
रश्मि उपाध्याय
रश्मि उपाध्याय साल 2014 से मीडिया क्षेत्र से जुड़ी हैं और TheHealthSite.Com में बतौर एडिटर काम कर रही हैं। इन्हें ... Read More
Written By: Rashmi Upadhyay | Updated : August 31, 2021 5:21 PM IST
स्टडी में कहा है कि दक्षिणी अफ्रीका में हर महीने C.1.2 जीनोम की संख्या बढ़ रही है.
कोरोना के डेल्टा वेरिएंट के बाद C.1.2 परेशानी का विषय बनता जा रहा है। साउथ अफ्रीका जैसे अन्य देशों में पाया जा चुका कोविड का C.1.2 वेरिएंट काफी संक्रामक और खतरनाक है। स्टडी के अनुसार यह इतना खतरनाक है कि इस पर वैक्सीन का असर करना बहुत मुश्किल है। दक्षिण अफ्रीका में नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर कम्युनिकेबल डिजीज (एनआईसीडी) और क्वाज़ुलु-नेटाल रिसर्च इनोवेशन एंड सीक्वेंसिंग प्लेटफॉर्म (केआरआईएसपी) के वैज्ञानिकों ने कहा कि देश में मई महीने में पहली बार इस वेरिएंट का पता चला था।
वैज्ञानिकों ने कहा कि यह कोविड वेरिएंट 13 अगस्त तक चीन, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, मॉरीशस, यूके, न्यूजीलैंड, पुर्तगाल और स्विटजरलैंड में पाया जा चुका था। वैज्ञानिकों ने दक्षिण अफ्रीका में हर महीने C.1.2 जीनोम की संख्या में लगातार वृद्धि देखी है। मई में जहां जीनोम सीक्वेंस 0.2 प्रतिशत था वो जून में बढ़कर 1.6 प्रतिशत हुआ और फिर जुलाई में 2 प्रतिशत तक बढ़ गया। स्टडी के लेखक का कहना है कि शुरुआती पहचान के दौरान देश में बीटा और डेल्टा वेरिएंटके साथ देखी गई वृद्धि समान है।" शोधकर्ताओं का यह भी कहना है कि दुनिया में अब तक मिले वेरिएंट ऑफ कंसर्न और वेरिएंट ऑफ इंट्रेस्ट की तुलना में C.1.2 में ज्यादा म्यूटेशन देखने को मिला है। सिर्फ यही नहीं, वैज्ञानिकों का कहना है कि ये वेरिएंट इतना संक्रामक है कि वैक्सीन को भी चकमा दे सकता है। स्टडी में कहा है कि दक्षिणी अफ्रीका में हर महीने C.1.2 जीनोम की संख्या बढ़ रही है।
कोलकाता के सीएसआईआर की वैज्ञानिक राय ने कहा कि यह वेरिएंट बहुत तेजी से फैलता है। सी.1.2 के आधे से ज्यादा सीक्वेंस में 14 म्यूटेशन हुए हैं लेकिन कुछ सीक्वेंस में अतिरिक्त बदलाव भी देखा गया।