
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Medically Verified By: Dr. Maitri Jindal
कॉन्टैक्ट लेंस का इस्तेमाल (Image Credit- ChatGPT)
मानसून में कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। आंखों के लिए मानसून काफी मुश्किलों भरा होता है। खासकर उन लोगों के लिए जो कॉन्टैक्ट लेंस का इस्तेमाल करते हैं। हवा में नमी, धूल, गंदा पानी और बैक्टीरिया की मौजूदगी इस मौसम में कई गुना बढ़ जाती है। कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वालों के लिए तो यह और भी रिस्की है। ऐसे में कॉन्टैक्ट लेंस का इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि मानसून में इन लेंस की देखभाल कैसे करनी चाहिए।
यशोदा मेडिसिटी की कंसल्टेंट ऑप्थल्मोलॉजिस्ट डॉक्टर मैत्री जिंदर चौधरी बताती हैं "आपके लेंस सीधे कॉर्निया पर लगे होते हैं। इसका मतलब है कि गीले हाथों से लेंस छूना, बारिश के पानी की बूंदें लेंस पर पड़ना, या गंदे केस में लेंस रखने जैसी साफ-सफाई से जुड़ी छोटी-छोटी लापरवाहियां आपकी आंखों के लिए खतरा बन सकती है। वह बताती हैं कि मानसून में आई इन्फेक्शन, कॉर्नियल अल्सर और फंगल इंफेक्शन के केस सबसे ज्यादा देखने को मिलते हैं।" आइए डॉक्टर से जानते हैं कि वो जरूरी टिप्स कौन सी हैं, जो लोगों को आई इन्फेक्शन से बचाएंगी। साथ ही लेंस की सफाई से लेकर कब लेंस नहीं पहनना चाहिए, भी बताएंगे।
डॉक्टर बताती हैं कि लेंस को एक खास स्तर पर नमी बनाए रखने के लिए बनाया जाता है। हालांकि, मानसून में नमी और तापमान में बहुत ज्यादा बदलाव के कारण लेंस के लिए अपनी नमी बनाए रखना मुश्किल हो जाता है। आपने देखा होगा कि कुछ दिनों में लेंस ज्यादा पानी सोख लेते हैं, जबकि नमी वाले मौसम के बावजूद दूसरे दिनों में वे सूख जाते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि उनकी सही देखभाल नहीं हो रही होती है।
साथ ही डॉक्टर ने बताया कि एकैंथामोबा एक सूक्ष्मजीव है जो मिट्टी, पानी और हवा में रहता है और नल के पानी, बारिश की छींटों या गंदे लेंस केस जैसी चीजों के संपर्क में आने पर कॉर्निया तक पहुंचने से पहले लेंस से चिपक जाता है। वहीं लेंस आंख की सतह पर एक बाहरी चीज की तरह होता है, जरा सी भी खरोंच या गंदगी ऐसे जीवों को आंख को संक्रमित करने का आसान रास्ता दे देती है। आइए जानते हैं मानसून में लेंस की केयर कैसे करें।
डॉक्टर के अनुसार "कॉन्टैक्ट लेंस को छूने से पहले कम से कम 20 सेकंड तक अपने हाथों को अच्छी तरह धोएं और उन्हें साफ, डिस्पोजेबल पेपर टॉवल या लिंट-फ्री कपड़े से पोंछकर सुखाएं। ध्यान दें कि आम हैंड टॉवल या फेशियल टिश्यू का इस्तेमाल न करें, क्योंकि उनमें बहुत बारीक रेशे होते हैं जो लेंस पर लग सकते हैं और आंख में खरोंच पैदा कर सकते हैं।
वहीं अगर आप घर से बाहर हैं, तो हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन लेंस को डायरेक्ट छूने का यह तरीका हाथ धोने का विकल्प नहीं हो सकता। हमेशा अपने लेंस पर ताजा और डॉक्टर द्वारा सुझाया गया सॉल्यूशन ही इस्तेमाल करें।
अपने लेंस को किसी भी तरह के पानी के संपर्क में आने से बचाएं, फिर चाहे वह नल का पानी हो या बोतल बंद पानी। साथ ही लेंस को गीला करने के लिए लार का इस्तेमाल न करें। पानी में एकैंथामोबा हो सकता है जो गंभीर इन्फेक्शन का कारण बनता है।
