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नयी स्टडी का दावा, चीन में बनी ARCoV वैक्सीन ओमिक्रोन के खिलाफ बूस्टर डोज के रूप में प्रभावी

साऊथ चाइना मॉर्निग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक आरकोव के दो डोज ओमिक्रोन स्ट्रेन को खत्म करने में उतने कारगर साबित नहीं हुए हैं, जितने कारगर ये अधिक म्यूटेशन न करने वाले स्ट्रेन से लड़ने में साबित हुए हैं।

Vaccine effective against Omicron Variant:एक नयी स्टडी में कहा गया है कि, चीन में निर्मित और मैसेंजर आरएनए (mRNA) बेस्ड  एंटी-कोविड वैक्सीन आरकोव (ARCoV) ओमिक्रोन वेरिएंट के खिलाफ प्रभावी है। इस स्टडी के अनुसार वैक्सीन की तीसरी डोज या बूस्टर डोज कारगर साबित हुई है। बता दें कि, आरकोव एमआरएनए आधारित पहली ऐसी कोविड वैक्सीन है, जिसके क्लीनिकल परीक्षण को चीन ने मंजूरी दी है। यह वैक्सीन एकेडमी ऑफ मिलिट्री मेडिकल साइंस शुझू एबोजेन बायोसाइंसेज और वैलवक्स बायोटेक्नोलॉजी ने मिलकर विकसित की है। वर्तमान में  यह वैक्सीन क्लीनिकल ट्रायल के तीसरे और अंतिम चरण में है। (Vaccine effective against Omicron Variant in Hindi)

बूस्टर डोज अधिक प्रभावी

साऊथ चाइना मॉर्निग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, आरकोव के दो डोज ओमिक्रोन स्ट्रेन के खिलाफ उतने प्रभावी साबित नहीं हुए हैं, जितने असरदार ये अधिक म्यूटेशन न करने वाले स्ट्रेन से लड़ने में साबित हुए हैं। एमआरएनए के आधार पर ही फाइजर (Pfizer), बायोएनटेक (BioNtech) और मॉडर्ना (Moderna) ने भी अपनी कोरोना वैक्सीन विकसित की हैं।

क्या है mRNA वैक्सीन?

एमआरएनए वैक्सीन, दरअसल शरीर में जाते ही कोशिकाओं को एस प्रोटीन बनाने का निर्देश देती है। एस प्रोटीन कोरोना वायरस के उपरी सतह पर पाया जाता है। अब जैसे ही शरीर में एस प्रोटीन बनता है, तो उससे लड़ने के लिए शरीर में एंटीबॉडीज बनने लगती है। यही एंटीबॉडीज बाद में व्यक्ति के कोरोना संक्रमित होने पर वायरस से लड़ते हैं। एमआरएनए एस प्रोटीन को बनाने का निर्देश देने के बाद नष्ट हो जाता है और यह कोशिका के केंद्र में मौजूद डीएनए तक नहीं पहुंचता है।

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अभी तक नहीं मिली किसी mRNA वैक्सीन को मंजूरी

जर्नल सेल रिसर्च में प्रकाशित रिपोर्ट में वैज्ञानिकों द्वारा दावा किया गया है कि, उन्होंने वैक्सीन लेने वाले 11 लोगों के सीरम के नमूनों का विश्लेषण किया, जिसमें से आठ लोगों के नमूनों में ओमिक्रोन के खिलाफ कम गतिविधि दिखी। शोधकर्ताओं ने बूस्टर डोज का परीक्षण चूहों पर किया। इन चूहों को पहले भी आरकोव के ही दो डोज दिये गये थे। बूस्टर डोज के लगने के बाद देखा गया कि चूहों में कोरोना वायरस के ओमिक्रोन और एक वाइल्ड स्ट्रेन के खिलाफ एंटीबॉडीज बनने लगी। रिपोर्ट में बूस्टर डोज के रूप में आरकोव के इस्तेमाल के फायदे के बारे में बताया गया है।

गौरतलब है कि चीन ने अब तक एमआरएन आधारित किसी कोरोना वैक्सीन को मंजूरी नहीं दी है। वह अब तक पारंपरिक वेक्टर वैक्सीन यानी निष्क्रिय वायरस आधारित वैक्सीन का ही इस्तेमाल कर रहा है लेकिन कोरोना के डेल्टा वेरिएंट और ओमिक्रोन वेरिएंट के खिलाफ ये वैक्सीन उतने कारगर नहीं साबित हुये। चीन में अब तक विदेश में विकसित किसी भी कोरोना वैक्सीन के इस्तेमाल को मंजूरी नहीं दी गयी है। गत साल जुलाई में पहली बार ऐसा लग रहा था कि फाइजर और बायोनटेक की कोरोना वैक्सीन को मंजूरी मिल जायेगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। शंघाई की दवा कंपनी फोसन फार्मास्यूटिकल फाइजर की कोरोना वैक्सीन को चीन में उतारने वाली थी।

(आईएएनएस)

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