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Coronavirus Vaccine: चीन में बनी कोरोनावायरस वैक्सीन पाइकोवैक बंदरों पर प्रभावी, शरीर में जाते ही एंटीबॉडी का होता है निर्माण

चीन से राहत देने वाली एक खबर सामने आई है कि चीन में बनी कोरोनावायरस की वैक्सीन बंदरों पर प्रभावी साबित हुई है। पाइकोवैक (PiCoVacc) नाम की इस वैक्सीन को पेइचिंग स्थित सिनोवैक बायोटेक कंपनी ने तैयार की है। यह वैक्सीन शरीर में जाते ही प्रतिरक्षा प्रणाली को एंटीबॉडी बनाने पर जोर देती है और एंटीबॉडी वायरस को खत्म करने लगती है।

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Written By: Anshumala | Updated : May 8, 2020 11:24 PM IST

Coronavirus Vaccine in china: देश-दुनिया में कोविड-19 महामारी (Covid-19 pandemic) थमने का नाम नहीं ले रही है। लोगों के मन-मस्तिष्क में कोरोनावायरस का कहर अब डर, तनाव और अवसाद के रूप में जन्म ले रहा है। दुनिया भर के वैज्ञानिक कोरोना का वैक्सीन (Coronavirus vaccine) तैयार करने में लगे हुए हैं। दुनिया भर में कोरोना से मरने वालों की संख्या (Coronavirus death toll) लगभग ढाई लाख हो गई है और संक्रमित लोगों की संख्या 39 लाख के पार है। अब तक इस वायरस को खत्म करने के लिए कोई भी वैक्सीन तैयार नहीं हो पाई है। लेकिन, चीन से वैक्सीन को लेकर एक अच्छी खबर आ रही है। चीन के शोधकर्ताओं का कहना है कि चीन में एक ऐसी कोरोनावायरस की वैक्सीन (Coronavirus Vaccine in china) तैयार की गई है, जो बंदरों पर प्रभावी साबित हुई है।

वैक्सीन को दिया गया पाइकोवैक (PiCoVacc) 

पाइकोवैक (PiCoVacc) नाम की इस वैक्सीन को पेइचिंग स्थित सिनोवैक बायोटेक कंपनी ने तैयार की है। यह वैक्सीन शरीर में जाते ही प्रतिरक्षा प्रणाली को एंटीबॉडी बनाने पर जोर देती है और एंटीबॉडी वायरस को खत्म करने लगती है। दरअसल, इस वैक्सीन पर काम करने वाले शोधकर्ताओं ने एक तरह के प्रजाति के बंदरों (रीसस मैकाक्स) को यह वैक्सीन लगाई और फिर तीन सप्ताह बाद बंदरों को नोवल कोरोनोवायरस (Novel coronavirus) से ग्रसित करवाया।

एक सप्ताह बाद, जिन बंदरों को भारी संख्या में वैक्सीन दी गई थी, उनके फेफड़ों में वायरस नहीं मिला, जिसका साफ अर्थ है कि यह वैक्सीन असरदार और कामयाब है। इस बीच, जिन बंदरों को पाइकोवैक वैक्सीन नहीं दी गई थी, वे सभी कोरोनावायरस से ग्रसित पाए गए हैं और उन्हें गंभीर निमोनिया (pneumonia) हो गया है। यह वैक्सीन अब मानव पर टेस्ट किया जाएगा।

पाइकोवैक और अन्य वैक्सीन का मनुष्यों पर किया जा रहा है परीक्षण

पाइकोवैक वैक्सीन के अलावा चीनी सैन्य संस्थान द्वारा बनाए गए एक अन्य वैक्सीन का मनुष्यों पर परीक्षण किया जा रहा है। सिनोफर्म कंपनी का उत्पाद, जिसमें पाइकोवैक के समान विधि का उपयोग किया गया है, नैदानिक परीक्षणों के दूसरे चरण में प्रवेश कर गया है।

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लेकिन, इस समय वैक्सीन के अंतिम पड़ाव पर पहुंचने की डगर थोड़ी मुश्किल है। आने वाले समय में इस वैक्सीन के निमार्ताओं को वैक्सीन टेस्ट के लिए स्वयंसेवकों को ढूंढना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि इस समय चीन में कोरोनावायरस के रोगियों की संख्या सिर्फ सैकड़ों में ही है। यही स्थिति 2003 में सार्स की वैक्सीन (SARS Vaccine) बनाने के दौरान भी हुई थी, लेकिन चीन चाहेगा कि जल्द-से-जल्द दुनिया के लिए वैक्सीन बनाई जाए, ताकि पूरी दुनिया के लोगों को इस खतरनाक वायरस से बचाया जा सके।

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हर किसी को है वैक्सीन का इंतजार

इस समय हर कोई इसी आस में है कि कोरोना का वैक्सीन जल्दी तैयार हो और पूरी दुनिया को इस जानलेवा बीमारी से मुक्ति मिले। मौजूदा समय में चीन के अलावा अमेरिका, इटली, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इजराइल आदि देशों के वैज्ञानिक वैक्सीन बनाने में जुटे हुए हैं। यदि ये सभी देश वैक्सीन बनाने में कामयाब होते हैं, तो ये 21वीं सदी में दुनिया के लोगों के भले के लिए वाकई अनोखी बात होगी।

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