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Written By: Kishori Mishra | Updated : June 12, 2020 4:34 PM IST
बिस्तरों की सतह पर छूटा वायरस कुछ ही घंटों में पूरे हॉस्पिटल को कर सकता है संक्रमित
Coronavirus Infect : कोरोनावायरस से संक्रमित मरीजों के बिस्तर पर छूटा वायरस लगातार 10 घंटों तक पूरे हॉस्पिटल को संक्रमित कर सकता है। सिर्फ इतना ही नहीं यह वायरस किसी भी सतह पर करीब पांच दिनों तक जिंदा रह सकता है और सिर्फ कुछ ही घंटों में एक बहुत बड़े क्षेत्र को संक्रमित (Coronavirus Infect) कर सकता है। यह खुलासा लंदन कॉलेज के यूनिवर्सिटी में हुआ है। हॉस्पिटल इंफेक्शन जर्नल में इस अध्ययन को प्रकाशित किया गया है।
इस अध्ययन के अनुसार, कोरोनावायरस से संक्रमित मरीज के डिस्चार्ज होने पर जब बिस्तर को डिसइंफेक्ट (Coronavirus Infect ) किया जाता है, तो इस दौरान कोरोनावायरस का डीएनए बेडरेल यानी बेड के हत्थों पर छूट सकता है। इससे हॉस्पिटल के क्षेत्र में कोरोनावायरस तेजी से फैल सकता है। इस बारे में प्रमुख अध्ययनकर्ता डॉ. लीना सिरिक ने कहा कि कोरोनावायरस फैलाने में अस्पतालों की सतहों की अहम भूमिका है। ऐसे में हॉस्पिटल के स्वास्थ्यकर्मियों और सफाई कर्मियों को स्वच्छता का विशेष ख्याल रखना चाहिए।
इस अध्ययन के लिए रिसर्चर्स ने कोरोनावायरस (COVID-19) के बदले पौधों को संक्रमित करने वाला वायरस लिया। इस वायरस को कृत्रिम तरीके से इसकी सघनता को इतना रखा, जितना संक्रमित व्यक्तिों के श्वसन नमूनों में पाया जाता है। इस तरह इसे कोरोनावायरस का नकली रूप बनाया गया। अब इसे एक आइसोलेशन वार्ड के बेड के बेडरेल पर डाला। अध्ययनकर्ताओं ने अगले पांचों तक दूसरे वार्डों के 44 जगहों से नमूने एकत्रित किए।
इस अध्ययन में रिसर्चर्स ने पाया कि कृत्रिम रूप से तैयार किया गया वायरस अगले 10 घंटे में आइसोलेशन वार्ड के बाहरी सतहों को संक्रमित (Coronavirus Infect) कर रहा है। साथ ही अस्पतालों के जिन जगहों से नमूने लिए गए थे, उनके 41 प्रतिशत नमूनों में यह संक्रमण मिला। यह वायरस आर्म रेस्ट, डोर हैंडल, बच्चों के खिलौने, प्ले एरिया जैसे जगहों में फैल चुका था। तीन दिन में यह वायरस 59% स्थानों तक फैल चुका था। वहीं, पांचवें दिन वायरस की मौजूदगी घटकर 41% रह गई थी।
इस शोध को लेकर डॉ. लीना सिरिक ने कहा कि अध्ययन से पता चला है कि अस्पतालों की सतहों से कोरोनावायरस का प्रसार काफी तेजी से हो रहा है। ऐसे में सफाईकर्मियों की लापरवाही घातक हो सकती है। इस अध्ययन से स्पष्ट है कि वायरस सिर्फ खांसने, छींकने और सांस लेने से ही नहीं फैलता, बल्कि इसकी एक बूंद से पूरा सतह संक्रमित (Coronavirus Infect) होकर लोगों को संक्रमित कर सकता है।
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