
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : November 11, 2020 10:31 PM IST
Covaxin: कोरोना वैक्सीन के तीसरे चरण का ट्रायल भोपाल में शुरू, एक शिक्षक को दिया गया पहला डोज
Sputnik V. : कोरोनावायरस की वैक्सीन्स का क्लिनिकल टेस्ट अब अंतिम दौर में है। सभी देशों के साइंटिस्ट अपनी स्वदेशी वैक्सीन से जुड़े अलग-अलग तरह के दावे कर रहे हैं। इसी बीच रूस ने बयान दिया है कि अंतरिम परीक्षण परिणामों के अनुसार, कोरोना से लोगों की रक्षा करने में उसकी स्पुतनिक-वी (Sputnik V.) वैक्सीन 92 फीसदी कारगर रही है। बुधवार को रूस के नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी और रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष (आरडीआईएफ) ने यह घोषणा करते हुए बताया कि कोविड-19 इंफेक्शन से सुरक्षा के लिए, रजिस्टर की गयी दुनिया की पहली वैक्सीन स्पुतनिक-वी (Sputnik V. ) ने एक रिसर्च में काफी असरदार पाया गया है। (Sputnik V. Vaccine effectiveness)
फिलहाल स्पुतनिक वी (Sputnik V. Vaccine) के तीसरे चरण (फेज-3) के क्लिनिकल टेस्टिंग को मंजूरी दे दी गयी है। यह टेस्टिंग बेलारूस, यूएई, वेनेजुएला और अन्य देशों के साथ-साथ भारत में भी स्पुतनिक वी. के क्लिनिकल ट्रायल्स (Sputnik V. Clinical Trials) दूसरे और तीसरे फेज़ में चल रहे हैं। बुजुर्ग लोगों के लिए वैक्सीन की सेफ्टी और इसके प्रभावों को लेकर एक अलग विस्तृत अध्ययन भी किया जा रहा है। यह पुष्टि रूस में सबसे बड़े डबल-ब्लाइंड, रैंडमाइज्ड, प्लेसबो-नियंत्रित फेज-3 क्लिनिकल परीक्षणों में से 40,000 स्वयंसेवकों के पहले अंतरिम आंकड़ों पर आधारित है। कुल 16 हजार स्वयंसेवकों (वॉलंटिअर्स) पर किए गए ट्रायल में वैक्सीन की डोज दी गई थी, जिसके आधार पर यह मूल्यांकन किया गया।
इस ट्रायल में कोरोना वायरस के 20 कंफर्म मामलों के सांख्यिकीय विश्लेषण के परिणामस्वरूप, वैक्सीन लगाए गए लोगों और प्लेसबो रिसीव करने वालों के बीच का मामला अलग-अलग इंगित करता है कि स्पुतनिक वी वैक्सीन (Covid-19 Vaccine) की दूसरी खुराक के बाद प्रभाव दर 92 फीसदी तक रही।
गौरतलब है कि, सितंबर में पहली बार वैक्सीन को रूसी अस्पतालों के रेड जोन के स्वयंसेवकों के एक समूह को दिया गया था। इसमें शामिल 10,000 लोगों के टीकाकरण के बाद भी इसकी प्रभावकारिता दर 90 प्रतिशत से अधिक होने की पुष्टि हुई है। प्राप्त आंकड़ों को गामालेया सेंटर के शोधकर्ताओं की ओर से दुनिया के प्रमुख पीयर रिव्यूड मेडिकल एकेडमिक जर्नलों में से एक में प्रकाशित किया जाएगा, जिसमें प्रमुख महामारी विज्ञान विशेषज्ञों द्वारा डेटा का स्वतंत्र मूल्यांकन किया जाएगा।