
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : May 27, 2020 11:48 AM IST
कोविड-19 इंफेक्शन (Covid-19 Infection) के लिए जहां दुनियाभर में वैक्सीन की खोज की जा रही है। वहीं, लैब्स में इस बात पर रिसर्च चल रहे हैं कि पहले से उपलब्ध दवाइयों की मदद से कैसे कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) का सामना किया जाए। इसी कोशिश में एंटीवायरल ड्रग रेमडेसिवीर (Remdesivir) मददगार साबित हो रही है। दरअसल, इस दवा का का अमेरिका में बड़े पैमाने क्लिनिकल ट्रायल किया गया। जहां, सकारात्मक परिणाम नज़र आए। इसीलिए, अब एक्सपर्ट्स को भी उम्मीद है कि, कोरोना वायरस के इलाज में इस दवा का इस्तेमाल किया जा सकता है।
अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इन्फेक्शियस डिज़िज़ेज़ के समर्थन से यह क्लिनिकल ट्रायल किए गए हैं। लैब में ट्रायल के दौरान इस दवा को कोविड इंफेक्शन के मरीज़ों के लिहाज से कारगर पाया गया। इन रिज़ल्ट्स से अब उम्मीद जगी है कि इस दवा (Remdesivir) की मदद से कोविड मरीज़ों की रिकवरी में सुधार होगा। खासकर वे मरीज़ जिनके लिए ऑक्सीजन थेरपी का इस्तेमाल किया जा रहा है।
इस ट्रायल की फाइडिंग्स को अब सार्वजनिक करने की भी योजना है। इस ट्रायल के दौरान कोविड-19 के मरीज़ों को 10 दिन का प्लेसिबो कोर्स और रेमडेसिवीर (Remdesivir) दवा दी गयी। रिसर्च के दौरान पाया गया कि रेमडेसिवीर प्लेसिबो की तुलना में ज़्यादा कारगर रही। इन दोनों तरीकों पर ध्यान देने के बाद पाया गया रेमडेसिवीर (Remdesivir) की मदद से रिकवरी ज़्यादा जल्दी हो सकी। अब इस डेटा को सार्वजनिक किया जा रहा है। जिसके पीछे साइंटिस्ट की योजना यही है कि ट्रायल के निष्कर्षों के आधार पर जल्द से जल्द मरीज़ों के लिए यह दवा उपलब्ध करायी जा सके।
कोविड इंफेक्शन (Covid-19 Infection) में बहुत गम्भीर स्थिति या इमरजेंसी में अमेरिका में मरीज़ों को यह दवा दी जाती है। अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने कुछ दिन पहले ही कोविड-19 में इमरजेंसी की स्थिति में पीड़ितों को रेमडेसिवीर देने की अनुमति दी थी। हालांकि, एक्सपर्ट्स के अनुसार यह दवाई अकेले ही काफी नहीं है। इसके साथ अन्य थिरेपॉटिक अप्रोच की भी ज़रूरत पड़ेगी। वहीं, कुछ समय पहले इस दवा के बारे में द लांसेज मेडिकल जर्नल में छपी एक स्टडी में दावा किया गया था कि यह कोरोना मरीज़ों के लिए कारगर नहीं है।