कोरोनावायरस की मिली पहली दवा, डेक्सामेथासोन से बच सकती है मरीजों की जान

कोरोनावायरस महामारी लगातार बढ़ती जा रही है। अबतक इस बीमारी की कोई दवा सामने नहीं आई है। इस बीच ब्रिटेन के वैज्ञानिकों का दावा है कि उन्होंने कोरोनावायरस के लिए एक दवा को खोजने में बड़ी कामयाबी (Coronavirus Medicine) हासिल की है।

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Written By: Kishori Mishra | Updated : June 17, 2020 9:54 AM IST

Coronavirus Medicine : कोरोनावायरस महामारी लगातार बढ़ती जा रही है। अबतक इस बीमारी की कोई दवा सामने नहीं आई है। इस बीच ब्रिटेन के वैज्ञानिकों का दावा है कि उन्होंने कोरोनावायरस के लिए एक दवा को खोजने में बड़ी कामयाबी (Coronavirus Medicine) हासिल की है। इस दवा का नाम डेक्सामेथासोन (Dexamethasone) है। यह काफी सस्ती और आसानी से मिलने वाली दवा है। इससे कोरोनावायरस से गंभीर रूप से पीड़ित मरीजों की जान बचाई जा सकती है।  डेक्सामेथासोन दुनिया में जारी परीक्षण का सबसे बड़ा हिस्सा है। इस अध्ययन के नतीजे के आधार पर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने कहा कि जो लोग कोरोनावायरस के कारण वेंटिलेटर पर थे, उन्हें इस दवा का डोज देने पर मौत का खतरा एक तिहाई कम हो गया।

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शोधकर्ताओं के अनुसार, महामारी के शुरुआत में ही अगर ब्रिटेन में इस दवा का इस्तेमाल किया जाता तो करीब 5 हजार लोगों की जान बचाई जा सकती थी। दवा सस्ती (Coronavirus Medicine) होने के कारण गरीब देशों में बढ़ते कोविड के मरीजों को इससे बड़ा फायदा पहुंच सकता था। इस दवा के निष्कर्ष से पता चलता है कि इससे भारी जोखिम वाले मरीजों की जान बचाई जा सकती है।

अस्पताल में भर्ती हुए बिना 20 में से 19 मरीज हुए ठीक 

इस दवा पर हुए अध्ययन के नतीजे में खुलासा हुआ है कि कोरोनावायरस से संक्रमित  20 में से 19  मरीज को अस्पताल में भर्ती कराए बिना इस दवा की मदद से ठीक किया जा सका। हालांकि, अस्पताल में भर्ती हुए मरीजों को भी इस दवा से ठीक किया गया, लेकिन उन्हें ऑक्सीजन या अन्य उपकरणों की जरूरत पड़ी।

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अस्पताल में एडमिट हुए 2 हजार मरीजों को डेक्सामेथासोन की दवा दी। इसके साथ ही अस्पताल से बाहर 4 हजार मरीजों पर दवा का इस्तेमाल किया गया। इस दवा के परीक्षण में पता चला कि जो मरीज वेंटिलेटर पर थे, उनमें इस दवा के इस्तेमाल से मौत का खतरा 40 से 28 फीसद कम हो गया। वहीं, जिन मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी उनमें मौत का खतरा 25 से 20 फीसदी घटा।

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इस बारे में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा, “वैज्ञानिक उपलब्धता पर जश्न मनाने का उचित मौका है। हमने दवा की सप्लाई सुनिश्चित कराने के लिए कदम उठाए हैं।”

शोधकर्ताओं की टीम के प्रोफेसर पीटर होर्बी ने कहा, “अबतक सिर्फ यही दवा है जिसने मृत्यु दर कम किया है। ये बहुत  उत्साहजनक नतीजे हैं।”

लेकिन, विश्व स्वास्थ्य संगठन की मुख्य वैज्ञानिक डॉक्टर सौम्या स्वामीनाथन चेताती हैं, “डेक्सामेथासोन का इस्तेमाल उन लोगों पर नहीं किया जाना चाहिए जो गंभीर रूप से बीमार नहीं हैं। अनुचित तरीके से दवा का सेवन संक्रमण की स्थिति को और बिगाड़ सकता है। इसका इस्तेमाल अस्पताल में और डॉक्टरों की सलाह पर ही होना चाहिए।”

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