
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Published : November 9, 2020 12:20 PM IST
विशेषज्ञों ने जताई चिंता, कहा- अमेरिका में कोरोना 'महामारी का सबसे बुरा समय' आना अभी बाकी
Coronavirus Spread in India: कोरोना वायरस महामारी ने दुनियाभर में भारी तादाद में लोगों को संक्रमित किया है। आंकड़ों के अनुसार अब वैश्विक स्तर पर 5 करोड़ लोग कोरोना वायरस (Coronavirus Pandemic) से संक्रमित हो गए हैं। वहीं भारत में 85 लाख लोगों को कोरोना संक्रमण होने की पुष्टि की जा चुकी है। भारत आबादी के लिहाज से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है। इसीलिए, यहां कोविड-19 संक्रमितों की संख्या अधिक होने का डर पहले से ही जताया जाता रहा है। लेकिन, दुनिया के अन्य देशों में आबादी और कोविड-19 इंफेक्टेड लोगों का अनुपात देखा जाए तो, भारत में संक्रमितों की संख्या बहुत कम है। (Coronavirus Spread in India)
भारत में कोरोना संक्रमण की दर (Covid-19 Infection in India) कम होने को लेकर दुनियाभर में कई रिसर्च किए गए और एक ऐसी ही रिसर्च में देश में कोरोना संक्रमण के कम मामलों का एक बड़ा कारण पता चला है। इस रिसर्च के अनुसार, भारत के लोगों की एक आदत के चलते वहां कोरोना संक्रमण (Covid-19 Infection) का प्रसार कम हुआ। इस रिसर्च का दावा है कि भारत में लोग यूरोप और अन्य देशों की तुलना में साफ-सफाई (Hygiene) कम रखते हैं। अपेक्षाकृत अधिक गंदा रहने की आदत के कारण भारतीयों को कोरोना संक्रमण से बचने में मदद हुई।
इन शोधकर्ताओं का दावा है कि, भारत के लोग धूल-मिट्टी जैसी चीज़ों के सम्पर्क में अधिक रहते हैं, जिसकी वजह से उनकी इम्यूनिटी वायरस और इंफेक्शन्स के खिलाफ अधिक मज़बूत हो गयी है। गौरतलब है कि भारत में आबादी के अनुपात में कोविड-19 इंफेक्शन से सबसे कम मौतें (Covid-19 Death) हुई हैं। इस रिसर्च को भारत और महामारी की स्थिति के संदर्भ में एक नये दृष्टिकोण के तौर पर देखा जा रहा है।
हालांकि रिसर्च करने वाले एक्सपर्ट्स ने यह भी कहा है कि, ' हमारे निष्कर्षों का मतलब यह नहीं है कि कमज़ोर हेल्थ और साफ-सफाई की कमी जैसे कारणों से ही कोविड19 संक्रमण रोकने में कामयाबी मिली है।' इन शोधकर्ताओं के अनुसार, बैक्टेरिया और सूक्ष्मजीवों के सम्पर्क में आने से कोविड-19 इंफेक्शन के प्रसार को रोकने में मदद होती है। लेकिन, इसके मतलब यह नहीं कि लोग साफ-सफाई को लेकर लापरवाही बरतें। साथ ही उन्होंने इस रिसर्च को पूरी तरह से सही भी नहीं ठहराया है।