पॉजिटिव परिणाम आए सामने

बीजिंग (चीन) की कंपनी सिनोवैक बायोटेक लिमिटेड कोरोना के लिए वैक्सीन (corona vaccine update) तैयार कर रहा है, जिसे उन्होंने नाम दिया है कोरोवैक (CoroVac Vaccine)। कंपनी ने दावा किया है कि इस वैक्सीन ने क्लिनिकल ट्रायल के दौरान लगभग 90 प्रतिशत लोगों पर काफी हद तक सकारात्मक परिणाम दिखाए हैं। इस वैक्सीन के पहले और दूसरे चरण के क्लिनिकल टेस्ट के शुरुआती परिणाम पॉजिटिव आए हैं। कंपनी का कहना है कि यदि परिणाम आगे भी पॉजिटिव आए, तो बहुत जल्द दुनिया को कोरोना की वैक्सीन मिल जाएगी।

3 जॉनसन एंड जॉनसन ह्यूमन ट्रायल में आगे

अमेरिकी फर्म जॉनसन एंड जॉनसन भी पहले से ही Ad26.COV2-S वैक्सीन के ह्यूमन क्लिनिकल ट्रायल पर काम कर रहा था, जिसे सितंबर के महीने में आयोजित किया जाना था। प्री-क्लिनिकल ट्रायल और अध्ययनों ने आशाजनक परिणाम देखने के बाद, अब ये ट्रायल जुलाई में ही आयोजित किए जाएंगे। रिपोर्टों के अनुसार, परीक्षणों के पहले चरण में अमेरिका और बेल्जियम के बाहर 18 से 55 वर्ष की आयु के 1035 स्वस्थ प्रतिभागी शामिल होंगे। कंपनी ने नियत समय से पहले बड़े पैमाने पर मानव परीक्षण (Human Trial) शुरू करने के लिए नियामक बोर्डों से अनुमति भी मांगी है।

4 एली लिली और एंटीबॉडी ट्रीटमेंट

अमेरिकी दवा की दिग्गज कंपनी एली लिली ने नोवेल कोरोनवायरस के प्रसारका मुकाबला करने के लिए एक संभावित एंटीबॉडी तैयार कर लिया है। इस दवा की खुराक कुछ स्वयंसेवकों को दी भी जा रही है। LY-CoV555 नाम की एंटीबॉडी को एली लिली (Eli Lilly) एब्सेलरा (AbCellera) के सहयोग से विकसित कर रही है। LY-CoV555 का सिंगल डोज उन्हें दिया गया है, जिनका कोरोना का इलाज हॉस्पिटल में चल रहा है। इसका परिणाम जून के अंत तक आने की उम्मीद है। एली लिली के वैज्ञानिकों द्वारा इस एंटीबॉडी के उपचार को सिर्फ तीन महीने के अंतराल में विकसित कर लिया गया था, जो अमेरिका के पहले कोविड-19 मरीज के ब्लड सैंपल को खरीदने के बाद मिला था।

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5 मॉडर्ना करेगा mRNA-1273 वैक्सीन का जुलाई में तीसरा ट्रायल

अमेरिका भी वैक्सीन बनाने की रेस में लगा हुआ है और इसे कामयाबी भी मिलती दिख रही है। अमेरिका की बायोटेक कंपनी मॉडर्ना इंक ने भी क्लिनिकल ट्रायल का स्टेज पार कर लिया है। फिलहाल यह कंपनी वैक्सीन mRNA-1273 का स्टेज-3 का ट्रायल जुलाई में करेगी। प्रारंभिक अध्ययन से पता चला है कि इस वैक्सीन का एक डोज इंफेक्शन को रोकने का काम करेगा साथ ही सेहत पर भी इसका कोई साइड एफेक्ट नहीं होगा। फिलहाल वैक्सीन टेस्टिंग के सेकंड फेज में है। स्टेज- 3 के क्लिनिकल ट्रायल में संभवत: 18-55 वर्ष के करीब 30 हजार ऐसे प्रतिभागियों के शामिल होने की उम्मीद है, जिनमें कोरोना होने का खतरा सबसे ज्यादा है। यदि इसके परिणाम पॉजिटिव आए, तो कंपनी साल के अंत तक इस वैक्सीन के 100 मिलियन डोज का निर्माण करेगी।

6 जर्मनी भी ला रहा है BNT162 वैक्सीन

जर्मनी की एक कंपनी बायोएनटेक, अमेरिकी कंपनी फाइजर के साथ मिलकर BNT162 वैक्सीन के निर्माण (corona vaccine update in hindi) पर काम कर रही है। बताया जा रहा है कि  BNT162 वैक्सीन में जेनेटिक मैटीरियल मेसेंजर आरएनए का इस्तेमाल किया जा रहा है। फिलहाल, ये वैक्सीन क्लिनिकल ट्रायल में है। इसका असर और परिणाम देखने के लिए 12 वॉलेंटियर को शामिल किया गया है। आगे के स्टेज के क्लिनिकल ट्रायल में 18 से 55 वर्ष की आयु के लगभग 200 लोगों को शामिल किया जाएगा और इन्हें BNT162 वैक्सीन के अधिक डोज दिए जाएंगे।

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