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Written By: Kishori Mishra | Published : July 2, 2020 12:06 PM IST
अब ब्लड टेस्ट से पता चल सकता है कोरोना की गंभीरता, रिसर्च में खुलासा
Coronavirus Blood Test : कोरोनावायरस महामारी इन दिनों काफी तेजी से फैल रही है। इसके शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू की तरह होते हैं, इसलिए लोग इसे ज्यादा गंभीरता से नहीं लेते। कोविड-19 टेस्ट के लिए अलग से किट प्रोवाइड की जाती है, लेकिन अब इस बात का खुलासा हुआ है कि कोरोनावायरस की गंभीरता ब्लड टेस्ट (Coronavirus Blood Test) से पता लगाया जा सकता है। जी हां, एक नए अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है कि हॉस्पिटल में भर्ती कोरोना से संक्रमित मरीजों के ब्लड टेस्ट से डॉक्टर्स इस बात का पता लगा सकते हैं कि मरीज के अंदर कोरोनावायरस का संक्रमण कितना गंभीर रूप ले चुका है। ऐसे में डॉक्टर्स इस गंभीर बीमारी की पहचान समय रहते कर सकते हैं और गंभीरता के हिसाब से मरीज के लिए अधिक वेंटिलेटर की जरूरत के हिसाब से तैयारी कर सकते हैं।
इस दौरान कोविड-19 के गंभीर मामलों साइटोकिन स्टॉर्म सामने आ रही है। इस नए खोज से मरीजों की पहचान पहले करके उनका इलाज समय से पहले शुरू किया जा सकता है। इससे यह समझने में भी मदद मिल सकती है कि कोरोनावायरस के मरीजों में डायबिटीज के बुरे परिणाम क्यों हैं?
वर्जिनिया यूनिवर्सिटी के (यूवीए) के रिचर्सर्स ने पाया कि ब्लड टेस्ट द्वारा ब्लड (Coronavirus Blood Test) में एक विशेष साइटोकाइन का स्तर जानकर आगे के परिणामों की भविष्यवाणी करने में मदद मिल सकती है।
साइटोकिन्स-प्रतिरक्षा कोशिकाओं से निर्मित प्रोटीन, रोगप्रतिरोधक प्रणाली द्वारा गंभीर अतिवृद्धि के लिए जिम्मेदार माना जाता है। इसे ही साइटोकिन स्टॉर्म के रूप में जाना जाता है। यह कोरोनावायरस और अन्य बीमारियों से जुड़ा होता है।
इस बारे में वर्जिनिया विश्वविद्यालय (UVA) के अध्ययनकर्ता बिल पेट्री ने कहा, "कोरोना के मरीजों में सांस की गंभीर कमी का पता लगाने के लिए हमने जो प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया की खोज की, वह अन्य फेफड़े के रोगों में नुकसान का कारण बनती है।"
पेट्री ने आगे कहा, इससे नए कोरोना वायरस संक्रमित व्यक्तियों में सांस की कमी को रोकने के लिए एक नया तरीका हो सकता है। इस साइटोकिन को रोककर। हम क्लीनिकल परीक्षण पर विचार करने से पहले कोरोना वायरस के एक मॉडल में इसका परीक्षण करने की योजना बना रहे हैं।"