
रश्मि उपाध्याय
रश्मि उपाध्याय साल 2014 से मीडिया क्षेत्र से जुड़ी हैं और TheHealthSite.Com में बतौर एडिटर काम कर रही हैं। इन्हें ... Read More
Written By: Rashmi Upadhyay | Updated : August 14, 2020 11:38 AM IST
कोविड 19 और अस्थमा के बीच का अंतर कैसे पता कर सकते हैं?
पिछले कुछ समय से राजधानी दिल्ली में कोरोना वायरस के मामलों में कमी देखी जा रही थी, लेकिन हाल ही के दिनों में वायरस ने फिर से रफ्तार पकड़ ली है। एक बार फिर से दिल्ली में कोरोना के हजार या इससे अधिक मामले सामने आ रहे हैं। राजधानी में कोरोना के मामले बढ़ने के पीछे सबसे ज्यादा युवा आबादी जिम्मेदार है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कुछ समय पहले चेतावनी जारी कर बताया था कि युवाओं में कोरोना का संक्रमण 3 गुना बढ़ गया है। यानि कि दिल्ली में कोरोना के बढ़ते मामलों के लिए अगर कोई सबसे ज्यादा जिम्मेदार है तो वह है युवा। अगर यह बढ़त इसी तरह रही तो हमारी युवा पीढ़ी के साथ ही देश को बड़ा नुकसान हो सकता है।
WHO का कहना है कि युवा पीढ़ी का कोरोना संक्रमण की चपेट में आना एक बहुत बुरी खबर है। कोरोना एक ऐसा संक्रमण है जो व्यक्ति के न सिर्फ शरीर पर बल्कि उनके मस्तिष्क पर भी प्रभाव डालता है। यदि युवा इसी गति से इस वायरस का शिकार होते हैं तो वह शारीरिक रूप से तो प्रभावित होंगे ही साथ ही उनका मानसिक स्वास्थ्य भी कमजोर होगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन इस बात को लेकर भी चिंतित है कि अगर युवा पीढ़ी इसी तरह संक्रमित होती है वह कोरोना के दूसरे बड़े अटैक का कारण बन सकते हैं। साथ ही कोरोना की चपेट में आने वाले मरीजों में लिवर, हार्ट, ब्रेन और किडनी संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।
दिल्ली में युवा तेजी से कोरोना संक्रमण का शिकार हो रहे हैं। जब से दिल्ली में कुछ शर्तों के साथ अनलॉक हुआ है तब से ही कोविड-19 के मामलों में बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। युवाओं द्वारा मास्क ना पहनना, सोशल डिस्टेंसिंग को इग्नोर करना, नाइट पार्टीज और दोस्तों से बढ़ चढ़कर मिलना जैसे कारण इस संक्रमण के बढ़ने के पीछे जिम्मेदार हैं। ऐसे में कहा जा सकता है कि घर के बाहर अधिक एक्सपोजर मिलने से भी कोरोना संक्रमण फैल रहा है।
हमारे देश समेत दुनियाभर में कोरोना के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। भारत में जहां कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 22 लाख के पार हो चुकी है वहीं मरने वालों का आंकड़ा 44 हजार तक पहुंच चुका है। वर्तमान में यह स्थिति है कि रोजाना हजारों की संख्या में नए मामले सामने आ रहे हैं। इस महामारी से बचने का एक ही उपाय है और वह है इसकी वैक्सीन का बन जाना। हाल ही में रूस ने पहली कोरोना वैक्सीन लॉंच तो कर दी है लेकिन भारतीय डॉक्टर समेत दुनियाभर के वैज्ञानिक इस पर संदेह जता रहे हैं। कहा जा रहा है कि वैक्सीन के कई साइड इफेक्ट होने की संभावना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का भी कहना है कि रूस वैक्सीन से जुड़ी कई अहम जानकारियां छिपा रहा है। अब देखना यह होगा कि यह वैक्सीन वाकई कितनी कारगार है।