
रश्मि उपाध्याय
रश्मि उपाध्याय साल 2014 से मीडिया क्षेत्र से जुड़ी हैं और TheHealthSite.Com में बतौर एडिटर काम कर रही हैं। इन्हें ... Read More
Written By: Rashmi Upadhyay | Updated : February 16, 2021 10:01 AM IST
16 साल की उम्र से छोटे लोगों को फिलहाल कोरोना वैक्सीन नहीं लगेगी।
भले ही देशभर में कोरोना वायरस के खिलाफ वैक्सीन अभियान को शुरू हुए आज पूरा 1 महीना हो चुका है लेकिन वैक्सीन लगने को लेकर नियम बरकरार है। वैसे तो अभी केवल फ्रंट लाइन वर्कर्स को ही कोरोना का टीका (Corona Vaccine) लग रहा है लेकिन इसके अलावा भी वैक्सीन को लेकर कई अन्य नियम हैं। WHO के चीफ साइंटिस्ट डॉक्टर सौम्या स्वामीनाथन ने कहा है कि फिलहाल केवल उन्हीं लोगों को वैक्सीन लगेगी जो प्राथमिकता के दायरे में आते हैं। इससे यह फर्क नहीं पड़ता कि उन्हें पहले कोरोना हुआ था या नहीं। लेकिन जिन भी लोगों को प्राथमिक लिस्ट में रखा गया है उन्हें कोरोना वैक्सीन (Corona Vaccine) लगाई जाएगी।
डॉक्टर सौम्या स्वामीनाथन (Dr Soumya Swaminathan, Chief Scientist, World Health Organization (WHO)) ने हाल ही में IGTV के माध्यम से कहा कि अभी उन्हीं लोगों को वैक्सीन (Corona Vaccine) लगाने की सलाह दी जा सकती है वो प्राथमिक ग्रुप के दायरे में आते हैं। इसके अलावा जिन लोगों को पहले कोरोना संक्रमण हुआ था लेकिन लक्षण बहुत हल्के थे या एसिम्प्टोमेटिक था उन्हें तब तक कोरोना वैक्सीन लगने की जरूरत नहीं है जब तक कि वो उस ग्रुप (50 वर्ष या इससे अधिक की उम्र के लोग) में न जाए तो पहले से तय है। इसके अलावा उन लोगों को फिलहाल कोरोना वैक्सीन (Corona Vaccine) नहीं लगेगी जिनकी उम्र 16 साल से छोटी है। भले ही इन्हें पहले से कोरोना संक्रमण हुआ हो।
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जब भी कोई भी नई दवा या इंजेक्शन बनता है तो क्लिनिकल ट्रायल के बाद ही मार्किट में आता है। यानि कि जब तक साइंटिस्ट और डॉक्टर उस वैक्सीन या दवा को लेकर पूरी तरह से संतुष्ट न हो जाए तब तक उसे लॉन्च नहीं किया जाता है। कोरोना वैक्सीन के संबंध में भी यही हुआ है। तमाम तरह के ट्रायल के बाद ही कोरोना वैक्सीन को लॉन्च किया गया है। लेकिन डॉक्टर सौम्या का कहना है कि कोरोना के टीके की टेस्टिंग 18 साल की उम्र या इससे अधिक के लोगों में हुई है। इसलिए इस ग्रुप के लोगों के लिए वैक्सीन सुरक्षित है। हालांकि यह 16 साल से छोटे बच्चों के लिए भी सुरक्षित है, लेकिन इसका कोई ट्रायल नहीं हुआ है इसलिए साइड इफेक्ट होने की गुंजाइश है। ऐसे में बिना ट्रायल किए छोटे बच्चों को वैक्सीन नहीं दी जा सकती है।
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डॉक्टर सौम्या ने आगे कहा कि वैक्सीन को लेकर जो भी डाटा अभी उपलब्ध है वो 18 साल या इससे अधिक की उम्र के लोगों का है। इसलिए फिलहाल 16 साल की उम्र से छोटे बच्चों को वैक्सीन लगाने की सलाह नहीं दी जा सकती। इसके साथ ही आंकड़े बताते हैं कि व्यस्कों, बुजुर्गों, हाइपरटेंशन के मरीज, डायबिटीज और हार्ट डिजीज के मरीजों को कोरोना संक्रमण अधिक हुआ है। ऐसे में उपरोक्त बीमारियों से जूझ रहे लोगों पर वैक्सीन का सफल क्लिनिकल ट्रायल हुआ है और वैक्सीन को सुरक्षित पाया गया है। हालांकि आने वाले महीनों में बच्चों पर भी वैक्सीन का ट्रायल शुरू होने वाला है। उसके बाद कोरोना वैक्सीन 16 साल से छोटे बच्चों को भी लगाई जाएगी।