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Written By: Jitendra Gupta | Published : April 3, 2021 2:46 PM IST
15 देशों में फैल चुका है कोरोना का पहले से ज्यादा घातक वाला वेरिएंट, शोधकर्ता इस कैल्कुलेटर की मदद से लगा रहे हैं नए वेरिएंट का पता
दुनियाभर में एक बार फिर से कोरोना की लहर तेज हो चुकी है और खतरा भी दोगुना तेज हो गया है। ऐसा क्या हुआ है कि कोरोना फिर से बढ़ने लगा और वो भी दोगुनी तेजी से? कोरोना की जिस दूसरी लहर के बारे में लोग बात कर रहे हैं वो लगभग आ ही चुकी है। ये दूसरी लहर पहले से कई ज्यादा घातक है, क्योंकि दुनियाभर के अलग-अलग देशों में कोरोना के नए-नए वेरिएंट सामने आ रहे हैं। हाल ही में एक स्टडी में खुलासा हुआ है कि कोरोना का नया और पहले से ज्यादा घातक वेरिएंट करीब 15 देशों में अपनी जड़ें फैला चुका है। जानिए क्या है पूरा मामला।
हाल ही में लैबोरेट्री सर्विलांस द्वारा किए गए एक अध्ययन से ये सामने आया है कि खतरनाक सार्स-सीओवी-2 का बी117 वैरियेंट पिछले साल आधे नबंवर तक दुनिया भर के 15 देशों में अपनी जड़ें फैला चुका था। बता दें कि बी117 वैरियेंट, मौजूदा कोरोना वायरस से ज्यादा खतरनाक है।
इस वायरस का सबसे पहले पता यूनाइटेड किंगडम में दिसंबर 2020 में पता चला था। एक जर्नल में छपी रिपोर्ट के मुताबिक ये धीरे-धीरे पूरी दुनिया में अपनी जड़ें फैला रहा है। संक्रामक रोगों के बढ़ते प्रभाव में प्रकाशित एक जर्नल में ये बात सामने आई है।
ऑस्टीन स्थित टेक्सास विश्वविद्यालय के बॉयोलॉजी प्रोफेसर लॉरेन एन्सल मैयर्स का कहना है कि हमारे निष्कर्ष बताते हैं कि बी117 वैरियेंट अमेरिका में अक्टूबर 2020 में पाया गया था। जिसकी जांच के लिए 15 देशों से आंकड़े जमा किए गए थे। शोधकर्ताओं के मुताबिक, वहीं पिछले साल 22 सितंबर से 7 दिसंबर तक ब्रिटेन से दुनिया भर के अलग-अलग 15 देशों में सफर करने वाले लोगों ने ये वायरस तमाम देशों में फैला दिया था।
शोधकर्ता मैयर्स में कहा कि अमेरिका में यह वैरियेंट अक्टूबर महीने के बीच में पहुंचा था। उन्होंने बताया कि 'इस स्टडी से लैबोरेट्री सर्विलांस की महत्व का पता चलता है। जहां पहले वायरस सैंपल की स्टडी करके नए वैरियेंट का पता लगाना मुश्किल काम था वहीं अब काम थोड़ा आसान हो गया है।
रिसर्च टीम ने सीक्येनसिंग के लिए एक ऑनलाइन कैल्कुलेटर बनाया जिससे दोनों को मिलाकर नए वैरियेंटस का पता लगा सके। टैक्सास विश्वविद्यालय के सपैन्सर वूडी ने कहा कि, ''नए केलकयूलेटर से हम सार्स-सीओवी-2 से फैलने वाले वायरस के खतरे को कम कर सकते हैं। इससे हमें लैब में नए वैरियेंट पता करने में आसानी होती है। ''
(सोर्स-आईएएनएस)