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Sonia Gandhi Ki Health Ab Kaise Hai: मौसम बहुत ही तेजी से बदल रहा है। कभी तेज धूप से इंसान की चमड़ी जल रही है तो बारिश की ठंडक से वायरल इंफेक्शन फैल रहा है। मौसम की इस मार से कांग्रेस की सांसद सोनिया गांधी भी नहीं बच पाईं। 24 मार्च को सोनिया गांधी को मौसम में बदलाव के कारण संक्रमण फैल गया था, जिसके चलते उन्हें सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती कराया गया।
समस्या गंभीर इसलिए हुई क्योंकि सोनिया गांधी की मेडिकल हिस्ट्री थोड़ी नाजुक है। ऐसे में वेदर चेंज और पुरानी बीमारियों ने मिलकर उनकी हालत को थोड़ा सीरियस कर दिया। लेकिन संतोष की बात यह है कि कांग्रेस सांसद का स्वास्थ्य अब ठीक है और वह रिकवर हो रही हैं। सोनिया के साथ ऐसा किस बीमारी के कारण हुआ और उनकी हालत अब पूरी तरह ठीक है या नहीं, आइए जानते हैं।
सोनिया गांधी का राजधानी के सर गंगा राम अस्पताल में इलाज चल रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अस्पताल के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि उनका इलाज एक गंभीर संक्रमण और उससे संबंधित जटिलताओं के लिए किया जा रहा है। अब उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है, लेकिन फिर भी उन्हें फिलहाल कड़ी निगरानी में रखा गया हैं और उन्हें एंटीबायोटिक दवाएं दी जा रही हैं।
सोनिया गांधी की मेडिकल हिस्ट्री की बात करें तो उन्हें ब्रोंकियल अस्थमा था, जो पॉल्यूशन और वेदर चेंज की वजह से बढ़ गया। यही कारण है कि उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया। यह ऐसे कारण हैं जो ब्रीदिंग प्रॉब्लम वाले लोगों के लिए बहुत ही ज्यादा परेशान करने वाले होते हैं।
अपना मां की खराब तबियत को ध्यान में रखते हुए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी गुरुवार सुबह दिल्ली के अस्पताल पहुंचे और अपनी मां के साथ रहे। उन्होंने आने वाली अपनी केरल की निर्धारित राजनीतिक यात्रा भी रद्द कर दी और इसके बजाय नई दिल्ली में ही रुकने का चनय किया।
सामान्य जानकारी के लिए आपका यह जानना बहुत जरूरी है कि ब्रोंकाइटिस मुख्य रूप से पर्यावरणीय कारणों की वजह से होता है, जैसे लंबे समय तक खराब हवा, धुआं, धूल और जहरीली गैसों के संपर्क में रहना आदि। यही कारण है कि दिल्ली के पॉल्यूशन में सोनिया गांधी का ब्रोंकियल अस्थमा ट्रीगर कर गया और उनकी हालत बिगड़ गई। हाल में सोनिया गांधी का हालत में सुधार है और उन्हें एंटीबायोटिक्स दी जा रही हैं।
ज़ाइनोवा शाल्बी अस्पताल, घाटकोपर, मुंबई, पल्मोनोलॉजिस्ट डॉक्टर तन्वी भट्ट का कहना है कि अक्सर लोग ब्रोंकियल अस्थमा या मौसमी एलर्जी के दौरान होने वाली खांसी और सांस की तकलीफ को संक्रमण समझकर खुद ही एंटीबायोटिक्स लेना शुरू कर देते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि अस्थमा एक इन्फ्लेमेटरी (सूजन संबंधी) समस्या है, न कि बैक्टीरियल संक्रमण।
एंटीबायोटिक्स केवल बैक्टीरिया को मारते हैं। अस्थमा या मौसमी बदलाव में होने वाली जकड़न अक्सर वायुमार्ग की संवेदनशीलता के कारण होती है, जिसे इनहेलर्स और एंटी-एलर्जिक दवाओं से नियंत्रित किया जाता है। बेवजह एंटीबायोटिक्स लेने से न केवल शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, बल्कि 'एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस' का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए, बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न लें।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।