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Written By: Kishori Mishra | Updated : May 23, 2020 1:04 PM IST
कोरोनावायरस के मरीज इस दवा से 7 दिन में हो सकते हैं ठीक, 40 लोगों पर हुआ सफल परीक्षण
Coronavirus Treatment : कोरोनावायरस का कहर पूरी दुनिया में जारी है। इसके लिए दवाई बनाने को लेकर कई वैज्ञानिक परीक्षण कर रहे हैं। अब इसी कड़ी में आगरा के नेमिनाथ होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर का भी नाम जुड़ गया है। इस रिसर्च सेंटर का दावा है कि उन्होंने कोरोनावायरस की औषधि 'ब्रायोनिया एल्वा-200' की खोज (Coronavirus Treatment ) कर ली है। इनके अनुसार, कोरोनावायरस से संक्रमित मरीज महज पांच से सात दिन में ठीक हो सकते हैं। फिलहाल इसकी रिपोर्ट सेंट्रल रिसर्च काउंसिल ऑफ होम्योपैथी को भेजी गई है।
इसके बाद रिपोर्ट इंडियन मेडिकल रिसर्च सेंटर (ICMR) को भी भेजी जाएगी। बता दें कि पांच मई को आईसीएमआर से इन्हें रिसर्च कार्य के लिए अनुमति दी गई थी। इसके बाद रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिकों द्वारा कोविड-19 के मरीजों के लिए दवा बनाने का काम शुरू किया गया था। इस दवा का नाम ब्रायोनिया एल्वा-200 रखा गया है।
टूंडला स्थित एफएच मेडिकल कॉलेज में भर्ती 42 मरीजों पर इस दवा के पहले चरण का परीक्षण (Coronavirus Treatment ) किया। इसमें से 40 मरीजों पर परीक्षण सफल रहा। इन मरीजों की उम्र 10 से 65 साल की है। इसमें से 2 से 3 मरीजों में खांसी, जुकाम और बुखार के लक्षण नजर आए थे। इन 40 मरीजों को लगातर सात दिनों तक दवाई खिलाई गई। पांच से सात दिन के बाद इनका कोविड19 का टेस्ट किया गया, जिसमें सभी मरीजों की रिपोर्ट निगेटिव थी। फिलहाल दो मरीजों की रिपोर्ट आनी बाकी है।
नेमिनाथ होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रदीप गुप्ता ने इस बारे में कहा कि होम्योपैथिक के इस दवा से सिर्फ सात दिन के अंदर मरीज ठीक होकर घर वापस जा सकते हैं। दवा का परीक्षण सफल होने के बाद रिपोर्ट सेंट्रल रिसर्च काउंसिल ऑफ होम्योपैथी को भेज दिया है। इस दवा की सबसे अच्छी बात ये है कि यह मरीजों को नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात और पश्चिमी बंगाल जैसे राज्यों में कोरोनावायरस के मामले सबसे अधिक सामने आए हैं। इन राज्यों के प्रमुख सचिव को ईमेल भेजकर नि:शुल्क दवा उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया गया है।
प्राचार्य डॉ. प्रदीप गुप्ता ने कहा कि अभी इस दवा का परीक्षण 200 मरीजों पर किया जाएगा। लगातार तीन महीने तक रिसर्च कार्य जारी रहेगा। फिलहाल 42 संक्रमित मरीजों पर ही इसका परीक्षण किया गया है। 200 मरीजों पर परीक्षण सफल होने के बाद इसकी अंतिम रिपोर्ट भारत सरकार को भेजी जाएगी।
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