सिर्फ फेफड़े ही नहीं शरीर के कई अंगों को प्रभावित करता है कोरोना : एम्स विशेषज्ञों का दावा

एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया, हृदय चिकित्सा विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. अंबुज राय, स्नायु विभाग के प्रमुख डॉ एम वी पद्मा श्रीवास्तव, मेडिसीन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नीरज निश्चल सहित संस्थान के विशेषज्ञों ने नीति आयोग के साथ मिलकर साप्ताहिक ‘नेशनल क्लीनिकल ग्राउंड राउंड्स’ में कोविड-19 का फेफड़े पर होने वाले संभावित जटिलताओं पर चर्चा की।

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Written By: Kishori Mishra | Updated : August 27, 2020 2:45 PM IST

Coronavirus Affected Organs : कोरोनावायरस को लेकर अबतक विशेषज्ञों का कहना है कि यह सबसे अधिक फेफड़ों को प्रभावित करता है। इसके अलावा यह शरीर के कुछ अन्य अंगों को भी प्रभावित करता है, लेकिन अब इस बारे में दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के विशेषज्ञों ने कहा है कि कोविड-19 न सिर्फ फेफड़े को बल्कि, शरीर के लभगभ सभी अंगों को प्रभावित करता है। प्रारंभिक लक्षण छाती की शिकायत से बिल्कुल असंबंधित हो (Coronavirus Affected Organs) सकते हैं।

विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि शरीर के दूसरे अंगों को शामिल करने के लिए, सांस के लक्षणों के आधार पर हल्के, मध्यम और गंभीर श्रेणियों के मामलों को वर्गीकरण करने पर पुन: विचार करना (Coronavirus Affected Organs) चाहिए।

एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया, हृदय चिकित्सा विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. अंबुज राय, स्नायु विभाग के प्रमुख डॉ एम वी पद्मा श्रीवास्तव, मेडिसीन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नीरज निश्चल सहित संस्थान के विशेषज्ञों ने नीति आयोग के साथ मिलकर साप्ताहिक ‘नेशनल क्लीनिकल ग्राउंड राउंड्स’ में कोविड-19 का फेफड़े पर होने वाले संभावित जटिलताओं पर चर्चा की।

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सप्ताहिक चर्चा में एम्स के निदेशक डॉक्टर गुलेरिया ने कहा कि क्योंकि कोरोनावायरस के बारे में हमने अधिक से अधिक जानने की कोशिश की है, तो हमने महसूस किया है कि कोविड-19 फेफड़ों पर अपना प्रभाव दिखाता है। उन्होंने कहा कि यह तथ्य सही है कि कोविड-19 वायरस एसीई 2रिसेप्टर से कोशिका में प्रवेश करता है, इसलिए यह सांस लेने वाली नली और फेफड़ों को अधिक मात्रा में प्रभावित करता है, लेकिन कोविड-19 शरीर के अन्य अंगो को भी प्रभावित कर रहा है।

अपनी चर्चा में गुलेरिया ने आगे कहा कि हमारे पास कई ऐसे मरीज आए हैं, जिन्हें फेफड़ों की कम और अन्य अंगों की अधिक समस्याएं हो रही थीं।

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