दिल्‍ली की जहरीली हवा को खत्म करने के लिए चीन ने बढ़ाया हाथ, शेयर किया मॉडल

China Offers To Help India Fight Delhi Toxic Air As Pollution level : चीन ने वायु प्रदूषण को कम करने के लिए दिल्ली की ओर मदद का हाथ उठाया है।

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Written By: Ashu Kumar Das | Published : November 5, 2025 5:46 PM IST

China Offers To Help India Fight Delhi Toxic Air: भारत की राजधानी दिल्ली समेत इसके आसपास के इलाके प्रदूषण की मार झेल रहे हैं। प्रदूषण का कहर इतना ज्यादा है कि दिल्ली गैस चैंबर बन चुकी है। प्रदूषित हवा की वजह से लोगों का सांस लेना मुश्किल हो चुका है। दिवाली के बाद दिल्ली के कई इलाकों का AQI 400 के पार जा चुका है। दिल्ली में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए ऑर्टिफिशियल बारिश, पानी का छिड़काव और कई प्रकार के उपाय अपनाए जा रहे हैं। हालांकि इन सभी चीजों का असर फिलहाल होता हुआ नजर आ नहीं आ रहा है।

चीन ने बढ़ाया मदद का हाथ

दिल्ली की जहरीली हवा को देखते हुए पड़ोसी मुल्क चीन ने मदद का हाथ बढ़ाया है। चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर "2 तस्वीरों को शेयर करते हुए लिखा है कि चीन भी कभी गंभीर स्मॉग से जूझता था। अब हमारे आसमान नीले हैं। हम भारत के साथ अपना अनुभव साझा करने के लिए तैयार हैं र हमें भरोसा है कि भारत भी जल्द वहां पहुंचेगा।" चीनी दूतावास की प्रवक्ता द्वारा शेयर की गई तस्वीरों के बाद दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों में रहने वाले लोग ये जानना चाह रहे हैं कि आखिरकार कैसे चीन ने वायु प्रदूषण पर कंट्रोल पाया।

2013 में चीन ने की थी वायु प्रदूषण रोकने की पहल

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 2013 तक चीन दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की लिस्ट में नंबर वन था। चीन की राजधानी बीजिंग, शंघाई, और ग्वांगझो जैसे शहरों में धुंध (स्मॉग) की मोटी परत नजर आती थी। लेकिन, 2013 के बाद से चीन ने वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के उपाय शुरू किए जिसका असर भी दिखा। 2013 में चीन ने वायु प्रदूषण को रोकने के लिए जो कदम उठाए थे वो अब सारी दुनिया के लिए एक मॉडल बन चुके हैं।

चीन ने किस फॉर्मूल से किया एयर पॉल्यूशन कंट्रोल

- चीन की सबसे बड़ी सफलता कोयले पर निर्भरता कम करना रही है। पहले चीन की बिजली का लगभग 70% हिस्सा कोयले से बनता था, लेकिन अब इसे 55% से भी कम कर दिया गया है।

- वायु प्रदूषण को कम करने के लिए चीन ने पेट्रोल-डीजल वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को तेजी से अपनाया। सरकार ने EV खरीद पर सब्सिडी, चार्जिंग स्टेशन नेटवर्क और ई-बसों का संचालन बढ़ाया है। चीन ने इलेक्ट्रिक वाहनों को इतनी तवज्जों दी है कि वो अब दुनिया का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक बाजार बन चुका है।

- चीन ने ग्रीन ग्रेट वॉल नामक परियोजना शुरू की, जिसके तहत रेगिस्तानी इलाकों के चारों ओर विशाल वृक्षारोपण किया गया। इससे धूलभरी आंधियां कम हुईं और वायु गुणवत्ता में सुधार आया है।

- चीन ने अपने बड़े शहरों में एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया है, जो रीयल-टाइम में प्रदूषण के स्तर को मापता है। इस डेटा के आधार पर सरकार तुरंत सख्त कदम उठाती है-जैसे फैक्ट्रियों को अस्थायी रूप से बंद करना या ट्रैफिक सीमित करना है।

- फैक्ट्रियों में पुराने प्रदूषण फैलाने वाले उपकरणों को बदलकर लो-एमिशन टेक्नोलॉजी लागू की गई। स्मोक फिल्टर, वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम और एनर्जी एफिशिएंसी स्टैंडर्ड्स को अनिवार्य किया गया है।

- इन सबके अलावा चीन ने प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों और वाहनों पर भारी जुर्माना लगाने की नीति अपना है। ये नीति कंपनियां नियम तोड़ती हैं, उन्हें भारी आर्थिक दंड और बंद करने तक की चेतावनी दी जाती है।

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