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इन एंटीबायोटिक्स का सेवन हृदय रोग के खतरे को बढ़ा सकता है.
बदलते लाइफस्टाइल और पर्यावरण में बीमारियों के इलाज में भी बदलाव की जरूरत महसूस हो रही है. क्योंकि हाल के वर्षों में कॉमन एंटीबायोटिक्स का सेवन भी खतरनाक होने लगा है. हाल ही में हुए एक नये शोध के अनुसार आमतौर पर उपयोग की जाने वाली एंटीबायोटिक्स और हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है. शोधकर्ताओं ने पाया कि एक कॉमन एंटीबायोटिक्स के सेवन से दो तरह की हार्ट प्राब्लम की संभावना बढ़ जाती है.
आमतौर पर सामान्य इलाज से भी जो बीमारी ठीक हो सकती है, उसके इलाज में भी एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल लोगों द्वारा किया जाता है. कुछ मामलों में ऐसा डॉक्टर करते हैं, तो कुछ मामलों मरीज जल्द ठीक होने के लिए एंटीबायोटिक्स दवा देना का अनुरोध करते हैं.
फ़्लोरोक्विनोलोन ग्रुप की एंटीबायोटिक्स जिसमें सिप्रोफ्लाक्सिन, सिप्रो जैसी एंटीबायोटिक्स आती हैं, इनके सेवन से हार्ट में मिट्रल रेगर्गिटेशन का खतरा बढ़ जाता है. मिट्रल रेगर्गिटेशन एक ऐसी हार्ट प्रॉब्लम है जिसमें हार्ट से शरीर में खून जाने की बजाए हार्ट की तरफ ही बैकफ्लो करता है.
ज्यादा एंटीबायोटिक लेने से हो सकती हैं पेट की गंभीर बीमारियां.
शोधकर्ताओं के अनुसार फ़्लोरोक्विनोलोन एंटीबायोटिक्स के सेवन के 30 दिनों बाद तक इस हार्ट प्रॉब्लम का खतरा रहता है. फ़्लोरोक्विनोलोन एंटीबायोटिक्स के सेवन से मिट्रल रेगर्गिटेशन का 2.4 गुना खतरा बढ़ जाता है.
एंटीबायोटिक क्यों है खतरनाक, जानें खतरे की एबीसी.
पूर्व में हुए शोध यह बताते हैं कि अगर हम बिना किसी जरूरत के भी एंटीबायोटिक्स का सेवन करते हैं, तो शरीर में एंटीबायोटिक्स रेजिस्टेंस बनने लगते हैं. इसकी वजह से एंटीबायोटिक्स का फायदा नहीं होता है.
इस शोध में 90 लाख से अधिक रोगियों का सैंपल लेकर अध्ययन किया गया है. शोधकर्ताओं ने यह सलाह दी है कि एंटीबायोटिक का बेहवजह सेवन सुपरबग्स के साथ हार्ट के लिए भी खतरा पैदा कर सकता है.
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