क्या टॉयलेट पाइप से घरों में पहुंच सकता है कोरोनावायरस? शोध में हुआ यह चौंकाने वाला खुलासा

चीनी शोधकर्ताओं ने एक चौंकाने वाला दावा किया है, उन्होंने कहा है कि कोरोनावायरस घरों के टॉयलेट पाइप के जरिए भी फैल (corona transmission in hindi) सकता है और लोगों को संक्रमित कर सकता है।

WrittenBy

Written By: Anshumala | Updated : May 4, 2021 5:11 PM IST

Corona Transmission: पिछले वर्ष शोधकर्ताओं ने कोरोनवायरस (Coronavirus) के बारे में जो बातें कहीं थीं या जो सोचा था, उसके कहीं अधिक शक्तिशाली और खतरनाक अब कोरोनावायरस होता जा रहा है। शुरुआत में यह माना जाता था कि जब कोरोना से संक्रमित व्यक्ति छींकता, खांसता या बोलता है, तो उस दौरान निकलने वाले रेस्पिरेटरी बूंदों (respiratory droplets) के माध्यम से फैलता है। बाद में वैज्ञानिकों ने पाया कि ये घातक वायरस एयरबॉर्न (Airborne) है और एरोसोल (Aerosols) नामक छोटी बूंदों में मौजूद होता है और हवा के माध्यम से प्रसारित होता है। अब, चीनी शोधकर्ताओं ने एक और चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने कहा है कि सार्स-सीओवी-2 (SARS-CoV-2), घरों के टॉयलेट पाइप के माध्यम से भी फैल (corona transmission in Hindi) सकता है।

क्या टॉयलेट पाइप से घरों में पहुंच सकता है कोरोनावायरस?

चीन के ग्वांगझू (Guangzhou, China) में एक खाली अपार्टमेंट के बाथरूम में कोरोनोवायरस के निशान पाए जाने के बाद शोधकर्ताओं ने यह दावा किया है। इस चौंका देने वाले खोज ने यह संकेत दिया है कि वायरस छोटे-छोटे हवा के कणों (airborne particles) के जरिए नाली के पाइप से हवा के जरिए ऊपर पहुंचा, क्योंकि जब आप टॉयलेट फ्लश करते हैं, तो हवा के दबाव बनने के कारण कोरोनावायरस ऊपर आया होगा। यह 17 साल पहले हांगकांग में हुए सार्स (SARS) के प्रकोप की याद ताजा करता है। गौरतलब है कि शुरू से ही कई शोधकर्ता पता लगाने की कोशिश कर रहे थे कि क्या वाकई बाथरूम या टॉयलेट के पाइप के जरिए कोरोना फैल (coronavirus transmission) सकता है।

सिंक, नल और शावर के हैंडल पर भी पाया गया वायरस 

SARS-CoV-2 के निशान फरवरी में एक लंबे समय से खाली पड़े अपार्टमेंट के सिंक, नल और शावर के हैंडल पर भी पाए गए थे। इस घर के नीचे पांच लोगों का घर था और इन सभी ने एक सप्ताह पहले ही अपना कोविड-19 (COVID-19) टेस्ट करवाया था, जिसमें ये पॉजिटिव पाए गए थे। चाइनीज सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के शोधकर्ताओं ने इस महीने की शुरुआत में इन्वायरमेंट इंटरनेशनल में प्रकाशित एक चौंकाने वाली खोज की जानकारी दी। उन्होंने बाथरूम में सार्स-सीओवी-2 से भरे एरोसोल (छोटे एयरबॉर्न पार्टिकल्स) पाया, जो COVID-19 के खतरे को 10 से 12 लेवल अधिक बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया कि कोविड-19 रोगियों के मल (Stool) में मौजुद वायरस प्लंबिंग के जरिए इन घरों में जा सकता है।

शोधकर्ताओं ने 2003 में हांगकांग में हुए अमॉय गार्डन सार्स प्रकोप के साथ इस घटना की तुलना की। अमोय गार्डन प्राइवेट हाउसिंग एस्टेट में रहने वाले 329 निवासी एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (acute respiratory syndrome) या सार्स (SARS) से पीड़ित हुए थे। तब फॉल्टी सीवेज पाइपलाइन्स के कारण लगभग 42 अन्य निवासियों की मौत भी हुई थी। इसे सार्स के कारण होने वाली सबसे विनाशकारी सामुदायिक प्रकोप (community outbreak of SARS) के तौर पर जाना जाता है, जो कोरोनोवायरस के कारण ही होता है।

COVID-19 वायरस मरीजों के मल से भी फैल सकता है?

जब से कोरोना महामारी की शुरुआत हुई है, उसके बाद से ही चीन में वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया है कि कोविड-19 रोगियों (covid-19 patient) के मल में मौजूद संक्रामक वायरस भी संचरण (corona transmission) में भूमिका निभा सकते हैं। फरवरी में हुए एक अध्ययन से पता चला था कि गुआंग्डोंग प्रांत (Guangdong province) के रहने वाले कई लोगों के मल में कोरोनावायरस (COVID-19 Virus May Spread From Stool Of Patients) पाया गया था और वे सभी कोविड​​-19 से संक्रमित थे।

Add The Health Site as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source