फेफड़ों के बाहर पता चला कोविड-19 के लक्षणों का प्रभाव, प्रभावित बीमारी के तौर पर होगा इनका इलाज

अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी के अध्ययन की सह लेखिका आकृति गुप्ता ने कहा, "मैं शुरुआत से ही अग्रिम मोर्चे पर थी। मैंने पाया कि मरीजों में खून के थक्के बहुत ज्यादा जम रहे हैं, उन्हें मधुमेह नहीं होने के बावजूद उनके खून में शुगर की मात्रा बहुत ज्यादा दिख रही थी और कई के दिल और गुर्दे को नुकसान हो रहा था।"

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Written By: Kishori Mishra | Updated : July 15, 2020 10:58 AM IST

Corona Symptoms outside the Lungs : कोरोनावायरस  फेफड़ों को सबसे अधिक प्रभावित करता है। इस बात से हम सभी अच्छे से वाकिफ हैं। अब वैज्ञानिकों ने पहली बार फेफड़ों के बाहर कोरोनावायरस के प्रभावों की गहन समीक्षा उपलब्ध कराई है और इसकी अनुशंसा की (Corona Symptoms outside the Lungs) है। इससे फिजिशियन कोरोवायरस का इलाज शरीर के विभिन्न तंत्रों को प्रभावित करने वाली बीमारी (COVID-19 Treatment) के तौर पर करेंगे। इसमें खून के थक्के जमना, बेहोशी, किडनी का काम न करना जैसे न्यूरोलॉजिकल लक्षण शामिल हैं। इन समीक्षा में भारतीय मूल के वैज्ञानिक भी शामिल हैं।

इस बारे में अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी के अध्ययन की सह लेखिका आकृति गुप्ता ने कहा, "मैं शुरुआत से ही अग्रिम मोर्चे पर थी। मैंने पाया कि मरीजों में खून के थक्के बहुत ज्यादा जम रहे हैं, उन्हें मधुमेह नहीं होने के बावजूद उनके खून में शुगर की मात्रा बहुत ज्यादा दिख रही थी और कई के दिल और गुर्दे को नुकसान हो रहा था।"

‘नेचर मेडिसिन’ पत्रिका में छपे अध्ययनों की समीक्षा के अनुसार, कोरोनावायर (COVID-19) के कई मरीजों को किडनी, दिल और मस्तिष्क से संबंधित समस्याएं होती हैं। अध्ययनकर्ताओं ने अनुशंसा की है कि डॉक्टर्स श्वसन की बीमारियों के साथ ही इन बीमारियों का भी इलाज करें।

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गुप्ता ने कहा, "डॉक्टर्स को कोविड-19 को बहुत से अंगों को प्रभावित करने वाली बीमारी के (Corona Symptoms outside the Lungs)  रूप में देखने की जरूरत है।" रिसर्च के अनुसार, अधिकतर मरीजों में श्वसन संबंधी समस्या के अलावा एक बड़ी समस्या है, वह है खून के थक्के जमना और खून के थक्के के कारण दिल का दौड़ा पड़ सकता है।

इस अध्ययन के एक अन्य सह-लेखक और अमेरिका में हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के कार्तिक सहगल ने कहा, "पूरी दुनिया के वैज्ञानिक यह समझने का प्रयास कर रहे हैं कि यह वायरस किस तरह से सामान्य तौर पर सुरक्षित शारीरिक व्यवस्था को जकड़ लेते हैं। हमें उम्मीद है कि भविष्य में इससे कोविड-19 के प्रभावी इलाज में ज्यादा मदद मिल सकेगी।"

वैज्ञानिकों के अनुसार, इस अध्ययन में एक अन्य आश्चर्यजनक निष्कर्ष का खुलासा हुआ है। इस अध्ययन में पता चला है कि आईसीयू में भर्ती कोरोनोवायरस के मरीजों में किडनी क्षतिग्रस्त होने की समस्या अधिक अनुपात में है।  अध्ययनकर्ताओं ने कहा कि "अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में आईसीयू में भर्ती करीब 50 फीसदी रोगियों के किडनी फेल होने की समस्या थी।" गुप्ता ने कहा, "करीब पांच से दस फीसदी रोगियों को डायलिसिस की जरूरत है। यह काफी ज्यादा संख्या है।"

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