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Written By: Anshumala | Updated : June 28, 2020 4:26 PM IST
Corona Treatment: कोरोना के गंभीर मरीजों में वैज्ञानिकों को मिले 6 मॉलिक्यूल के पैटर्न, क्या इलाज करना होगा आसान?
Corona vaccine Update: भारत में कोरोनावायरस (Covid-19 in india) का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले 24 घंटे में देश में कोरोना के लगभग 19,906 हजार नए मामले सामने आए हैं, जिसमें लगभग 400 से अधिक लोगों की जान चली गई है। यह आंकड़े स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए हैं। स्वास्थ मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश में मरीजों की संख्या पहुंचकर 5,28,859 हो गई है, जिसमें कुल एक्टिव केसेज 2,03,051 हैं। अब तक 16,095 लोगों की मौत और 309,713 लोगों का उपचार हो चुका है और उन्हें हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई है।
इस महामारी से बचने के लिए अब तक ना तो कोई दवा आई है और ना ही कोई वैक्सीन। हर दिन सिर्फ कोविड-19 वैक्सीन से संबंधित नई खबरें और शोध वर्क सामने आती हैं। हाल ही में डब्लूएचओ के महानिदेशक ने भी कहा है कि कोरोना की वैक्सीन (Corona vaccine Update in hindi) एक साल के भीतर दुनिया को मिल जाएगी। फिलहाल, कोरोना के मरीजों का इलाज वैकल्पिक दवाइयों के इस्तेमाल से किया जा रहा है।
अच्छी खबर ये है कि कोरोना के गंभीर मरीजों में इस वायरस के प्रति रोग प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया का आकलन किया गया और वैज्ञानिकों ने 6 अणुओं के अनोखे पैटर्न की पहचान की है। इन अणुओं के अनोखे पैटर्न का इस्तेमाल कर कोरोना के मरीजों के इलाज में मदद मिल सकेगी।इस पैटर्न के जरिए कोविड-19 बीमारी के चिकित्सीय लक्ष्यों में दवा पहुंचाई जा सकती है। इसके लिए ब्रिटेन के लॉसन स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान के शोधकर्ताओं ने कोरोना के गंभीर मरीजों के ब्लड सैंपल का आकलन किया।
आकलन के बाद आइसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों के खून में 6 शीर्ष अणु या मॉलिक्यूल (Molecules) पाए गए। ये मॉलिक्यूल कोरोना के मरीजों को दूसरे लोगों से अलग करते हैं, जिन्हें यह रोग नहीं है। वैज्ञानिकों का कहना है कि कई मरीजों का इम्यून सिस्टम कोरोनावायरस के खिलाफ अधिक प्रतिक्रिया देता है और शरीर में साइटोकिन स्टॉर्म (एक गंभीर प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया, जिसमें शरीर तेजी से रक्त में अधिक मात्रा में साइटोकिन छोड़ता है ) उत्पन्न करता है। इसमें शरीर में होने वाले नेचुरल सूजन से संबंधित अणु का लेवल हाई हो जाता है, जो शरीर की हेल्दी कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है।
शोधकर्ताओं ने कहा कि फिलहाल चिकित्सक इस अत्यधिक सूजन को कम करने के प्रयास में हैं, लेकिन बिना यह जाने कि उनका लक्ष्य क्या और कहां है यानी शरीर में हमला कहां किया जाए। इस शोध के जरिए पहली बार संभावित चिकित्सीय लक्ष्यों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। इस शोध से यह जरूर स्पष्ट हो गया है कि इलाज के दौरान चिकित्सक को कोरोना के मरीजों पर दवाओं का प्रयोग कहां करना है।
भारत में कोरोना की अब तक की सबसे ऊंची छलांग, 24 घंटे में सामने आए लगभग 20 हजार मामले