अपने लेंस रखने वाले डिब्बे को हर दिन ताजे कॉन्टैक्ट लेंस सॉल्यूशन से धोएं, न कि नल के पानी से। बॉक्स को उल्टा करके हवा में सूखने दें और बैक्टीरिया को पनपने से रोकने के लिए एक से तीन महीने के अंदर अपना लेंस केस बदल लें।
लेंस लगाने वाले बहुत से लोग चश्मे का उपयोग भी करते हैं। मानसून में कुछ हालात ऐसे होते हैं जिनमें चश्मा ही बेहतर होता है। जैसे अचानक तेज बारिश में चलना, सड़क से पानी उछलने पर ऑटो-रिक्शा में सफर करना, या बारिश में दोपहिया वाहन चलाते समय। अगर बारिश का पानी या अन्य गंदगी आपके लेंस तक पहुंच जाती है, तो यह सीधे आपकी आंखों में जा सकती है।
अगर लेंस पहनने के बाद आपको अपनी आंखों में जलन, लाली या नॉर्मल ड्राईनेस महसूस हो, तो इंतजार करने के बजाय तुरंत चश्मा पहन लें। नजरअंदाज की गई तकलीफ आंखों से जुड़ी किसी गंभीर समस्या का शुरुआती संकेत हो सकती है।
डॉक्टर जिंदल के अनुसार लगातार रेडनेस, किरकिरापन महसूस होना, आंखों से असामान्य पानी या चिपचिपा पदार्थ निकलना, रोशनी में रहने से परेशानी होना, धुंधला दिखना या लगातार जलन होना- ये सभी चेतावनी के संकेत हैं जिन्हें गंभीरता से लेना चाहिए। ध्यान रखें, डॉक्टर की सलाह के बिना मिलने वाली आई ड्रॉप्स से खुद इलाज न करें।
तुरंत अपने लेंस हटा दें, चश्मा पहन लें और जल्द से जल्द आंखों के डॉक्टर को दिखाएं। लक्षण दिखने पर उसी लेंस के जोड़े का दोबारा कभी इस्तेमाल न करें। अक्सर सही समय पर इलाज मिलने से ही छोटी-मोटी समस्या को गंभीर नुकसान में बदलने से रोका जा सकता है। इसलिए अगर आप कॉन्टैक्ट लेंस का इस्तेमाल करते हैं तो डॉक्टर की बताई इन बातों का ध्यान रखें।
अगर आप समय रहते अपनी आंखों की केयर करना शुरू कर दें और लेंस पहनने से पहले व बाद में कुछ जरूरी सावधानियां बरतें, तो कोई समस्या नहीं होगी। साथ ही आप आगे होने वाली आई प्रॉब्लम से बच सकते हैं। आइए डॉक्टर से जानते हैं कि वह इलाज के विषय पर क्या कहती हैं।
डॉक्टर कहती हैं, "मैं सलाह दूंगी कि आप पहले ही अपनी आंखों और कॉन्टैक्ट लेंस की केयर करें। यानी कि जब भी आप घर से बाहर जाएं, तो हमेशा एक इमरजेंसी किट साथ रखें जिसमें सील बंद सॉल्यूशन का डिब्बा और लेंस रखने का दूसरा केस हो। ध्यान रखें कि नमी का स्तर बढ़ने से लेंस में पानी की मात्रा बदल सकती है, जिससे लेंस की फिटिंग पर असर पड़ सकता है।" साथ ही वह आगे बताती हैं कि अगर यह समस्या लगातार बनी रहती है, तो लेंस के दूसरे विकल्पों के बारे में अपने ऑप्टोमेट्रिस्ट से बात करें।
डॉक्टर एडवाइज देते हुए कहती हैं कि अगर मानसून में साफ-सफाई बनाए रखना आपके लिए मुश्किल हो जाता है, तो इस मौसम में रोजाना इस्तेमाल किए जाने वाले डिस्पोजेबल लेंस का इस्तेमाल करने के बारे में सोचें, क्योंकि इनमें सॉल्यूशन और केस की जरूरत ही नहीं पड़ती। ध्यान रहे अगर आप ताजगी पाने के लिए चेहरे पर ठंडा पानी डालते हैं, तो ऐसा करने से पहले अपने लेंस हटा दें और सिर्फ फिल्टर किए हुए पानी का ही इस्तेमाल करें।
डिस्क्लेमर: साफ हाथ, ताजे सॉल्यूशन का इस्तेमाल, सही लेंस का चुनाव और जरूरत पड़ने पर चश्मा पहनने जैसी समझदारी भरी आदतों को अपनाकर आप अपनी आंखों को नुकसान पहुंचाए बिना मानसून के मौसम का आनंद ले सकते हैं।