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Written By: Anshumala | Updated : August 10, 2020 12:39 PM IST
क्या मोटे लोगों पर असर नहीं करेगी कोरोना की वैक्सीन, वजह जानकर हो जाएंगे हैरान।© Shutterstock.
Obesity and Coronavirus: कोरोना की वैक्सीन का इंतजार हर किसी को बेसब्री से है। वैक्सीन आने पर कितनी कारगर साबित होगी, यह तो बाद की बात है, लेकिन एक चौंकाने वाली स्टडी सामने आई है कि मोटे लोगों पर कोरोना वैक्सीन का असर ही नहीं होगा। इस समय भारत के साथ-साथ रूस, ब्रिटेन, अमेरिका सहित कई देश वैक्सीन बनाने की रेस में आगे चल रहे हैं। रूस ने दावा किया है कि 12 अगस्त को दुनिया की पहली कोरोना वैक्सीन का पंजीकरण करा लेगा।
पहले हुई स्टडी में ये बात सामने आई थी कि मोटापे के शिकार लोगों में कोरोनावायरस से संक्रमित होना का खतरा (Obese people more at risk of catching Corona) अधिक रहता है। अब मोटापा और वैक्सीन से संबंधित एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। यह अध्ययन अमेरिका की अलबामा यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने की है। अध्ययन में कहा गया है कि मोटे लोगों में वैक्सीन (Obesity in hindi) ज्यादा असरदार साबित नहीं होगी।
सार्स-कोव-2 वायरस (SARS-coV-2) से लड़ने के लिए तैयार की जा रही वैक्सीन मोटापे का शिकार लोगों (Obesity and coronavirus in hindi) पर अधिक असरदार साबित नहीं हो पाएगी। इसकी वजह है शरीर में अधिक मात्रा में चर्बी मौजूद होना। इसके लिए शोधकर्ताओं ने अध्ययन में फ्लू (Flu) और हेपेटाइटिस-बी (Hepatitis-B) के टीके का हवाला देते हुए कहा कि 2017 में एक शोध किया गया था, जिसमें मोटापे से ग्रस्त लोगों को फ्लू और हेपेटाइटिस बी का टीका लगाया गया था, जो संबंधित संक्रमण का मुकाबला करने में कारगर साबित नहीं हुए थे। उनमें एंटीबॉडी भी पैदा नहीं हो पाई थी।
अध्ययन में शोधकर्ताओं ने कहा है कि मोटे लोग फ्लू और हेपेटाइटिस के संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। उनमें कोरोना संक्रमण से गंभीर रूप से बीमार होने की आशंका रहती है। शोध के अनुसार, मोटापे से ग्रस्त लोगों में कोरोना की वैक्सीन दो कारणों से काम नहीं करेगी। पहला, टी-कोशिकाओं का ठीक तरह से काम ना करना। टी-कोशिकाएं वे कोशिकाएं होती हैं, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immune system) को एंटीबॉडी पैदा करने का संदेश देती हैं।
दूसरा कारण है, इम्यूनिटी के सक्रिय होने से शरीर में सूजन की समस्या बढ़ सकती है। सूजन होने से 'मैक्रोफेज' नामक कोशिकाओं का निर्माण होना बंद हो जाता है। मैक्रोफेज कोशिकाएं शरीर में मौजूद घातक तत्वों को नष्ट करने का काम करती हैं।
शोध में कहा गया है कि भले ही फ्लू और हेपेटाइटिस-बी के टीके की तरह कोविड-19वैक्सीन मोटे लोगों पर प्रभावी ना हो, लेकिन कुछ हद तक सुरक्षा जरूर प्रदान करेगी। कहने का तात्पर्य ये है कि वैक्सीन थोड़ी भी असर करती है, तो मृत्यु या गंभीर रूप से बीमार होने का खतरा काफी हद तक कम हो सकता है। ऐसे में हर किसी को कोरोना का टीका आने पर टीकाकरण जरूर करा लेना चाहिए।
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