नेशनल डीवॉर्मिंग डे: कोलम्बिया एशिया हॉस्पिटल ने स्कूल में किया डीवॉर्मिंग से जुड़ा प्रोग्राम

डीपीएसजीआई स्कूल के बच्चों को दी गयी डीवॉर्मिंग से जुड़ी जानकारी।

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Written By: Editorial Team | Published : February 13, 2018 12:10 PM IST

नेशनल डीवॉर्मिंग डे के मौके पर कोलम्बिया एशिया हॉस्पिटल, गाज़ियाबाद के कंसल्टेंट पीडियट्रीशियन डॉ. सुमित गुप्ता ने डीपीएसजीआई स्कूल का दौरा किया और अच्छी सेहत के लिए डीवॉर्मिंग की भूमिका के बारे में लोगों को बताया। बच्चों के विषय में बात करते हुए उन्होने बताया कि किस तरह से एनीमिया,कुपोषण आदि की वजह से बच्चोँ के मानसिक और शारिरिक विकास पर असर पडता है और इस सबकी वजह कृमि संक्रमण हो सकता है, जो कि मिट्टी के जरिए बच्चोँ के भीतर प्रवेश करते हैं।

60 से भी अधिक बच्चोँ की उपस्थिति में बचाव के बारे में समझाते हुए डॉ. सुमित ने कहा कि, “डीवॉर्मिन्ग की दवा लेने के साथ-साथ बच्चों को अपने नाखून छोटे और साफ रखने चाहिए, साफ पानी ही पीना चाहिए, आस-पास का वातावरण साफ रखना चाहिए, जूते-चप्पल घर के बाहर निकाल देने चाहिए, फल व सब्जियां खाने से पहले अच्छी तरह से धो लेनी चाहिए, खाने से पहले और टॉयलेट इस्तेमाल करने के बाद हाथों को अच्छी तरह से धोना चाहिए।“

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक, “भारत में 1 से 14 साल की उम्र के लगभग 22 करोड़ बच्चे ऐसे हैं जिन्हें कृमि संक्रमण या पेट के कीड़ों का खतरा है, ऐसे में डीवॉर्मिंग के बारे में आस-पास जागरुकता फैलाने की बहुत जरूरत है।

क्यूं मनाया जाता है नेशनल डीवॉर्मिंग डे

बच्चों में कृमि संक्रमण के मामलोँ को कम करने के लिए देश में नेशनल डीवॉर्मिंग डे मनाया जाता है। बच्चे देश का भविष्य हैं; ऐसे में उन्हे हर प्रकार से स्वस्थ्य और प्रसन्न रहना चाहिए। कृमि संक्रमण, सेहत पर इसका असर, बचाव और इलाज के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए भारत सरकार (मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर) द्वारा चलाया जाने वाला यह बहुत बडा अभियान है। कृमि संक्रमण बच्चे में एनीमिया की वजह भी बना सकता है, उन्हें कुपोषित कर सकता है, कमज़ोर, बीमार, थका हुआ बना सकता है। ऐसे में बच्चा किसी भी चीज में ध्यान नही लगा पाता है।