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Written By: Anshumala | Published : November 19, 2018 2:12 PM IST
जो बच्चे फीमेल डॉग के संपर्क में रहकर बड़े होते हैं, उनमें दमा का खतरा 15 से 16 फीसदी तक कम होता है। © Shutterstock.
अगर आप कुत्तों को पालने का शौक रखते हैं और आपके घर में छोटे बच्चें हैं तो ये शौक आपके लिए कम लेकिन आपके बच्चे के लिए अधिक फायदेमंद है। हाल ही में हुए एक शोध में यह बात सामने आई है कि जिन घरों में कुत्ते पाले जाते हैं वहां बच्चों में अस्थमा होने का खतरा 15-16 प्रतिशत तक कम होता है।
यह अध्ययन कैरोलिंस्का इंस्टिट्यूट और स्वीडन के उप्सला यूनिवर्सिटी में के शोधकर्ताओं ने किया। इसमें स्वीडन के 2001 से 2004 के बीच जन्में 23,585 नवजात शिशुओं का डाटा शामिल किया जिनके घर में इन बच्चों के प्रथम वर्ष तक कुत्ते थे। सभी कुत्तों को उनके सेक्स, ब्रीड, साइज और हाइपोएलर्जेनिक के अंतर्गत आने वाले डॉग्स के बीच बच्चों का रिश्ता और उनमें होने वाले अस्थमा के खतरे को जांचा गया।
शोधकर्ताओं के एक दल ने कम उम्र में कुत्तों के संपर्क में रहने और उसके बाद दमा के विकास के संबंध के अध्ययन के लिए नेशनल रजिस्टर का उपयोग करते हुए 10 लाख से भी अधिक बच्चों की जानकारी का विश्लेषण किया। इससे पहले शोधों में इसे लेकर कोई निर्णय नहीं निकला था।
इस नये शोध में यह बात निकलकर सामने आई है कि जो बच्चे कुत्तों के संपर्क में खासकर फीमेल डॉग के संपर्क में रहकर बड़े होते हैं, उनमें उन बच्चों की तुलना में दमा का खतरा 15 से 16 फीसदी तक कम होता है जो कुत्तों के संपर्क के बिना बढ़ते हैं।
इस अध्ययन के को-लीड ऑथर टोवे फॉल का कहना है कि पूर्व के अध्ययनों से यह पता चला था कि फार्म पर बड़े होने वाले बच्चों में दमा का खतरा आधा हो जाता है। हम लोग देखना चाहते थे कि घर में कुत्तों के साथ बढ़ने वाले बच्चों में भी यह फॉर्मूला कारगर है या नहीं। इस शोध में यह निष्कर्ष निकला कि कुत्तों (फीमेल डॉग) के संपर्क में बड़े होने वाले बच्चों में दमा का खतरा 16 फीसदी तक कम रहता है।
इस अध्ययन का प्रकाशन ‘जर्नल साइंटिफिक रिपोर्ट्स’ में किया गया।