कॉफी का सेवन करने से डायबिटीज के मरीजों में फैटी लीवर जैसी बीमारियों का रिस्क होता है कम: शोध

कैफीन जैसे प्राकृतिक प्रोडक्ट्स का सेवन करने से डायबिटीज में नॉन अल्कोहलिक फैटी लीवर जैसी बीमारी की गंभीरता कम होती है।

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Written By: Atul Modi | Published : January 13, 2023 8:18 PM IST

कॉफी में पाए जाने वाले कैफ़ीन की मदद से डायबिटीज के मरीजों में नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) की गंभीरता का रिस्क कम होता है। ऐसा टाइप टू डायबिटीज के मरीजों में देखने को मिला है जो मोटापे के भी शिकार है। यह बीमारी लीवर में फैट के जमा होने के कारण होती है। इससे लीवर फाइब्रोसिस जैसी बीमारी के रिस्क में आ सकते हैं जो आगे चल कर सिरोसिस का रूप ले सकता है।

NAFLD का मुख्य कारण शराब का सेवन करना नहीं होता है बल्कि ऐसा एक अनहेल्दी लाइफस्टाइल के कारण होता है जिसमें व्यक्ति शारीरिक रूप से बिलकुल कम एक्टिव होता है और हाई कैलोरी डायट का सेवन करता है। ऐसा करने से मोटापे के केसों में भी वृद्धि आने लगी है। अगर एक बार फैटी लीवर डिजीज के रिस्क में आप आ जाते हैं तो इससे और गंभीर बीमारियों के रिस्क भी बढ़ने लगते हैं। ऐसा पुर्तगाल यूनिवर्सिटी में हुई स्टडी के दौरान एक एक्सपर्ट का कहना है।

एक्सपर्ट का कहना है की हमारी रिसर्च यूरीन में पाई जाने वाली कैफ़ीन और नॉन कैफ़ीन की मात्रा को फैटी लीवर से जोड़ने और निष्कर्ष निकलने वाली पहली रिसर्च है। इसमें यह पाया गया है कि जिन लोगों ने कॉफी की ज्यादा मात्रा का सेवन किया है उनके लीवर हेल्थी पाए गए है। ऐसे लोगों में फाइब्रोसिस का भी रिस्क कम होता है। हालांकि जिन लोगों के शरीर में कैफ़ीन की मात्रा कम पाई जाती है, उनके शरीर में फैटी लीवर होने का रुक भी ज्यादा पाया जाता है।

जिन लोगों को टाइप 2 डायबिटीज है और साथ ही ओवर वेट भी हैं, उन्हें कॉफी का सेवन करना शुरू कर देना चाहिए ताकि लीवर हेल्दी रहे और फैटी लीवर जैसी बीमारी का रिस्क भी काफी कम हो सके। पोली फेनोल जैसे अन्य कंपोनेंट्स भी लीवर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करते हैं।