स्पुतनिक-वी वैक्सीन कोरोना वायरस के खिलाफ 92 प्रतिशत प्रभावी, रूस ने किया दावा

रूस के नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी और रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष (आरडीआईएफ) ने यह घोषणा करते हुए बताया कि कोविड-19 इंफेक्शन से सुरक्षा के लिए, रजिस्टर की गयी दुनिया की पहली वैक्सीन स्पुतनिक-वी (Sputnik V. ) ने एक रिसर्च में काफी असरदार पाया गया है। (Sputnik V.  Vaccine effectiveness)

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : November 11, 2020 10:31 PM IST

Sputnik V. : कोरोनावायरस की वैक्सीन्स का  क्लिनिकल टेस्ट अब अंतिम दौर में है। सभी देशों के साइंटिस्ट अपनी स्वदेशी वैक्सीन से जुड़े अलग-अलग तरह के दावे कर रहे हैं। इसी बीच रूस ने बयान दिया है कि अंतरिम परीक्षण परिणामों के अनुसार, कोरोना से लोगों की रक्षा करने में उसकी स्पुतनिक-वी (Sputnik V.) वैक्सीन 92 फीसदी कारगर रही है। बुधवार को रूस के नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी और रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष (आरडीआईएफ) ने यह घोषणा करते हुए बताया कि कोविड-19 इंफेक्शन से सुरक्षा के लिए, रजिस्टर की गयी दुनिया की पहली वैक्सीन स्पुतनिक-वी (Sputnik V. ) ने एक रिसर्च में काफी असरदार पाया गया है। (Sputnik V.  Vaccine effectiveness)

स्पुतनिक-वी वैक्सीन कोरोना वायरस के खिलाफ 92 प्रतिशत प्रभावी:

फिलहाल स्पुतनिक वी (Sputnik V. Vaccine) के तीसरे चरण (फेज-3) के क्लिनिकल टेस्टिंग को मंजूरी दे दी गयी है। यह टेस्टिंग बेलारूस, यूएई, वेनेजुएला और अन्य देशों के साथ-साथ भारत में भी स्पुतनिक वी. के क्लिनिकल ट्रायल्स (Sputnik V. Clinical Trials) दूसरे और तीसरे फेज़ में चल रहे हैं। बुजुर्ग लोगों के लिए वैक्सीन की सेफ्टी और इसके प्रभावों को लेकर एक अलग विस्तृत अध्ययन भी किया जा रहा है। यह पुष्टि रूस में सबसे बड़े डबल-ब्लाइंड, रैंडमाइज्ड, प्लेसबो-नियंत्रित फेज-3 क्लिनिकल परीक्षणों में से 40,000 स्वयंसेवकों के पहले अंतरिम आंकड़ों पर आधारित है। कुल 16 हजार स्वयंसेवकों (वॉलंटिअर्स) पर किए गए ट्रायल में वैक्सीन की डोज दी गई थी, जिसके आधार पर यह मूल्यांकन किया गया।

ट्रायल्स में दिखे साइड-इफेक्ट्स के हल्के लक्षण:

इस ट्रायल में कोरोना वायरस के 20 कंफर्म मामलों के सांख्यिकीय विश्लेषण के परिणामस्वरूप,  वैक्सीन लगाए  गए लोगों और प्लेसबो रिसीव करने वालों के बीच का मामला अलग-अलग इंगित करता है कि स्पुतनिक वी  वैक्सीन (Covid-19 Vaccine) की दूसरी खुराक  के बाद प्रभाव दर 92 फीसदी तक रही।

गौरतलब है कि, सितंबर में पहली बार वैक्सीन को रूसी अस्पतालों के रेड जोन के स्वयंसेवकों के एक समूह को दिया गया था। इसमें शामिल 10,000 लोगों के टीकाकरण के बाद भी इसकी प्रभावकारिता दर 90 प्रतिशत से अधिक होने की पुष्टि हुई है। प्राप्त आंकड़ों को गामालेया सेंटर के शोधकर्ताओं की ओर से दुनिया के प्रमुख पीयर रिव्यूड मेडिकल एकेडमिक जर्नलों में से एक में प्रकाशित किया जाएगा, जिसमें प्रमुख महामारी विज्ञान विशेषज्ञों द्वारा डेटा का स्वतंत्र मूल्यांकन किया जाएगा।

  • रूस के 29 चिकित्सा केंद्रों में चल रहे क्लीनिकल परीक्षणों के हिस्से के रूप में 11 नवंबर तक 20,000 से अधिक स्वयंसेवकों को वैक्सीन की पहली खुराक और 16,000 से अधिक स्वयंसेवकों को पहली और दूसरी खुराक दी गई है।
  • साथ ही रिसर्च के दौरान , 11 नवंबर तक किसी भी अप्रत्याशित प्रतिकूल घटनाएं सामने नहीं आयीं। इसे, एक अच्छा संकेत माना जा रहा है। वैक्सीन लेने वाले वॉलिंटियर्स में से कुछ लोगों को मामूली शिकायतें हुईं। इन लोगों को इंजेक्शन लेने वाली जगह पर दर्द,  बुखार, कमजोरी, थकान और सिरदर्द जैसी समस्याएं महसूस हुईं जो फ्लू जैसे सिंड्रोम में देखने को मिलते हैं।
  • क्लीनिकल टेस्टिंग के दौरान वैक्सीन की सुरक्षा की लगातार निगरानी की जा रही है। जानकारी का विश्लेषण स्वतंत्र निगरानी समिति द्वारा किया जाता है, जिसमें प्रमुख रूसी वैज्ञानिक शामिल होते हैं।
  • इन वॉलिटिंयर्स पर अगले 6 महीनों तक ध्यान दिया जाएगा। इस रिसर्च के दौरान अवलोकन के बाद अंतिम रिपोर्ट पेश की जाएगी। रजिस्टर प्रक्रिया को कारगर बनाने के लिए  वैक्सीन खरीदने की इच्छा रखने वाले देशों के राष्ट्रीय नियामकों को रूसी संस्था आरडीआईएफ द्वारा विशेष अनुसंधान डेटा भी उपलब्ध कराया जाएगा।
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