डायबिटीज ही नहीं बल्कि गठिया मरीजों के लिए भी बहुत खतरनाक है कोरोना वायरस

अभी तक लोगों को पता है कि जिन लोगों को डायबिटीज है उन्हें कोरोना होने पर ज्यादा खतरा है। यानि कि यदि किसी मधुमेह मरीज को कोरोना हो जाए तो उसके रिकवर होने की संभावना कम है। लेकिन ऐसा नहीं है कि ये संवेदनशील स्थिति सिर्फ शुगर के मरीजों के लिए है। डायबिटीज के साथ ही अर्थराइटिस के मरीजों को भी कोरोना वायरस का काफी खतरा है। अमूमन गठिया जैसा लोग उम्रदराज व्यक्तियों में देखा जाता है। ऐसे में बुजुर्गों को अपना खास रखने की जरूरत है नहीं तो स्थिति जानलेवा हो सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के चलते शरीर वायरस से लड़ नहीं पाता है। ऐसे में कमजोर इम्युन सिस्टम आपकी जान पर आफत ला सकता है।

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Written By: Rashmi Upadhyay | Updated : September 4, 2020 9:58 AM IST

​​पिछले 8-9 महीने से कोरोना की मार झेल रही दुनिया अब तक इससे उभर नहीं पाई है। आलम यह है कि दुनियाभर में हर दिन लाखों की संख्या में लोग कोरोना संक्रमित हो रहे हैं। हमारे देश के हालात भी बद से बत्तर होते दिख रहे हैं। रोज हजारों लोग वायरस की चपेट में आ रहे हैं, जिनमें से कुछ लोग सही हो रहे हैं तो कुछ लोग मौत के घाट भी उतर रहे हैं। अगर कोरोना से संक्रमित होने वाले लोगों की हिस्ट्री देखी जाए तो पता चलता है कि अधिकतर वही लोग इसका शिकार हो रहे हैं जो शारीरिक रूप से कमजोर हैं। यानि कि जिन लोगों को पहले से किडनी, लंग्स या पेट संबंधी कोई रोग है तो वह कोविड का शिकार जल्दी हो रहे हैं। हालांकि हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि कुछ बीमारियां ऐसी हैं जिनसे जूझ रहे लोग जरा सी लापरवाही या अनदेखी करने पर इस खतरनाक वायरस का शिकार हो सकते हैं।

अभी तक लोगों को पता है कि जिन लोगों को डायबिटीज है उन्हें कोरोना होने पर ज्यादा खतरा है। यानि कि यदि किसी मधुमेह मरीज को कोरोना हो जाए तो उसके रिकवर होने की संभावना कम है। लेकिन ऐसा नहीं है कि ये संवेदनशील स्थिति सिर्फ शुगर के मरीजों के लिए है। डायबिटीज के साथ ही अर्थराइटिस के मरीजों को भी कोरोना वायरस का काफी खतरा है। अमूमन गठिया जैसा लोग उम्रदराज व्यक्तियों में देखा जाता है। ऐसे में बुजुर्गों को अपना खास रखने की जरूरत है नहीं तो स्थिति जानलेवा हो सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के चलते शरीर वायरस से लड़ नहीं पाता है। ऐसे में कमजोर इम्युन सिस्टम आपकी जान पर आफत ला सकता है।

रुमेटीइड अर्थराइटिस के लिए है ज्यादा खतरा

रूमेटाइड अर्थराइटिस किसी भी उम्र-समूह में होने वाला एक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है। इसके लक्षण काफी हद तक ऑस्टियोअर्थराइटिस से भी मिलते हैं। रुमेटीइड अर्थराइटिस अक्सर तक होता है जब जोड़ों पर अधिक दबाव पड़ता है या वह कमजोर हो जाते हैं। इस तरह की अर्थराइटिस में इम्यून सिस्टम भी गड़बड़ा जाता है। ऐसे में यदि आपको भी यह समस्या है तो अपना खास ख्याल रखें। समय पर दवा लें, अच्छी और संतुलित डाइट लें और अपने लाइफस्टाइल को बेहतर करने पर जोर दें। यदि आपको किसी तरह की समस्या आती है तो डॉक्टर से संपर्क करने में परहेज न करें।

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