
रश्मि उपाध्याय
रश्मि उपाध्याय साल 2014 से मीडिया क्षेत्र से जुड़ी हैं और TheHealthSite.Com में बतौर एडिटर काम कर रही हैं। इन्हें ... Read More
Written By: Rashmi Upadhyay | Published : July 20, 2020 2:30 PM IST
मानसून जाते-जाते दोगुने हो सकते हैं कोरोना मामले
देशभर में कोरोनावायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इसी बीच एक रिसर्च में खुलासा हुआ है कि मानसून जाते जाते और सर्दियों की शुरुआत होने पर कोरोनावायरस विकराल रूप धारण कर सकता है। आईआईटी-भुवनेश्वर और एम्स के शोधकर्ताओं द्वारा संयुक्त रूप से किए इस अध्ययन में कहा गया है कि तापमान गिरने से कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो हम यह मान सकते हैं कि अगस्त महीने के बाद COVID-19 के मामलों में बढ़ोत्तरी हो सकती हैं।
आईआईटी-भुवनेश्वर में स्कूल ऑफ अर्थ, ओसियन एंड क्लाइमेट साइंसेज के सहायक प्रोफेसर वी विनोज की अगुवाई में हुई इस रिसर्च में यह भी कहा गया कि ठंड का मौसम कोरोना नामक वायरस के लिए अनुकूल होगा जिससे संक्रमण तेजी से बढ़ सकता है। मानसून का मौसम पहले से ही अपने साथ कई तरह के संक्रमण साथ लाता है। ऐसे में बढ़ती नमी और ठंडक की वजह से कुछ लोगों केा अपना खास ख्याल रखने की जरूरत है। क्योंकि जैसा कि रिसर्च में बताया गया है कि मानसून के लास्ट में वायरस खतरनाक हो सकता है।
डायबिटीज रोगियों की इम्युनिटी कमजोरी होती है इसलिए उन्हें इस दौरान अपना खास ख्याल रखने की जरूत है नहीं तो वह कोरोना संक्रमण का शिकार हो सकते हैं। अगर अब तक देशभर के कोरोना मामलों पर नजर डालें तो पता चलता है कि जो लोग कोरोना से संक्रमित हुए हैं या जिनकी मौत हुई है उनमें सबसे ज्यादा मरीज डायबिटीज और हाइपरटेंशन (बीपी) से पीड़ित थे। कुछ कोरोना मरीज तो ऐसे भी थे जिन्हें डायबिटीज और हाइपरटेंशन दोनों था। वहीं, अगर चाइना की बात करें तो चीन में मृत्यु दर उन लोगों में सबसे ज्यादा थी जिन्हें दिल या फेफड़ों की बीमारी थी। इसके बाद डायबिटीज और हाइपरटेंशन का नंबर आता है।
डायबिटीज के बाद हाइपरटेंशन के मरीजों को कोरोना संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा रहता है। आंकड़े बताते हैं कि अंदाज़तन 3 में से 1 भारतीय हाइपरटेंशन की समस्या से ग्रस्त होता है ऐसे में अगर लापवाही बरती जाए तो भारी संख्या में हाइपरटेंशन के रोगी कोरोना से प्रभावित हो सकते हैं। साथ ही हाइपरटेंशन केा इसलिए भी ज्यादा खतरा बताया जाता है क्योंकि जो दवाएं हाई या लो बीपी के मरीजों को दी जाती हैं उनसे इन्फ़ेक्शन या इसकी गंभीरता का जोख़िम बढ़ सकता है।
अभी तक कोरोना के जितने भी मरीज सामने आए हैं उन सभी में एक जैसे ही लक्षण देखने को मिले हैं। आंकड़े बताते हैं कि इनमें से आधे से ज्यादा (56%) को डायबिटीज थी और करीब 47% लोगों को हाइपरटेंशन था।