
रश्मि उपाध्याय
रश्मि उपाध्याय साल 2014 से मीडिया क्षेत्र से जुड़ी हैं और TheHealthSite.Com में बतौर एडिटर काम कर रही हैं। इन्हें ... Read More
Written By: Rashmi Upadhyay | Published : June 10, 2021 12:15 PM IST
Image credits by: मरीज की तबीयत में 12 घंटे बाद ही सुधार आ गया था।
Monoclonal Antibody Therapy In Hindi: भले ही भारत में कोरोना के मामले कम दर्ज हो रहे हैं लेकिन मौत का तांडव जारी है। आए दिन कोविड पर नई नई रिसर्च सामने आ रही है और अलग तरह की जानकारी मिल रही है। खबर है कि दिल्ली के सर गंगा राम असपताल में दो कोरो संक्रमितों का इलाज मोनोक्लोनल एंटीबॉडी थेरेपी (Monoclonal Antibody Therapy) के द्वारा किया गया है। दोनों मरीजों को जब ये डोज दी गई तो उनकी तबीयत 12 घंटे में ही सही हो गई। अभी तक इस थेरेपी का इस्तेमाल भारत में भी होने लगा है, जिसके शुरुआती नतीजे राहत देने वाले हैं। अस्पताल के डॉक्टर का कहना है कि दो मरीजों में से एक की उम्र 36 साल थी जो तेज बुखार, खांसी, मांसपेशियों में दर्द और कमजोरी के साथ ही व्हॉइट ब्लड सेल्स (White Blood Cells) की कमी से भी पीड़ित थे। बीमारी के 6ठें दिन उन्हें मोनोक्लोनल एंटीबॉडी थेरेपी दी गई है। मरीज की तबीयत में 8 घंटे बाद ही सुधार हो गया था।
जबकि दूसरे मरीज की उम्र 80 साल थी। इनमें तेज बुखार और खांसी के लक्षण थे साथ ही हाइपरटेंशन और डायबिटीज से भी पीड़ित थे। अस्पताल का कहना है कि सीटी स्कैन में हल्की बीमारी की पुष्टि हुई थी। उन्हें पांचवें दिन रेगसीओवी 2 दिया गया। मरीज की तबीयत में 12 घंटे बाद ही सुधार आ गया था। अस्पताल की सीरियर कंसल्टेंट डॉक्टर पूजा खोसला का कहना है कि अगर मोनोक्लोनल एंटीबॉडी थेरेपी का इस्तेमाल सही समय पर किया जाए तो ये कोरोना संक्रमितों के इलाज में गेम चेंजर हो सकती है।
मोनोक्लोनल एंटीबॉडी, एंटीबॉडी की एक कॉपी या प्रति है, जो एक विशिष्ट एंटीजन को टारगेट करती है। पहले इस थेरेपी का इस्तमाल इबोला (Ebola) और एचआईवी (HIV) जैसी बीमारियों में किया जाता था। इसमें स्टेरॉयड और इम्यूनोमॉडयूलेशन का इस्तेमाल कम होता है। इस थेरेपी से ब्लैक फंगस (Black Fungus) या म्यूकरमाइकोसिस (Mucormycosis) जैसे अन्य संक्रमणों का खतरा कम हो जाता है।
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