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दिवाली के बाद दिल्ली-यूपी समेत अलग-अलग राज्यों में वायु प्रदूषण की समस्या बढ़ गई है। इससे बचने का एक ही रास्ता है कि आप जब भी घर से बाहर निकले तो n95 मस्क लगाकर ही निकले यह ना सिर्फ आपको पॉल्यूशन से बचाएगा बल्कि कोरोनावायरस के संक्रमण से भी आपको सुरक्षा प्रदान करेगा। हालांकि हमें यह भी समझना जरूरी है कि कोरोना संक्रमण के बीच वायु प्रदूषण कितना खतरनाक हो सकता है। इस संबंध में एम्स दिल्ली के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया ने काफी महत्वपूर्ण बातें कहीं हैं।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान दिल्ली के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया ने दिल्ली एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को लेकर कहा कि, हर साल दिवाली और फिर सर्दी के समय उत्तर भारत में पराली जलाए जाने की वजह से, पटाखों और अन्य वजह से और इस मौसम में बहुत कम हवा चलने से प्रदूषण के कारण एक ही जगह पर ठहर जाते हैं। इस वजह से कई दिनों तक बहुत ज्यादा प्रदूषण हो जाता है। दिल्ली के अलावा आसपास के इलाकों में स्मॉग और कम दृश्यता की समस्या देखने को मिलती है। इससे श्वसन संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं शरीर के दूसरे हिस्सों जैसे हृदय पर भी असर देखा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि, कोरोनावायरस और प्रदूषण श्वसन तंत्र को ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं। इसकी वजह से स्थिति और गंभीर हो सकती है।
पारस अस्पताल के एचओडी (पल्मनोलॉजी विभाग) डॉक्टर अरुणेश कुमार का कहना है कि, कोरोना और प्रदूषण दोनों की तुलना नहीं करनी चाहिए लेकिन यह दोनों ही बराबर खतरनाक हैं। प्रदूषण की समस्या हमारे लिए नई नहीं है। हमेशा यह दिक्कत होती है। दिल्ली का आवश्यक AQI पूर्ण लॉकडाउन के कुछ महीनों को छोड़कर कभी भी सामान्य नहीं रहा। 50 से नीचे का AQI सामान्य होता है, जहां तक यह कभी नहीं पहुंच पाता है।
डॉक्टर अरुणेश के मुताबिक, जब प्रदूषण बढ़ता है तो बदकिस्मती से दिल्ली एनसीआर के लोग ज्यादा प्रभावित होते हैं। लोगों में अचानक सांस लेने में दिक्कतें बढ़ जाती हैं तथ्य यह है कि हमारा AQI कभी सामान्य नहीं होता है।