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Coronavirus in Winters: कोरोना वायरस महामारी ने दुनियाभर में 4 करोड़ से अधिक लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है। वहीं, बहुत-से लोग ऐसे हैं जिनके लिए इस जानलेवा बीमारी की चपेट में आने का रिस्क भी ज़्यादा है। ऐसे लोगों में डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर के मरीज़ों के अलावा 10 साल से छोटे बच्चों और बुज़ुर्गों को भी कोविड-19 के लिए संवेदनशील यानि हाई रिस्क ग्रुप्स में बताया जाता है। वहीं, कम उम्र के ऐसे लोग जिनकी इम्यूनिटी कमज़ोर है या जिन्हें किसी प्रकार की लम्बी बीमारी है उनके लिए भी कोविड-19 संक्रमण होने की आशंका अधिक है। यही वजह है कि दुनियाभर मे हेल्थ एक्सपर्ट्स लोगों को अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखने और सावधानियां बरतने की बार-बार अपील कर रहे हैं। (Coronavirus in Winters predictions)
भारत के नीति आयोग ने आशंका जतायी है कि भारत में सर्दियों के मौसम में कोरोना वायरस की दूसरी लहर (Second Wave of Coronavirus in India) आ सकती है। गौरतलब है कि दुनिया के कई देशों में कोरोना वायरस की सेकेंड वेव आने की आधिकारिक घोषणा भी कर दी गयी है और वहां के स्थानीय प्रशासन और इकाइयां इस संक्रमण का सामना करने के लिए कई तरह के प्रयास भी कर रही हैं।(Coronavirus in Winters)
दरअसल, कोरोना वायरस की शुरूआत ठंड के मौसम में ही हुई थी, जब दिसंबर 2019 में चीन के वुहान में इस वायरस से संक्रमण के प्रारंभिक मामलों का पता चला था। इसके अलावा भी कुछ और कारण हैं जिनकी वजह से आगामी सर्दियों में इस इंफेक्शन के प्रसार में तेज़ी आएगी। एक्सपर्ट्स ने कुछ देशों का उदाहरण देते हुए समझाया है कि क्यों ठंड के मौसम में भारत में कोरोना वायरस के मामले बढ़ने की आशंका बढ़ती जा रही है। कुछ ऐसे ही उदाहरण हैं ये-
फरवरी-मार्च महीने में ऐसा कहा जा रहा था कि गर्मियों का मौसम शुरु होते ही कोरोना वायरस संक्रमण में कमी आएगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी कुछ ऐसा ही बयान दिया था कि अप्रैल महीने की गर्मी के साथ ही वायरस नष्ट होने लगेगा। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ। बहुत गर्म मौसम में भी कोरोना संक्रमण की दर में कमी नहीं आयी।
ब्रिटेन में आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया गया है कि देश में ठंड का मौसम शुरू होने के साथ कोविड-19 के मामलों में 40 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। रविवार 18 अक्टूबर को जारी आंकड़ों के ब्रिटेन कोविड-19 के और 16,982 नए मामले सामने आए हैं, जिनके साथ देश में कोरोनावायरस के मामलों की कुल संख्या 722,409 तक पहुंच गई है। यह जानकारी आधिकारिक आंकड़ों से मिली।
जैसा कि ठंड बढ़ते हुए फ्लू के मामले भी बढ़ने लगते हैं। जैसा कि फ्लू और कोरोना में एक तरह के लक्षण दिखायी पड़ते हैं। ऐसे में सर्दियों में फ्लू के साथ कोविड-19 संक्रमण होने का भी डर है।
महाराष्ट्र राज़्य कोरोना वायरस (Coronavirus in Maharashtra) से सबसे अधिक ग्रसित है। कुछ एक्सपर्ट्स की राय है कि राज्य में सर्दियों (Coronavirus in Winter Season) के मौसम में स्वाइन फ्लू के मरीज़ों की संख्या बढ़ जाती है। इसी तरह मौसमी बीमारियों का इलाज कराने वाले मरीज़ों की तादाद भी मुंबई के अस्पतालों में इस दौरान काफी अधिक होती है। इसीलिए, आशंका है कि राज्य में इन सर्दियों में कोविड-19 संक्रमण की समस्या को और गम्भीर हो जाएगी। (Coronavirus in Winter Season)
विभिन्न स्टडीज़ में ऐसा कहा गया है कि पूर्व में हुई महामारियां जैसे, स्पैनिश फ्लू, एशियाई फ्लू और हांगकांग फ्लू के मामले कम होने के 6 महीने बाद उनकी दूसरी लहर आयी थी इसीलिल, ठंड के मौसम में कोरोना वायरस संक्रमण में भी बढ़ोतरी देखी जा सकती है।