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Written By: IANS | Updated : March 9, 2020 2:34 PM IST
लद्दाख में कोरोनावायरस से तीर्थयात्री की मौत।
Coronavirus Latest News:लद्दाख क्षेत्र(coronavirus cases in India)के लेह जिले के एक गांव को अधिकारियों ने सोमवार को सील कर दिया।(coronavirus laddhakh case)अधिकारियों ने यह कार्रवाई ईरान से यात्रा कर लौटे एक तीर्थयात्री की अस्पताल में मौत के बाद की। मृतक कोरोना संदिग्ध था। वहीं एक महिला में कोविड-19 (COVID-19) का परीक्षण पॉजिटिव आया है। जिस अस्पताल में रोगी की मृत्यु हुई, उसके अधीक्षक ने बताया, "रोगी हाल ही में ईरान से तीर्थयात्रा कर लौटा था। उसे लेह कस्बे के सोनम नारबू अस्पताल में अग्नाशय और अन्य प्रमुख अंगों से जुड़ी गंभीर बीमारी के इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। हमने कोरोनावायरस परीक्षण के लिए उसके नमूने भेज दिए हैं और नतीजे आने का इंतजार है।"(coronavirus cases in India)
लद्दाख क्षेत्र में ईरान से लौटे दो तीर्थयात्रियों में पहले ही यह परीक्षण पॉजिटिव आ चुका है। ये मामले सामने आने के बाद अधिकारियों ने लेह कस्बे के हायर सेकेंडरी तक के सभी स्कूलों को 31 मार्च तक के लिए बंद कर दिया है। इसी बीच, 60 साल की एक बुजुर्ग महिला, जो कि 23 फरवरी को ईरान से जम्मू लौटी है, उसमें भी इस खतरनाक वायरस का परीक्षण पॉजिटिव आया है।
अधिकारियों ने बताया, "महिला का एक अलग वार्ड में इलाज चल रहा है।"
कोरोनो वायरस (कोविड-19) के प्रकोप के मद्देनजर एहतियात के तौर पर वरिष्ठ तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा (Dalai Lama) ने अपने सभी कार्यक्रम अनिश्चितकाल के लिए रद्द करने की सोमवार को घोषणा की है। उनके कार्यालय ने आधिकारिक वेबसाइट पर कहा है, "एहतियात के तौर पर दलाई लामा के सभी कार्यक्रमों को अनिश्चितकाल के लिए रद्द कर दिया गया है। धन्यवाद।"
इसके साथ ही सोमवार को यहां होने वाले उनके प्रवचन को भी रद्द कर दिया गया है।
वहां जुटे हजारों लोग जिनमें ज्यादातर पश्चिमी देशों और एशियाई लोग हैं, वे हर साल हिमालय के पहाड़ी शहर में दलाई लामा के प्रवचन सुनने के लिए यहां आते हैं।
इसके अलावा यहां से 10 किलोमीटर दूरी पर स्थित सिधबाड़ी में स्थित करमापाज ग्यिुतो तांत्रिक मोनास्टिक यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने एहतियात के तौर पर इसे एक महीने के लिए बंद कर दिया है।
दलाई लामा साल 1959 में तिब्बत से भारत आ गए थे। वह सबसे पहले उत्तराखंड के मसूरी में करीब एक साल तक रहे। इसके बाद वह हिमाचल प्रदेश के इस शहर में चले आए और अब यहीं रहते हैं।