Covaxin के ह्यूमन ट्रायल्स अब होंगे उत्तर प्रदेश में, लखनऊ और गोरखपुर में होगा परीक्षण

भारत में भी कोविड-19 वैक्सीन्स के उम्मीदवारों को आम लोगों के लिए जल्द-से जल्द उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।  उत्तर प्रदेश में इसी के चलते में कोवैक्सीन (Covaxin) के ह्यूमन ट्रायल्स करने की अनुमति राज्य सरकार ने दे दी है। मिली जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ ने कोवैक्सीन के मानव परीक्षण  लखनऊ और गोरखपुर में किये जाने की इजाजत दे दी है।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : September 24, 2020 9:03 PM IST

Coronavirus Vaccine Trials:  कोरोना वायरस महामारी के इलाज के तौर पर वैक्सीन्स की खोज और उन्हें पूरी तरह सुरक्षित बनाने के प्रयास कई महीनों से दुनियाभर में चल रहे हैं। भारत में भी कोविड-19 वैक्सीन्स के उम्मीदवारों को आम लोगों के लिए जल्द-से जल्द उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।  उत्तर प्रदेश में इसी के चलते में कोवैक्सीन (Covaxin) के ह्यूमन ट्रायल्स करने की अनुमति राज्य सरकार ने दे दी है। मिली जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ ने कोवैक्सीन (Covaxin) के मानव परीक्षण  लखनऊ और गोरखपुर में किये जाने की इजाजत दे दी है। (Coronavirus Vaccine Trials)

अब उत्तर प्रदेश में होगें कोवैक्सीन के क्लिनिकल ट्रायल

बता दें कि हैदराबाद स्थित इंटरनेशन फार्मा कम्पनी भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड देश में कोवैक्सीन के ट्रायल्स कर रही है। इस वैक्सीन के  तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल्स, उत्तर प्रदेश के इन दो शहरों में करने के लिए कम्पनी को मंजूरी दी गयी है। ट्रायल्स के लिए लिए लखनऊ के संजय गांधी पीजीआई के डायरेक्टर डॉ. आर.के. धीमन को लखनऊ का नोडल अधिकारी तो वहीं,  बीआरडी मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर डॉ. गणेश कुमार की गोरखपुर के नोडल अधिकारी के तौर पर नियुक्ती की गयी है। ये दोनों ही भारत बॉयोटेक (Bharat Biotech) के साइंटिस्ट्स और नोडल ऑफिसर्स के सहयोग से वैक्सीन (Covaxin) का क्लीनकल ट्रायल करेंगे।

वैश्विक महामारी कोविड-19 संक्रमण के प्रकोप से लोगों को बचाने के लिए इन वैक्सीन्स का निर्माण किया जा रहा है। गौरतलब है कोवैक्सीन की क्षमता और सेफ्टी का सही ढंग से पता लगाने के लिहाज से ये ह्यूमन ट्रायल्स किए जाएंगे। किसी भी वैक्सीन का तीसरा चरण बहुत संवेदनशील माना जाता है क्योंकि, इस चरण में मनुष्यों के शरीर में वैक्सीन इंजेक्ट की जाती है। इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया की शुरूआत सितंबर महीने के अंत में या अक्टूबर महीने के पहले सप्ताह में हो सकती है।

कोवैक्सीन है भारत का पहला स्वदेशी कोविड-19 टीका

देश में पूरी तरह तैयार हो रहे कोवैक्सीन को कोविड-19 का पहला स्वदेशी कोविड-19 टीका कहा जा रहा है। भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड ने भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) और राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (NIV) के साथ मिलकर भारत का पहला स्वदेशी टीका, कोवैक्सीन तैयार किया है।  अब तक इस वैक्सीन के पहले और दूसरे फेज के ट्रायल्स हो चुके हैं।  समाचार एजेंसी आईएएनएस को अपर मुख्य सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) अमित मोहन प्रसाद ने जानकारी बताया कि तीसरे चरण का ट्रायल यूपी में लखनऊ व गोरखपुर में करने को मंजूरी दी गई है। इस ट्रायल के दौरान इन दोनों संस्थानों के साथ-साथ वॉलिंटियर्स पर भी इसका परीक्षण किया जाएगा।

विशेषज्ञों के अनुसार वैक्सीन के तीसरे चरण में देखा जाता है कि लोगों की बीमारी के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित हुई है या नहीं। इसका कोई दुष्परिणाम तो नहीं हो रहा है। टीका कोवैक्सीन के ट्रायल के तहत कोरोना के फ्रंट लाइन वर्कर व अन्य अलग-अलग उम्र के लोगों को टीका लगाया जाता है। टीका लगाने से पहले एंटीबाडी चेक की जाती है, अगर एंटीबाडी शून्य है तो टीका लगाया जाता है। फिर दोबारा खून के नमूने की जांच होती है, अगर एंटीबाडी बन रही है तो टीका काम कर रहा है।

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